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निजी अस्पताल में मौत पर परिजनों का हंगामा
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मुरादाबाद। कांठ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के प्रशासनिक अधिकारी की मौत हो गई। लिपिक को हार्ट अटैक आने पर भर्ती किया गया था। परिवारजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव को वेंटिलेटर पर रखकर पैसे वसूलने के गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। पुलिस की मौजूदगी में काफी देर तक अस्पताल में हंगामा चला।
बुद्धि विहार निवासी सुशील कुमार गुप्ता (58) लोक निर्माण विभाग में वरिष्ठ लिपिक थे। एक मार्च की रात सुशील कुमार को आर्ट अटैक पड़ा। परिवारजनों ने आनन फानन में उन्हें कांठ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बेटे शिवम और सत्यम के मुताबिक अस्पताल के चिकित्सकों ने मंगलवार सुबह तक पिता सुशील कुमार से मिलने नहीं दिया। उनकी हालत गंभीर बताते हुए वेंटिलेटर पर रख दिया और 24 घंटे में साढ़े चार लाख की दवाएं मंगवाई गईं। शिवम ने बताया कि मंगलवार सुबह पिता से मिलने की काफी जिद करने पर चिकित्सकों ने बताया कि उनकी सुबह मौत हो गई।
मौत की खबर सुनते ही परिवारजनों में कोहराम मच गया। परिवारजनों ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें गुमराह किया गया। आशंका जताई कि सुशील कुमार गुप्ता की सोमवार को ही मौत हो गई थी। सोमवार को डाक्टरों ने 50 हजार का एक इंजेक्शन मंगवाया। इंजेक्शन पर नोट फॉर सेल लिखा था, जबकि 50 हजार की धनराशि एडवांस में जमा करवाई। परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने वेंटिलेटर पर शव को रखकर पैसे वसूले हैं। मंगलवार को परिवार के लोगों ने जब सुशील कुमार से मिलने का काफी जिद की तो अस्पताल प्रशासन की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। परिवारजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। सूचना पर पुलिस और सुशील कुमार के आफिस के लोग पहुंच गए। काफी देर हंगामा चला, लेकिन परिवार के लोगों ने पोस्टमार्टम करवाने से इंकार कर दिया। पुलिस में भी कोई तहरीर नहीं दी गई। सुशील कुमार के दो बेटे समेत चार बच्चे हैं। दो साल बाद उनकी सेवानिवृत्ति थी।
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बुद्धि विहार निवासी सुशील कुमार गुप्ता (58) लोक निर्माण विभाग में वरिष्ठ लिपिक थे। एक मार्च की रात सुशील कुमार को आर्ट अटैक पड़ा। परिवारजनों ने आनन फानन में उन्हें कांठ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बेटे शिवम और सत्यम के मुताबिक अस्पताल के चिकित्सकों ने मंगलवार सुबह तक पिता सुशील कुमार से मिलने नहीं दिया। उनकी हालत गंभीर बताते हुए वेंटिलेटर पर रख दिया और 24 घंटे में साढ़े चार लाख की दवाएं मंगवाई गईं। शिवम ने बताया कि मंगलवार सुबह पिता से मिलने की काफी जिद करने पर चिकित्सकों ने बताया कि उनकी सुबह मौत हो गई।
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मौत की खबर सुनते ही परिवारजनों में कोहराम मच गया। परिवारजनों ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें गुमराह किया गया। आशंका जताई कि सुशील कुमार गुप्ता की सोमवार को ही मौत हो गई थी। सोमवार को डाक्टरों ने 50 हजार का एक इंजेक्शन मंगवाया। इंजेक्शन पर नोट फॉर सेल लिखा था, जबकि 50 हजार की धनराशि एडवांस में जमा करवाई। परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने वेंटिलेटर पर शव को रखकर पैसे वसूले हैं। मंगलवार को परिवार के लोगों ने जब सुशील कुमार से मिलने का काफी जिद की तो अस्पताल प्रशासन की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। परिवारजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। सूचना पर पुलिस और सुशील कुमार के आफिस के लोग पहुंच गए। काफी देर हंगामा चला, लेकिन परिवार के लोगों ने पोस्टमार्टम करवाने से इंकार कर दिया। पुलिस में भी कोई तहरीर नहीं दी गई। सुशील कुमार के दो बेटे समेत चार बच्चे हैं। दो साल बाद उनकी सेवानिवृत्ति थी।
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