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देश की पहली बिना इंजन वाली 'ट्रेन 18' का ट्रायल कल, यह हैं विशेषताएं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Fri, 16 Nov 2018 03:07 PM IST
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ट्रेन 18
- फोटो : अमर उजाला
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बरेली-मुरादाबाद सेक्शन पर शनिवार को देश की पहली इंजन रहित ट्रेन 'ट्रेन 18' का ट्रायल होगा। अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन की टीम भी इस ट्रायल रन को देखने के लिए पहुंच गई है। इस ट्रेन का ट्रायल पिछले कुछ दिनों से लगातार किया जा रहा है।
यह ट्रेन 'सेल्फ प्रपल्शन मॉड्यूल' पर 160 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ्तार तक चल सकती है। इस ट्रेन को चेन्नई में स्थित इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) द्वारा 18 महीने में विकसित किया गया है।
यह ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेगी। 160 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ने वाली यह ट्रेन अगले साल जनवरी में दिल्ली-भोपाल रेल मार्ग पर दौड़ने वाली देश की सबसे तेज गति की शताब्दी एक्सप्रेस की जगह ले सकती है।
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यह ट्रेन 'सेल्फ प्रपल्शन मॉड्यूल' पर 160 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ्तार तक चल सकती है। इस ट्रेन को चेन्नई में स्थित इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) द्वारा 18 महीने में विकसित किया गया है।
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यह ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेगी। 160 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ने वाली यह ट्रेन अगले साल जनवरी में दिल्ली-भोपाल रेल मार्ग पर दौड़ने वाली देश की सबसे तेज गति की शताब्दी एक्सप्रेस की जगह ले सकती है।
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Moradabad: First trial run of Indian Railways' "Train 18", India's first engine-less train, to be conducted tomorrow on Bareilly-Moradabad section on a standard railway track. Research Designs and Standards Organization (RDSO) team has also reached Moradabad for the trial run pic.twitter.com/w7Ub31mtrd
— ANI UP (@ANINewsUP) November 16, 2018
ये होंगी विशेषताएं
ट्रेन 18 लांच से पहले ही चर्चा में आ गई है। यह भारतीय रेलवे की पहली विश्वस्तरीय ट्रेन होगी। आईसीएफ के मुताबिक इसे बनाने में जो लागत आई है वह ट्रेन आयात करने में आने वाली कीमत से आधी है। 16 कोच वाली यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित होगी।
लोकोमोटिव इंजन द्वारा चलने वाली परंपरागत भारतीय ट्रेनों से अलग यह ट्रेन स्व संचालन तकनीक से चलेगी। मेट्रो की तरह ही इस ट्रेन के दोनों छोरों पर ड्राइविंग केबिन होंगे। यह तकनीक ट्रेन को मोड़ने और वापस लौटाने में लगने वाले समय की भी बचत करेगी।
ट्रेन में प्रयोग होने वाली स्व संचालन व्यवस्था गति को तुरंत तेज व कम करने में भी सहायक होगी, जिससे सफर में लगने वाले समय में भी कमी आएगी। अत्याधुनिक बोगियों में यात्रियों को सफर के दौरान झटके भी महसूस नहीं होंगे।
लोकोमोटिव इंजन द्वारा चलने वाली परंपरागत भारतीय ट्रेनों से अलग यह ट्रेन स्व संचालन तकनीक से चलेगी। मेट्रो की तरह ही इस ट्रेन के दोनों छोरों पर ड्राइविंग केबिन होंगे। यह तकनीक ट्रेन को मोड़ने और वापस लौटाने में लगने वाले समय की भी बचत करेगी।
ट्रेन में प्रयोग होने वाली स्व संचालन व्यवस्था गति को तुरंत तेज व कम करने में भी सहायक होगी, जिससे सफर में लगने वाले समय में भी कमी आएगी। अत्याधुनिक बोगियों में यात्रियों को सफर के दौरान झटके भी महसूस नहीं होंगे।