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Moradabad News: 20 रुपये का खाना कागजों में, स्टेशन पर 70 की थाली
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मुरादाबाद। रेलवे बोर्ड के आदेश वाला 20 रुपये में इकोनॉमी खाना सिर्फ कागजों तक सीमित है। हकीकत में लोगों को रेलवे स्टेशन पर 70 रुपये की थाली ही खरीदनी पड़ रही है। 17 अप्रैल को रेलवे बोर्ड द्वारा दिए गए आदेश को उत्तर रेलवे के कुछ मंडल अभी तक लागू नहीं कर पाए हैं। मुरादाबाद की भी यही स्थिति है।
बोर्ड ने स्टेशनों पर इकोनॉमी मील बेचने का आदेश जारी किया था। इसमें 20 रुपये में सात पूड़ी व सब्जी, 50 रुपये में स्नैक्स का कॉम्बो बेचने के लिए कहा गया है। इसमें छोले भटूरे और राजमा चावल का कॉम्बो है। रेलवे बोर्ड के आदेश पर 20 अप्रैल को आईआरसीटीसी ने भी सर्कुलर जारी कर दिया। इसके बावजूद मुरादाबाद मंडल मुख्यालय समेत सभी स्टेशनों पर लोगों को इकोनॉमी मील नहीं मिल रहा है। कैंटीन संचालकों का कहना है कि उन्होंने आदेश आने के बाद इकोनॉमी मील बेचना शुरू किया, लेकिन सीएमआई ने इसे हटवा दिया। सीएमआई का कहना था कि उनके पास मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश नहीं हैं। इस कारण रोजाना सैकड़ों यात्रियों को सस्ता खाना नहीं मिल पा रहा है।
गर्मियों में यात्रियों की भीड़ के कारण बोर्ड ने लिया था निर्णय
रेलवे बोर्ड ने इकोनॉमी खाने के आदेश पहले भी जारी किए थे। गर्मियों के मौसम में ट्रेनों में भीड़ को देखते हुए इसे फिर लागू किया गया। उत्तर रेलवे ने इस सीजन में कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाई हैं, जिनमें कई अनारक्षित भी हैं। ऐसे में लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को सुविधा देने के लिए ही इकोनॉमी खाने का प्रस्ताव पास हुआ था। यह खाना अनारक्षित कोचों में सफर करने वाले यात्रियों को कोचों के सामने ट्रॉली लगाकर बेचा जाना है। 26 जून 2024 तक इकोनॉमी खाना बेचने के आदेश हैं।
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रोजाना 35 हजार यात्री पहुंचते हैं मुरादाबाद जंक्शन
रेलवे के आंकड़े के मुताबिक रोजाना 35 हजार यात्री मुरादाबाद जंक्शन पर पहुंचते हैं। इनमें यहां से ट्रेनों में बैठने वाले व यहां पर ट्रेनों से उतरने वाले दोनों शामिल हैं। इनमें करीब 25 हजार यात्री अनारक्षित श्रेणी के सफर वाले होते हैं। इसके अलावा यहां से रोज 150 ट्रेनों में हजारों यात्री गुजरते हैं। ऐसे में यदि रेलवे इकोनॉमी मील के आदेश को जल्द लागू करेगा तो रोज बड़ी संख्या में यात्री इसका लाभ ले सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि वे तैयारियों में जुटे हैं।
वर्जन
रेलवे स्टेशन पर 70 रुपये की थाली के अलावा जनता खाना भी बेचा जा रहा है। उसमें भी 15 से 20 रुपये में पूड़ी व सब्जी देने का प्रावधान है। इकोनॉमी मील अलग योजना है। इसके सर्कुलर को लागू करने के लिए प्लानिंग चल रही है। यह अभी किसी मंडल में लागू नहीं हो पाया है।
- आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम
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बोर्ड ने स्टेशनों पर इकोनॉमी मील बेचने का आदेश जारी किया था। इसमें 20 रुपये में सात पूड़ी व सब्जी, 50 रुपये में स्नैक्स का कॉम्बो बेचने के लिए कहा गया है। इसमें छोले भटूरे और राजमा चावल का कॉम्बो है। रेलवे बोर्ड के आदेश पर 20 अप्रैल को आईआरसीटीसी ने भी सर्कुलर जारी कर दिया। इसके बावजूद मुरादाबाद मंडल मुख्यालय समेत सभी स्टेशनों पर लोगों को इकोनॉमी मील नहीं मिल रहा है। कैंटीन संचालकों का कहना है कि उन्होंने आदेश आने के बाद इकोनॉमी मील बेचना शुरू किया, लेकिन सीएमआई ने इसे हटवा दिया। सीएमआई का कहना था कि उनके पास मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश नहीं हैं। इस कारण रोजाना सैकड़ों यात्रियों को सस्ता खाना नहीं मिल पा रहा है।
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गर्मियों में यात्रियों की भीड़ के कारण बोर्ड ने लिया था निर्णय
रेलवे बोर्ड ने इकोनॉमी खाने के आदेश पहले भी जारी किए थे। गर्मियों के मौसम में ट्रेनों में भीड़ को देखते हुए इसे फिर लागू किया गया। उत्तर रेलवे ने इस सीजन में कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाई हैं, जिनमें कई अनारक्षित भी हैं। ऐसे में लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को सुविधा देने के लिए ही इकोनॉमी खाने का प्रस्ताव पास हुआ था। यह खाना अनारक्षित कोचों में सफर करने वाले यात्रियों को कोचों के सामने ट्रॉली लगाकर बेचा जाना है। 26 जून 2024 तक इकोनॉमी खाना बेचने के आदेश हैं।
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रोजाना 35 हजार यात्री पहुंचते हैं मुरादाबाद जंक्शन
रेलवे के आंकड़े के मुताबिक रोजाना 35 हजार यात्री मुरादाबाद जंक्शन पर पहुंचते हैं। इनमें यहां से ट्रेनों में बैठने वाले व यहां पर ट्रेनों से उतरने वाले दोनों शामिल हैं। इनमें करीब 25 हजार यात्री अनारक्षित श्रेणी के सफर वाले होते हैं। इसके अलावा यहां से रोज 150 ट्रेनों में हजारों यात्री गुजरते हैं। ऐसे में यदि रेलवे इकोनॉमी मील के आदेश को जल्द लागू करेगा तो रोज बड़ी संख्या में यात्री इसका लाभ ले सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि वे तैयारियों में जुटे हैं।
वर्जन
रेलवे स्टेशन पर 70 रुपये की थाली के अलावा जनता खाना भी बेचा जा रहा है। उसमें भी 15 से 20 रुपये में पूड़ी व सब्जी देने का प्रावधान है। इकोनॉमी मील अलग योजना है। इसके सर्कुलर को लागू करने के लिए प्लानिंग चल रही है। यह अभी किसी मंडल में लागू नहीं हो पाया है।
- आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम