{"_id":"690fa80596c447c4c00a585d","slug":"gold-will-rain-on-meritorious-daughters-moradabad-news-c-15-1-mbd1005-767589-2025-11-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: मेधावि बेटियों पर बरसेगा सोना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: मेधावि बेटियों पर बरसेगा सोना
विज्ञापन
मुरादाबाद। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय का 13 नवंबर को दीक्षांत समारोह प्रस्तावित है। इसमें 93 मेधावियों को मेडल दिए जाएंगे। यह दीक्षांत समारोह मुरादाबाद के लिए बहुत खास रहेगा, क्योंकि यहां से सात मेधावी इस सूची में शामिल हैं और सभी मेधावी बेटियां हैं। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि सभी मेधावियों को ऑनलाइन आमंत्रण पत्र भेजे गए हैं। मेधावियों को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल सम्मानित करेंगी।
छात्र फीसदी कॉलेज
नमिता सिंह 81.91 दिगंबर जैन कॉलेज ऑफ एजूकेशन
हर्षी 76.20 हिंदू कॉलेज
ख्याति 90.30 हिंदू कॉलेज
सबा नाज 77.33 हिंदू कॉलेज
अश्वनी चौधरी 71.44 हिंदू कॉलेज
स्मिता 75.11 केजीके कॉलेज
ज्योति चौहान 85.50 ग्रामोदय पीजी कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर
00
नियमित आठ घंटे पढ़ाई और प्रति सप्ताह रिवीजन से मिली सफलता
मुरादाबाद। दिगंबर जैन कॉलेज ऑफ एजूकेशन की बीएड की छात्रा और आशियाना निवासी नमिता सिंह बताती हैं कि वह प्रतिदिन छह से आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। वह सरकारी शिक्षक बनना चाहती हैं। वर्तमान में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। उन्होंने इससे पहले कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया है। उनका मानना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को तकनीक आधारित पढ़ाई करने के लिए आर्थिक चुनौतियां रुकावट नहीं बननी चाहिए। उनके पिता नरेश सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी नमिता का कहना है कि बड़ी बेटी होने के नाते उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का भी अहसास है। इसलिए आत्मनिर्भर बनकर अपने पापा-मम्मी का सहारा बनना चाहती हैं।
00
मेहनत की ज्योति से मिला सफलता का वैभव
मुरादाबाद। मूलरूप से बरेली निवासी और ग्रामोदय पीजी कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट बिलारी की एमएसडब्ल्यू की छात्रा ज्योति चौहान ने बताया कि उनके पति वैभव राघव इसी काॅलेज में प्रोफेसर हैं। उनके प्रोत्साहन की वजह से ही उनकी पढ़ाई संभव हो सकती है। वह टॉपिक निर्धारित कर अपनी तैयारी करती थीं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी बहुत छोटी है। जब परीक्षा थी तो वह बीमार पड़ गई थी। ऐसे में पति वैभव और मम्मी ने पूरी तरह बेटी को संभाला। मेरी पढ़ाई बाधित नहीं होने दी। वह अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देना चाहती हैं। अब मेरा सपना इसी में शोध करने का है।
विज्ञापन
00
परिवार की पहली बेटी हूं, जो पीएचडी करूंगी: हर्षी
मुरादाबाद। बिजनौर के झालू निवासी और हिंदू कॉलेज की संस्कृत की छात्रा हर्षी संस्कृत की शिक्षक बनना चाहती हैं। उनका लक्ष्य पीएचडी करना है। बताती हैं कि वह अपने परिवार की पहली बेटी हैं, जो पीएचडी करेंगी। उन्होंने प्राइवेट माध्यम से एमए इसलिए किया, क्योंकि गुरुकुल में रहकर वह आचार्य की पढ़ाई कर रही थी। उन्होंने कक्षा आठ तक अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की थी। फिर गुरुकुल में जाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पिता दिनेश कुमार और मां अनीता के प्रोत्साहन ने उन्हें कभी न घबराने की सीख दी। उनका कहना है कि यह सफलता कन्या गुरुकुल चोटीपुरा की आचार्य डॉ. सुमेधा आर्या के मार्गदर्शन और उनके द्वारा सिखाए अनुशासन के कारण मिली है।
सिविल सर्विसेज में जाने का सपना: सबा
मुरादाबाद। इंद्रा चौक निवासी हिंदू कॉलेज की उर्दू की छात्रा सबा नाज ने बताया कि इससे पहले वह बीएड कर चुकी हैं और अर्थशास्त्र विषय से एमए भी किया है। उन्हें उर्दू विषय बहुत पसंद है, इसलिए दोबारा एमए किया। सिर्फ परीक्षा के समय पढ़ाई में जुटने के बजाय वह पूरे साल निरंतरता में तीन से चार घंटे पढ़ाई की हैं। उनका सपना यूपी सिविल सर्विसेज में जाने का है। उनके पिता मोहम्मद नईम चाहते हैं कि वह आत्मनिर्भर बनें। सात बहनों में वह दूसरे नंबर की सबा का कहना है कि समाज में कुछ लोग उनके पापा से कहते थे कि लड़कियाें को पढ़ाकर क्या करोगे। लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी, बल्कि हमेशा पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
सफलता का आधार बनी मां की हिम्मत: ख्याति
मुरादाबाद। अमरोहा में गांव यायापुर निवासी और हिंदू कॉलेज की संस्कृत की छात्रा ख्याति वर्तमान में लुधियाना के एक गुरुकुल में आचार्य पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बीएड और सीटेट किया है। भविष्य में वह संस्कृत शिक्षक बनना चाहती हैं। उनका कहना है कि पहले लोगों में भ्रम था कि गुरुकुल में सिर्फ कर्मकांड की पढ़ाई होती है। इसको लेकर कुछ लोगों ने उनके दाखिला का विरोध भी किया था, लेकिन मां सर्वेश देवी ने हिम्मत दिखाई। आज सभी लोग उनकी सराहना करते हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी के साथ पढ़ाई करना चुनौतीपूर्ण होता है। क्योंकि अपनी पढ़ाई के लिए रात को ही समय मिल पाता है। पेपर के दिनों में चार से पांच घंटे तक पढ़ाई करती थीं।
पुलिस में कार्यरत अश्वनी का शिक्षक बनने का सपना
मुरादाबाद। अभनपुर कुंदरकी निवासी और हिंदू कॉलेज की राजनीति विज्ञान की छात्रा अश्वनी चौधरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। एनईपी में सेमेस्टर सिस्टम होने की वजह से नियमित कॉलेज जाना संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने प्राइवेट माध्यम से एमए किया। बीएड कर चुकी हैं। उनका सपना शिक्षक बनने का है। कहती हैं कि कई वर्षों से शिक्षक पद पर भर्ती नहीं हुई है। इसी बीच यूपी पुलिस में कांस्टेबल पद पर आवेदन मांगे गए थे। खुद को आत्मनिर्भर बना सकूं, इसलिए उन्होंने आवेदन कर दिया और चयन हो गया। वर्तमान में वह मुरादाबाद में ही प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनके पापा सुनील कुमार किसान और मम्मी मंजू देवी गृहिणी हैं।
विज्ञापन
छात्र फीसदी कॉलेज
नमिता सिंह 81.91 दिगंबर जैन कॉलेज ऑफ एजूकेशन
हर्षी 76.20 हिंदू कॉलेज
ख्याति 90.30 हिंदू कॉलेज
सबा नाज 77.33 हिंदू कॉलेज
अश्वनी चौधरी 71.44 हिंदू कॉलेज
स्मिता 75.11 केजीके कॉलेज
ज्योति चौहान 85.50 ग्रामोदय पीजी कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर
00
नियमित आठ घंटे पढ़ाई और प्रति सप्ताह रिवीजन से मिली सफलता
मुरादाबाद। दिगंबर जैन कॉलेज ऑफ एजूकेशन की बीएड की छात्रा और आशियाना निवासी नमिता सिंह बताती हैं कि वह प्रतिदिन छह से आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। वह सरकारी शिक्षक बनना चाहती हैं। वर्तमान में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। उन्होंने इससे पहले कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया है। उनका मानना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को तकनीक आधारित पढ़ाई करने के लिए आर्थिक चुनौतियां रुकावट नहीं बननी चाहिए। उनके पिता नरेश सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी नमिता का कहना है कि बड़ी बेटी होने के नाते उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का भी अहसास है। इसलिए आत्मनिर्भर बनकर अपने पापा-मम्मी का सहारा बनना चाहती हैं।
विज्ञापन
00
मेहनत की ज्योति से मिला सफलता का वैभव
मुरादाबाद। मूलरूप से बरेली निवासी और ग्रामोदय पीजी कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट बिलारी की एमएसडब्ल्यू की छात्रा ज्योति चौहान ने बताया कि उनके पति वैभव राघव इसी काॅलेज में प्रोफेसर हैं। उनके प्रोत्साहन की वजह से ही उनकी पढ़ाई संभव हो सकती है। वह टॉपिक निर्धारित कर अपनी तैयारी करती थीं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी बहुत छोटी है। जब परीक्षा थी तो वह बीमार पड़ गई थी। ऐसे में पति वैभव और मम्मी ने पूरी तरह बेटी को संभाला। मेरी पढ़ाई बाधित नहीं होने दी। वह अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देना चाहती हैं। अब मेरा सपना इसी में शोध करने का है।
विज्ञापन
00
परिवार की पहली बेटी हूं, जो पीएचडी करूंगी: हर्षी
मुरादाबाद। बिजनौर के झालू निवासी और हिंदू कॉलेज की संस्कृत की छात्रा हर्षी संस्कृत की शिक्षक बनना चाहती हैं। उनका लक्ष्य पीएचडी करना है। बताती हैं कि वह अपने परिवार की पहली बेटी हैं, जो पीएचडी करेंगी। उन्होंने प्राइवेट माध्यम से एमए इसलिए किया, क्योंकि गुरुकुल में रहकर वह आचार्य की पढ़ाई कर रही थी। उन्होंने कक्षा आठ तक अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की थी। फिर गुरुकुल में जाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पिता दिनेश कुमार और मां अनीता के प्रोत्साहन ने उन्हें कभी न घबराने की सीख दी। उनका कहना है कि यह सफलता कन्या गुरुकुल चोटीपुरा की आचार्य डॉ. सुमेधा आर्या के मार्गदर्शन और उनके द्वारा सिखाए अनुशासन के कारण मिली है।
सिविल सर्विसेज में जाने का सपना: सबा
मुरादाबाद। इंद्रा चौक निवासी हिंदू कॉलेज की उर्दू की छात्रा सबा नाज ने बताया कि इससे पहले वह बीएड कर चुकी हैं और अर्थशास्त्र विषय से एमए भी किया है। उन्हें उर्दू विषय बहुत पसंद है, इसलिए दोबारा एमए किया। सिर्फ परीक्षा के समय पढ़ाई में जुटने के बजाय वह पूरे साल निरंतरता में तीन से चार घंटे पढ़ाई की हैं। उनका सपना यूपी सिविल सर्विसेज में जाने का है। उनके पिता मोहम्मद नईम चाहते हैं कि वह आत्मनिर्भर बनें। सात बहनों में वह दूसरे नंबर की सबा का कहना है कि समाज में कुछ लोग उनके पापा से कहते थे कि लड़कियाें को पढ़ाकर क्या करोगे। लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी, बल्कि हमेशा पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
सफलता का आधार बनी मां की हिम्मत: ख्याति
मुरादाबाद। अमरोहा में गांव यायापुर निवासी और हिंदू कॉलेज की संस्कृत की छात्रा ख्याति वर्तमान में लुधियाना के एक गुरुकुल में आचार्य पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बीएड और सीटेट किया है। भविष्य में वह संस्कृत शिक्षक बनना चाहती हैं। उनका कहना है कि पहले लोगों में भ्रम था कि गुरुकुल में सिर्फ कर्मकांड की पढ़ाई होती है। इसको लेकर कुछ लोगों ने उनके दाखिला का विरोध भी किया था, लेकिन मां सर्वेश देवी ने हिम्मत दिखाई। आज सभी लोग उनकी सराहना करते हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी के साथ पढ़ाई करना चुनौतीपूर्ण होता है। क्योंकि अपनी पढ़ाई के लिए रात को ही समय मिल पाता है। पेपर के दिनों में चार से पांच घंटे तक पढ़ाई करती थीं।
पुलिस में कार्यरत अश्वनी का शिक्षक बनने का सपना
मुरादाबाद। अभनपुर कुंदरकी निवासी और हिंदू कॉलेज की राजनीति विज्ञान की छात्रा अश्वनी चौधरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। एनईपी में सेमेस्टर सिस्टम होने की वजह से नियमित कॉलेज जाना संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने प्राइवेट माध्यम से एमए किया। बीएड कर चुकी हैं। उनका सपना शिक्षक बनने का है। कहती हैं कि कई वर्षों से शिक्षक पद पर भर्ती नहीं हुई है। इसी बीच यूपी पुलिस में कांस्टेबल पद पर आवेदन मांगे गए थे। खुद को आत्मनिर्भर बना सकूं, इसलिए उन्होंने आवेदन कर दिया और चयन हो गया। वर्तमान में वह मुरादाबाद में ही प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनके पापा सुनील कुमार किसान और मम्मी मंजू देवी गृहिणी हैं।