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पेट पर मसाजर घुमा करता था अल्ट्रासाउंड

Sun, 03 Jan 2016 06:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद Updated Sun, 03 Jan 2016 06:38 PM IST
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fake ultrasound center justify in sting
डिप्टी सीएमओ के स्टिंग में फर्जी अल्ट्रासाउंड का मामला सामने आया है। शेरुवा धर्मपुर अगवानपुर में फिजियोथेरपी सेंटर की आड़ में बेहद शातिराना अंदाज में मरीजों के पेट पर मसाजर घुमाकर फर्जी अल्ट्रासाउंड किया जाता था। मरीजों को मिनी लैपटाप पर अल्ट्रासाउंड की वीडियो दिखाया जाता था।
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शनिवार को स्टिंग में अजब अल्ट्रासाउंड के गजब खेल में पकड़े गए झोलाछाप को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। वहीं क्लीनिक से मसाजर, मिनी लैपटाप और पर्ची जब्त कर लिया गया। बाद में झोलाछाप के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। शेरुवा धर्मपुर अगवानपुर में कोकरपुर निवासी एमएच रिजवी ने रिजवी क्लीनिक खोल रखा था।
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जहां मरीजों का चाइनीज मशीन से अल्ट्रासाउंड करने का दावा करता था। स्वास्थ्य विभाग के पास इस कथित अल्ट्रासाउंड सेंटर की शिकायत आई थी। शनिवार को डिप्टी सीएमओ डा. रंजन गौतम ने स्टिंग करके झोलाछाप के फर्जी अल्ट्रासाउंड का भंडाफोड़ कर दिया है।
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क्लीनिक पर मसाजर घुमाकर मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था। जबकि अल्ट्रासाउंड के नाम पर मरीजों को मिनी लैपटाप में पहले से अपलोड अल्ट्रासाउंड के वीडियो दिखाए जाते हैं। झोलाछाप को पकड़ डिप्टी सीएमओ अपने कार्यालय ले आए। साथ ही उसका लैपटाप, मसाजर जब्त कर लिया। बाद में पकड़े गए अल्ट्रासाउंड संचालक को डिप्टी सीएमओ ने पुलिस के हवाले कर दिया। साथ ही सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया।   




ऐसे चलता था अजब अल्ट्रा साउंड का गजब ‘खेल’
रिजवी क्लीनिक पर फर्जी अल्ट्रासाउंड का खेल पूरे सिस्टम से चलता था। अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाले मरीजों का बाकायदा नंबर लगता था। रिसेप्शन पर बैठा कर्मी मरीजाें के मर्ज की जानकारी लेता था। पर्चे के जरिए इसकी जानकारी झोलाछाप तक पहुंच जाती। बेड पर लिटा कर झोलाछाप मरीज के पेट पर मसाजर घुमाता रहता था और अपने मिनी लैपटाप पर संबंधित मर्ज का वीडियो चला देता था। भ्रमित मरीज को लगता था कि उसका अल्ट्रासाउंड हो रहा है। बाद में पर्चे पर फर्जी रिपोर्ट लिख देता था।




हर मर्ज का था लैपटाप में वीडियो

झोलाछाप के लैपटाप में हर मर्ज का वीडियो था। लैपटाप में पेट दर्द, सूजन, भ्रूण, पथरी सहित अन्य बीमारियाें के अल्ट्रासाउंड वीडियो थे। इन्हीं वीडियो को मरीज के जरूरत के मुताबिक उन्हेें दिखाया जाता था।

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