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मंडलायुक्त गेट को आधे घंटे तक किसानों ने घेरा
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मुरादाबाद। भारतीय किसान यूनियन असली अराजनैतिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन मंडलायुक्त को देने के लिए आए थे लेकिन वह कार्यालय में नहीं मिले। इस पर किसान नेता मंडलायुक्त को बुलाने की मांग करते हुए मुख्य गेट घेरकर धरने पर बैठ गए। अंत में कोतवाल के समझाने पर किसान नेता माने और एसीएम द्वितीय को ज्ञापन देकर चले गए।
भाकियू असली अराजनैतिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरपाल सिंह मंगलवार दोपहर अपने समर्थकों के साथ मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे। किसान नेता मंडलायुक्त को ज्ञापन देना चाहते थे। इस बीच एक अधिकारी ने किसान नेताओं को बताया कि मंडलायुक्त बैठक कर रहे हैं अभी मुलाकात नहीं होगी। किसान नेताओं ने मंडलायुक्त के अलावा किसी अन्य अधिकारी को ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। किसान यूनियन से जुड़े लोग मंडलायुक्त कार्यालय के मुख्य गेट को घेरकर धरने पर बैठ गए। वे मंडलायुक्त को बुलाने की जिद पर अड़े थे। किसान नेताओं का कहना कि पिछले साल आंदोलन के बाद मोदी सरकार ने तीन कृषि कानून की वापसी के साथ बिजली बिल, पराली कानून वापसी की घोषणा, एमएसपी गारंटी कानून समेत अन्य मुद्दों पर एक कमेटी गठित करने का भरोसा दिया था। समझौते के छह माह बीतने के बावजूद केंद्र सरकार ने कोई वादा पूरा नहीं किया। अब सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना लागू की है। आरोप लगाया कि सरकार अब सेना को भी ठेके पर देने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर किसानों मेें रोष है। मंडलायुक्त कार्यालय गेट घेरने की जानकारी मिलने पर एसीएम द्वितीय पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। इस बीच किसान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। एसीएम द्वितीय मनीष चौधरी ने किसानों को बताया कि मंडलायुक्त कार्यालय में नहीं है। एक बैठक के सिलसिले में बाहर गए हैं। कोतवाल ने भी किसान नेताओं को समझाया। किसान नेता मान गए और गेट छोड़कर आंबेडकर पार्क की तरफ चले गए। ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने आरोप लगाया कि नलकूपों पर जबरन मीटर लगाया जा रहा है, जो बिजली बिल 2020 वापसी की घोषणा का उल्लंघन है। एमएसपी गारंटी कानून, आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिजनों को मुआवजा, किसानों पर दर्ज मुकदमे की वापसी, गन्ना किसानों का भुगतान, छुट्टा पशुओं से नुकसान का मुआवजा, करमुक्त डीजल, बिना ब्याज दस लाख का कर्ज, दुग्ध उत्पादकों को उचित मूल्य देने की मांग शामिल की गई है।
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भाकियू असली अराजनैतिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरपाल सिंह मंगलवार दोपहर अपने समर्थकों के साथ मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे। किसान नेता मंडलायुक्त को ज्ञापन देना चाहते थे। इस बीच एक अधिकारी ने किसान नेताओं को बताया कि मंडलायुक्त बैठक कर रहे हैं अभी मुलाकात नहीं होगी। किसान नेताओं ने मंडलायुक्त के अलावा किसी अन्य अधिकारी को ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। किसान यूनियन से जुड़े लोग मंडलायुक्त कार्यालय के मुख्य गेट को घेरकर धरने पर बैठ गए। वे मंडलायुक्त को बुलाने की जिद पर अड़े थे। किसान नेताओं का कहना कि पिछले साल आंदोलन के बाद मोदी सरकार ने तीन कृषि कानून की वापसी के साथ बिजली बिल, पराली कानून वापसी की घोषणा, एमएसपी गारंटी कानून समेत अन्य मुद्दों पर एक कमेटी गठित करने का भरोसा दिया था। समझौते के छह माह बीतने के बावजूद केंद्र सरकार ने कोई वादा पूरा नहीं किया। अब सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना लागू की है। आरोप लगाया कि सरकार अब सेना को भी ठेके पर देने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर किसानों मेें रोष है। मंडलायुक्त कार्यालय गेट घेरने की जानकारी मिलने पर एसीएम द्वितीय पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। इस बीच किसान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। एसीएम द्वितीय मनीष चौधरी ने किसानों को बताया कि मंडलायुक्त कार्यालय में नहीं है। एक बैठक के सिलसिले में बाहर गए हैं। कोतवाल ने भी किसान नेताओं को समझाया। किसान नेता मान गए और गेट छोड़कर आंबेडकर पार्क की तरफ चले गए। ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने आरोप लगाया कि नलकूपों पर जबरन मीटर लगाया जा रहा है, जो बिजली बिल 2020 वापसी की घोषणा का उल्लंघन है। एमएसपी गारंटी कानून, आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिजनों को मुआवजा, किसानों पर दर्ज मुकदमे की वापसी, गन्ना किसानों का भुगतान, छुट्टा पशुओं से नुकसान का मुआवजा, करमुक्त डीजल, बिना ब्याज दस लाख का कर्ज, दुग्ध उत्पादकों को उचित मूल्य देने की मांग शामिल की गई है।
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