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पुलिस में फर्जीवाड़ा : जीजा-साले हैं पुराने दोस्त, पहले 'नौकरी' दी फिर की शादी 

Sun, 20 Jun 2021 03:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 20 Jun 2021 03:20 AM IST
सार

  • सिपाही अनिल ने पूछताछ में खोले कई राज
  • ड्यूटी कराने के लिए साले को देता था आठ हजार रुपये

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Fraud in the up police: Brother-in-laws are old friends
पुलिस की गिरफ्त में जीजा और साला... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीजा के स्थान पर साले के नौकरी करने की कहानी में एक नया मोड़ उस वक्त आया जब अनिल ने बताया कि वह और सुनील बचपन के दोस्त हैं। उसने पुलिस के सामने कुबूल किया कि सुनील उसका बचपन का दोस्त है। पुलिस में भर्ती होने के बाद सुनील ने कई बार उसकी वर्दी पहनी थी। उसे अपने स्थान पर नौकरी देने के बाद ही उसकी बहन से शादी कर ली थी।

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सिपाही अनिल और सुनील मुजफ्फरनगर जनपद के खतौली थानाक्षेत्र में अलग-अलग गांव के निवासी हैं। दोनों की दोस्ती पुरानी है। पुलिस के मुताबिक पहले से ही दोनों का एक दूसरे के घर आना-जाना था। दोनों ने एक साथ ही पुलिस में भर्ती के लिए आवेदन भी किया था जिसमें अनिल का चयन हो गया था, मगर सुनील पास नहीं हो सका था। 
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अनिल के प्रशिक्षण के लिए जाने से उसके पास आउट होने तक सुनील हर जगह उसके साथ ही रहा था। एक दूसरे के घर आने-जाने के दौरान ही अनिल सुनील की बहन को मन ही मन पसंद करने लगा था। सुनील के घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। जबकि अनिल संपन्न परिवार से है। मुरादाबाद आने के बाद अनिल ने 2017 में सुनील को अपनी जगह नौकरी पर भेजना शुरू कर दिया था। इसी बीच उसने सुनील के सामने उसकी बहन से शादी करने की इच्छा जताई। जिसके बाद उसने अपने घर में बात की और अपनी बहन का विवाह सुनील के साथ करवा दिया।
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सीओ ठाकुरद्वारा डॉ. अनूप सिंह के अनुसार, अनिल ने पुलिस को यह भी बताया कि वह अपने साले से ड्यूटी कराता था, जिसके बदले में वह उसे हर माह आठ हजार रुपये देता था। अनिल कुमार ने सिपाही बनने के बाद ही बीएड और टीईटी उत्तीर्ण की थी। जब सुनील नौकरी करता था तो अनिल घर में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा था। 

अनिल ने बताया कि सीतापुर में शिक्षक के पद पर उसका चयन हो गया था। कोरोना कॉल की वजह से ज्वाइनिंग नहीं हो पाई थी। वहीं, सुनील कुमार ने पूछताछ में बताया कि शुरुआत में पुलिस अफसरों के सामने जाने से उसे डर लगता था, लेकिन धीरे-धीरे वह सब कुछ सीख गया था। अब उसे पूरा यकीन हो गया था कि वह कभी नहीं पकड़ा जाएगा।

 

26 जनवरी की परेड में भी सुनील ने लिया था हिस्सा

पुलिस अफसरों की लापरवाही और चूक का इस फर्जीवाड़े से बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि साप्ताहिक परेड में शामिल होने के बाद भी अफसर धोखेबाज सिपाही सुनील को पकड़ नहीं सके।

पांच साल तक सिपाही अनिल कुमार की जगह नौकरी करने वाला उसका साला सुनील कुमार पुलिस लाइन में होने वाली साप्ताहिक परेड में भी शामिल होता था। जिसमें उसकी फिटनेस, वर्दी पहनने और सेल्यूट करने के तौर तरीकों को अधिकारी चेक करते थे। जिसमें वह कभी फेल नहीं हुआ। इतना ही नहीं चरित्र पंजिका पर भी उसके बहनोई अनिल कुमार का ही फोटो चस्पा है। इसके बावजूद सुनील कभी नहीं पकड़ा गया।

पुलिस लाइन में शुक्रवार को साप्ताहिक परेड होती है। हालांकि कोरोना काल की वजह से पिछले दो साल में बीच-बीच में शुक्रवार को होने वाली परेड कैंसिल भी कर दी गई थी। मगर इससे पहले लगातार परेड की जा रही थी। इस परेड में यूपी-112 की पीआरवी (पुलिस रिस्पांस व्हीकल) के दस-दस वाहन और उन पर तैनात पुलिस कर्मियों को हर सप्ताह बुलाया जाता था। एक वाहन का माह में एक बार नंबर आ जाता था। इसके अलावा पीआरवी को 26 जनवरी को होने वाली परेड में भी शामिल किया जाता है। आरोपी सुनील ने पूछताछ में बताया है कि वह भी पीआरवी के साथ पुलिस परेड में आता था।

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