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दोपहर दो बजे छोड़ गई पत्नी, पूर्व कांग्रेसी विधायक के बेटे ने रात साढ़े बारह बजे खुद को गोली से उड़ाया
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मुरादाबाद। दो माह से पत्नी के साथ देहरादून में रह रहे पूर्व विधायक के पुत्र कुंवर संजय सिंह को उनकी पत्नी अपनी गाड़ी से गुरुवार दो बजे मुरादाबाद छोड़कर चली गई। इसके साढ़े दस घंटे बाद ही उन्होंने अपनी लाइसेंसी रायफल से गोली मारकर जान दे दी। पत्नी का कहना है कि वह अवसाद में चल रहे थे। विडंबना यह रही कि जो पत्नी एक दिन पहले ही संजय सिंह को यहां छोड़कर गई थी वह लॉकडाउन के कारण अंतिम संस्कार में नहीं सकी। न ही उनकी दोनों संतानें यहां पहंच सकीं।
मुरादाबाद देहात विधान सभा से विधायक रहे कुंवरओमप्रकाश सिंह के बेटे कुंवर संजय सिंह (58) कभी यहां वेव सिनेमा के सामने कुंवर विला में अपनी मां सरोज देवी तो कभी पत्नी रीतू सिंह के पास देहरादून रहते थे। थाना प्रभारी नवल मारावाह ने बताया कि संजय सिंह की पत्नी रीतू सिंह देहरादून में मसूरी रोड पर सीक्रेट गार्डन रिसोर्ट के नाम से होटल चलाती हैैं। इकलौता बेटा विशाल सिंह अमेरिका में जॉब करता है। बेटी बंगलूरू में रहती है। यहां उनकी मां मां सरोज सिंह रहती हैैं, जबकि भाई विजय सिंह गौर ग्रेसियस में परिवार के साथ अलग रहते हैं। लॉक डाउन से लगभग एक सप्ताह पहले संजय सिंह देहरादून पत्नी के पास चले गए थे। कई बार उन्होंने यहां आने का प्रयास किया, लेकिन लॉक डाउन की वजह से वह यहां नहीं आ पा रहे थे। गुरुवार को उनकी पत्नी देहरादून डीएम से परमिशन लेकर संजय सिंह को छोड़ने आई थी। पत्नी ने उन्हें सेल्स टैक्स चौराहे पर ही छोड़ दिया। इसके बाद ड्राइवर संजय दिवाकर उर्फ सोनू को कार के साथ लेकर बुला लिया। इसके बाद पत्नी वापस चली गईं थी।
नौकर का कहना है कि मनमुटाव की वजह से रीतू सिंह सास और जेठ विजय सिंह के पास नहीं आती थीं। इसलिए उन्होंने मुझे कार से सेल्स टैक्स चौराहे पर बुलाया था। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि संजय सिंह रात करीब नौ बजे खाना खाने के बाद दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में सोने चले गए। नीचे उनकी मां सरोज देवी, कार चालक और घरेलू नौकर छोटू सो रहे थे। सोनू ने बताया कि रात साढ़े बारह बजे संजय सिंह के कमरे से गोली चलने की आवाज आई। नौकर और चालक दौड़कर ऊपर गए और देखा तो दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की का कपड़ा हटाकर देखा तो वह खून से लथपथ पड़े थे। चालक ने संजय सिंह की मां को बताया तो उन्होंने तुरंत संजय के भाई विजय सिंह को फोन करा दिया। विजय सिंह पुलिस साथ लेकर रात में ही वहां पहुंच गए। खिड़की खोलकर सिपाही अंदर घुसे। इसके बाद दरवाजा खोलकर देखा तो संजय सिंह का शव बेड पर पड़ा था। उनकी मृत्यु हो चुकी थी। लाइसेंसी रायफल पास ही पड़ी थी जिसमें एक खोखा भी था।
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इसके बाद पत्नी रीतू सिंह को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंच गई। पत्नी रीतू सिंह ने फोन पर बताया कि संजय सिंह लंबे समय से अवसाद में थे। वह नशे के भी आदी हो चुके थे। उन्होंने अवसाद में ही यह कदम उठाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि संजय सिंह ने गले के पास रायफल सटाकर गोली चलाई। जिससे भेजा उड़ाते हुए गोली पार निकल गई थी।
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शिकार का रहा था शौक, चुनाव भी लड़ा था
मुरादाबाद। कुंवर संजय सिंह ने 2002 में बसपा के टिकट पर मुरादाबाद देहात विधान सभा सीट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में वह 30886 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। उन्हें शिकार का भी शौक रहा था। उनके यहां कई तस्वीर ऐसी हैं जो शिकार की कहानी बयां करती हैं।
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मां के नाम पर था सरोज सिनेमा
कुंवर संजय सिंह की मां के नाम से शहर के बीच बुधबाजार में सरोज सिनेमा था। लंबे समय तक सिनेमा चला था। कुछ साल पहले संजय ने इसे बंद कर दिया था। बताया जा रहा है कि एक अन्य सिनेमाघर भी इन ही के करीबी रिश्तेदारों का है।
नशा मुक्ति केंद्र में रहे थे संजय सिंह
मुरादाबाद। संजय सिंह कभी मुरादाबाद तो कभी देहरादून में रहते थे। कुछ माह पहले संजय सिंह मुरादाबाद में थे। तब उन्हें नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल करा दिया गया था। इसकी जानकारी मिलने पर पत्नी यहां आई तो उन्होंने इसका विरोध किया था। जिसे लेकर संजय के भाई विजय और रीतू के बीच विवाद भी हुआ था। ये मामला थाने तक पहुंच गया था। इसके बाद पत्नी ने उन्हें नशा मुक्ति केंद्र से बाहर निकलवाया था।
कांग्रेस से रहे थे विधायक
मुरादाबाद। एक जमाने में कुंवर परिवार की जमीदारी चलती थी। मुरादाबाद के अलावा दिल्ली, देहरादून, राजा वाला मझरा, पदिया नगला और काशीपुर तक इनकी जमीनें थीं। कुंवर संजय सिंह के पिता ओमप्रकाश सिंह मुरादाबाद की देहात विधान सभा से 1977 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी।
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मुरादाबाद देहात विधान सभा से विधायक रहे कुंवरओमप्रकाश सिंह के बेटे कुंवर संजय सिंह (58) कभी यहां वेव सिनेमा के सामने कुंवर विला में अपनी मां सरोज देवी तो कभी पत्नी रीतू सिंह के पास देहरादून रहते थे। थाना प्रभारी नवल मारावाह ने बताया कि संजय सिंह की पत्नी रीतू सिंह देहरादून में मसूरी रोड पर सीक्रेट गार्डन रिसोर्ट के नाम से होटल चलाती हैैं। इकलौता बेटा विशाल सिंह अमेरिका में जॉब करता है। बेटी बंगलूरू में रहती है। यहां उनकी मां मां सरोज सिंह रहती हैैं, जबकि भाई विजय सिंह गौर ग्रेसियस में परिवार के साथ अलग रहते हैं। लॉक डाउन से लगभग एक सप्ताह पहले संजय सिंह देहरादून पत्नी के पास चले गए थे। कई बार उन्होंने यहां आने का प्रयास किया, लेकिन लॉक डाउन की वजह से वह यहां नहीं आ पा रहे थे। गुरुवार को उनकी पत्नी देहरादून डीएम से परमिशन लेकर संजय सिंह को छोड़ने आई थी। पत्नी ने उन्हें सेल्स टैक्स चौराहे पर ही छोड़ दिया। इसके बाद ड्राइवर संजय दिवाकर उर्फ सोनू को कार के साथ लेकर बुला लिया। इसके बाद पत्नी वापस चली गईं थी।
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नौकर का कहना है कि मनमुटाव की वजह से रीतू सिंह सास और जेठ विजय सिंह के पास नहीं आती थीं। इसलिए उन्होंने मुझे कार से सेल्स टैक्स चौराहे पर बुलाया था। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि संजय सिंह रात करीब नौ बजे खाना खाने के बाद दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में सोने चले गए। नीचे उनकी मां सरोज देवी, कार चालक और घरेलू नौकर छोटू सो रहे थे। सोनू ने बताया कि रात साढ़े बारह बजे संजय सिंह के कमरे से गोली चलने की आवाज आई। नौकर और चालक दौड़कर ऊपर गए और देखा तो दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की का कपड़ा हटाकर देखा तो वह खून से लथपथ पड़े थे। चालक ने संजय सिंह की मां को बताया तो उन्होंने तुरंत संजय के भाई विजय सिंह को फोन करा दिया। विजय सिंह पुलिस साथ लेकर रात में ही वहां पहुंच गए। खिड़की खोलकर सिपाही अंदर घुसे। इसके बाद दरवाजा खोलकर देखा तो संजय सिंह का शव बेड पर पड़ा था। उनकी मृत्यु हो चुकी थी। लाइसेंसी रायफल पास ही पड़ी थी जिसमें एक खोखा भी था।
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इसके बाद पत्नी रीतू सिंह को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंच गई। पत्नी रीतू सिंह ने फोन पर बताया कि संजय सिंह लंबे समय से अवसाद में थे। वह नशे के भी आदी हो चुके थे। उन्होंने अवसाद में ही यह कदम उठाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि संजय सिंह ने गले के पास रायफल सटाकर गोली चलाई। जिससे भेजा उड़ाते हुए गोली पार निकल गई थी।
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शिकार का रहा था शौक, चुनाव भी लड़ा था
मुरादाबाद। कुंवर संजय सिंह ने 2002 में बसपा के टिकट पर मुरादाबाद देहात विधान सभा सीट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में वह 30886 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। उन्हें शिकार का भी शौक रहा था। उनके यहां कई तस्वीर ऐसी हैं जो शिकार की कहानी बयां करती हैं।
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मां के नाम पर था सरोज सिनेमा
कुंवर संजय सिंह की मां के नाम से शहर के बीच बुधबाजार में सरोज सिनेमा था। लंबे समय तक सिनेमा चला था। कुछ साल पहले संजय ने इसे बंद कर दिया था। बताया जा रहा है कि एक अन्य सिनेमाघर भी इन ही के करीबी रिश्तेदारों का है।
नशा मुक्ति केंद्र में रहे थे संजय सिंह
मुरादाबाद। संजय सिंह कभी मुरादाबाद तो कभी देहरादून में रहते थे। कुछ माह पहले संजय सिंह मुरादाबाद में थे। तब उन्हें नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल करा दिया गया था। इसकी जानकारी मिलने पर पत्नी यहां आई तो उन्होंने इसका विरोध किया था। जिसे लेकर संजय के भाई विजय और रीतू के बीच विवाद भी हुआ था। ये मामला थाने तक पहुंच गया था। इसके बाद पत्नी ने उन्हें नशा मुक्ति केंद्र से बाहर निकलवाया था।
कांग्रेस से रहे थे विधायक
मुरादाबाद। एक जमाने में कुंवर परिवार की जमीदारी चलती थी। मुरादाबाद के अलावा दिल्ली, देहरादून, राजा वाला मझरा, पदिया नगला और काशीपुर तक इनकी जमीनें थीं। कुंवर संजय सिंह के पिता ओमप्रकाश सिंह मुरादाबाद की देहात विधान सभा से 1977 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी।