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Moradabad News: छात्रावासों में एक भी दिन नहीं रहीं छात्राएं...अब कक्षा संचालन की तैयारी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 01:37 AM IST
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Female students did not stay in the hostels for even a single day... now, preparations are underway to conduct classes.
मुरादाबाद। शहर के तीन कॉलेजों में छात्राओं की सुविधा को देखते हुए छात्रावासों का निर्माण किया गया था। इसमें से दो महाविद्यालय हिंदू कॉलेज व एमएच कॉलेज में तो एक भी दिन के लिए कोई छात्रा रहने नहीं आई है, जबकि गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज में कोरोना संक्रमण काल से पहले ही छात्रावास को बंद कर दिया गया। प्राचार्यों का कहना है कि छात्राओं का रुझान न होने की वजह से अब छात्रावासों में कक्षाओं का संचालन शुरू करने की तैयारी है।
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मुरादाबाद मंडल के सबसे बड़े महाविद्यालय हिंदू कॉलेज में जनपद से ही नहीं दूसरे जिलों से भी विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते हैं। इसमें बड़ी संख्या छात्राओं की भी होती है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार उस वक्त कॉलेज सुबह आठ से शाम पांच बजे तक दो पालियों में संचालित होता था। ईवनिंग पाली दोपहर डेढ़ बजे से शाम पांच बजे तक की थी। छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए वर्ष 2006 में कॉलेज में महिला छात्रावास का निर्माण कराया गया था। उस वक्त छात्रसंख्या लगभग 15 हजार थी। इसमें करीब छह हजार छात्राएं अध्ययनरत थीं। इस छात्रावास निर्माण में करीब 20 लाख रुपये की लागत आई थी। इसमें 60 फीसदी हिस्सा यूजीसी ने दिया था, जबकि 40 फीसदी खर्च कॉलेज ने वहन किया था। छात्रावास में नौ कमरे बनाए गए और इसकी क्षमता करीब 20 छात्राओं की है। इतनी सुविधा होने के बावजूद कभी किसी छात्रा का रहने के लिए आवेदन नहीं किया।
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तीन मंजिला इमारत नहीं हुई गुलजार

एमएच कॉलेज में वर्ष 2015-16 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से कॉलेज में बालिका छात्रावास बनवाया गया था। तीन मंजिला बिल्डिंग बनाने में लगभग 80 लाख रुपये का खर्च हुआ था। उस वक्त कॉलेज में छात्र संख्या करीब 1500 के आसपास थी। कॉलेज की खासियत है कि यहां पर 70 फीसदी छात्राएं अध्ययनरत रहती हैं। उस वक्त के प्राचार्य प्रो. हरबंश दीक्षित ने बताया कि छात्रावास में 100 बच्चों की रहने की क्षमता थी। दूर-दराज से आने वाली छात्राओं को कोई परेशानी न हो, इसको देखते हुए उनको छात्रावास की सुविधा देने की बहुत कोशिश की थी लेकिन किसी भी छात्रा ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने बताया कि जो लोग हॉस्टल की खर्चा उठाने में सक्षम होते हैं, वह आमतौर पर दिल्ली या निजी विश्वविद्यालय में भेज देते हैं। एक नजरिया से यह अच्छा भी है। अशासकीय कॉलेजों में कई बार आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे होते हैं, जो पूरी फीस एक बार देने में क्षमता नहीं होती। इसलिए छात्रावास वाला कांस्पेप्ट सफल नहीं हुआ। दूसरा यह भी है कि कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राएं आसपास के क्षेत्रों से ही हैं, जो घर रहकर पढ़ाई करना पसंद करती हैं।
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कोरोना संक्रमण काल से पहले बंद है छात्रावास
गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज का छात्रावास लगभग 60 वर्ष पुराना है। इसमें 150 छात्राओं के रहने की सुविधा है। दो मंजिला है, इसके अलावा शिक्षकों के आवास भी हैं। शिक्षिकाओं का कहना है कि छात्रावास में आवंटन मेरिट के आधार पर किया जाता था। रामनगर, बाजपुर, रुद्रपुर, बिलासपुर, काशीपुर, चंदौसी से स्नातक व परास्नातक की छात्राओं के अलावा पूर्वी जनपदों से बीएड की छात्राएं इसमें रहती थीं। एक कमरे में टेलीविजन देखने और अखबार की सुविधा मिलती थी। टेबल टेनिस की सुविधा दी। दूसरे जनपदों से छात्राओं के न आने के बाद छात्रावास के लिए रुझान कम हो गया। कोरोना संक्रमण काल से पहले ही यह छात्रावास बंद हो गया।

वर्जन...

छात्रावास में एनसीसी और एनएसएस, रोवर्स-रेंजर्स कार्यालय संचालित किया जा रहा है। योग आदि की सुविधा है। बीएड में स्थानीय व आसपास के क्षेत्र की छात्राएं हैं, जो अपने घर से आती-जाती हैं।
प्रो. चारू मेहरोत्रा, प्राचार्य, गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज

सौ की छात्रावास क्षमता है। वॉर्डन, रसोइया आदि की सुविधा नहीं थी। छात्राएं न आने की वजह से हॉल को ऑडिटोरियम बना दिया है। इसमें सांस्कृतिक व अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जाता है। शासन से जैसे आदेश मिलेंगे, उसी के अनुरूप छात्रावास का उपयोग किया जाएगा।

प्रो. नरेंद्र सिंह, प्राचार्य, एमएच कॉलेज

बारिश के सीजन के बाद मुआयना करके छात्रावास का जीर्णोद्धार करवाया जाएगा, ताकि इसमें विभाग संचालित किए जा सकें। खाली छात्रावास होने की वजह से अभी एसडीआरएफ की टुकड़ी रहती है। छात्रावास के यदि बड़े कमरा होंगे तो कक्षाओं का संचालन भी किया जा सकता है।

प्रो. सत्यव्रत सिंह रावत, प्राचार्य, हिंदू कॉलेज
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