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इतिहास बनने की कगार पर गांगन, रामगंगा का भी मैला हो रहा दामन
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मुरादाबाद। ब्रिटिश काल में छह बड़ी और करीब आठ छोटी नदियों से घिरा जनपद मुरादाबाद परिसीमन के साथ केवल दो नदियों में सिमट कर रह गया। उसमें से भी अब गांगन लगभग अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है। रामगंगा का फाट भी अब सिमटता जा रहा है। रामगंगा की सांसे भी ई-कचरे का जलता कबाड़ कम करता जा रहा है।
गर्मी के समय में रामगंगा नदी एक नाले की शक्ल ले लेती है, जबकि गांगन मुरादाबाद में प्रवेश से पांच किलोमीटर पहले और संभल रोड से दो किलोमीटर आगे सूख चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाया जा रहा है।
उत्तराखंड के कालागढ़ से लेकर बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं होते हुए फर्रुखाबाद में गंगा नदी में मिलने वाली रामगंगा मुरादाबाद तक पहुंचते ही हांफने लगती है। गर्मियों के समय मुरादाबाद में नदी में जो पानी दिखता है, वह किसी गंदे नाले के जैसा दिखता है। प्रदूषित पानी की वजह से होने वाली ऑक्सीजन की गिरावट के कारण कई बार मछलियां मरने की घटनाएं भी हुई हैं। वहीं गांगन नदी गर्मियों में सूख जाती है।
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ऑक्सीजन का गिर रहा स्तर
24 सितंबर 2021 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जब रामगंगा नदी के पानी की गुणवत्ता की जांच की तो अगवानपुर में ऑक्सीजन का स्तर 8.2 मिली ग्राम प्रति लीटर मिला, लेकिन कटघर पुल पर पहुंचते समय यह स्तर घटकर 4.1 मिली ग्राम प्रति लीटर हो गया। शाहबाद रामपुर में ऑक्सीजन का स्तर 4.8 मिली ग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। जुलाई 2021 में यह स्तर तीन मिली ग्राम प्रति लीटर तक था।
मानकों के अनुसार पीने के पानी में ऑक्सीजन स्तर कम से कम छह मिली ग्राम प्रति लीटर, नहाने के पानी का पांच मिली ग्राम प्रति लीटर और मछलियों के लिए चार मिली ग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। वहीं दिल्ली रोड पुल के पास गांगन में ऑक्सीजन का स्तर 7.4 मिली ग्राम प्रति लीटर पाया गया है।
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गर्मी के समय में रामगंगा नदी एक नाले की शक्ल ले लेती है, जबकि गांगन मुरादाबाद में प्रवेश से पांच किलोमीटर पहले और संभल रोड से दो किलोमीटर आगे सूख चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाया जा रहा है।
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उत्तराखंड के कालागढ़ से लेकर बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं होते हुए फर्रुखाबाद में गंगा नदी में मिलने वाली रामगंगा मुरादाबाद तक पहुंचते ही हांफने लगती है। गर्मियों के समय मुरादाबाद में नदी में जो पानी दिखता है, वह किसी गंदे नाले के जैसा दिखता है। प्रदूषित पानी की वजह से होने वाली ऑक्सीजन की गिरावट के कारण कई बार मछलियां मरने की घटनाएं भी हुई हैं। वहीं गांगन नदी गर्मियों में सूख जाती है।
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ऑक्सीजन का गिर रहा स्तर
24 सितंबर 2021 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जब रामगंगा नदी के पानी की गुणवत्ता की जांच की तो अगवानपुर में ऑक्सीजन का स्तर 8.2 मिली ग्राम प्रति लीटर मिला, लेकिन कटघर पुल पर पहुंचते समय यह स्तर घटकर 4.1 मिली ग्राम प्रति लीटर हो गया। शाहबाद रामपुर में ऑक्सीजन का स्तर 4.8 मिली ग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। जुलाई 2021 में यह स्तर तीन मिली ग्राम प्रति लीटर तक था।
मानकों के अनुसार पीने के पानी में ऑक्सीजन स्तर कम से कम छह मिली ग्राम प्रति लीटर, नहाने के पानी का पांच मिली ग्राम प्रति लीटर और मछलियों के लिए चार मिली ग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। वहीं दिल्ली रोड पुल के पास गांगन में ऑक्सीजन का स्तर 7.4 मिली ग्राम प्रति लीटर पाया गया है।