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आंवला वैगन डिरेलमेंट में सामने आई इंजीनियरिंग विभाग की गड़बड़ी
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मुरादाबाद। रेल मंडल के आंवला में एक ही स्थान पर तीन बार मालगाड़ी के वैगन के डिरेलमेंट में इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही सामने आई है। प्रथम दृष्टया ट्रैक मेंटिनेंस में लापरवाही के कारण ही एक ही स्थान पर वैगन डिरेल हुए थे। दोबारा मरम्मत के बाद भी ट्रैक में छोटी-छोटी कई कमियां पाई गईं। माना जा रहा है कि इसी के चलते मालगाड़ी के वैगन डिरेल हुए थे। अब इस मामले में सुपरवाइजर स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट शुक्रवार को आएगी। डीआरएम अजय नंदन का कहना है कि ट्रैक में गड़बड़ी सामने आई है।
शुरूआती जांच के बाद रेलवे ने इंजीनियरिंग विभाग के एसएसई राजीव शर्मा के पहले ही निलंबित कर दिया था। ज्ञात हो कि पिछले मंगलवार को आंवला के ऑयल डिपो के पास दो वैगन डिरेल होने से 75 स्लीपर क्षतिग्रस्त हो गए थे। रेलवे ने कोरोना काल में मुरादाबाद रेल मंडल का तकरीबन 400 किमी रेलवे ट्रैक बदल दिया था। इसमें मुरादाबाद से बरेली का हिस्सा भी शामिल है। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ही उक्त ट्रैक पर रेल संचालन की अनुमति मिली थी। इसके बावजूद एक ही स्थान पर वैगन का पटरी से उतरना बड़ी लापरवाही दर्शाता है। उक्त स्थान पर नौ दिसंबर को पहला डिरेलमेंट हुआ था। उस समय पानीपत से पेट्रोल-डीजल लेकर आई मालगाड़ी डिपो में प्रवेश करने से कुछ पहले ही डिरेल हो गई थी। गनीमत रही कि वैगन पटरी से उतरने के बाद पलटा नहीं था। इसके बाद जब इस वैगन को पटरी पर चढ़ाकर रैक को आगे बढ़ाया गया, तो वह फिर डिरेलमेंट हुआ। किसी तरह ऑयल रैक को डिपो तक पहुंचाया गया। इसके बाद पिछले मंगलवार को सुबह साढ़े आठ बजे करीब बहादुरगढ़ से डीजल लेकर आ रही मालगाड़ी के दो वैगन पटरी से उतर गए। इस दौरान मालगाड़ी की गति बहुत कम थी। गति ज्यादा होती तो वैगन पलट सकते थे और गंभीर हादसा हो सकता था। इस मामले में सीनियर डीएसटीई नितिन प्रकाश, सीनियर डीएमई कैरिज एंड वैगन समर्थ सिंह और डीईएन हेडक्वार्टर दुष्यंत सिंह मामले की जांच कर रहे हैं। फाइनल जांच रिपोर्ट शुक्रवार को आएगी। इसके बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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शुरूआती जांच के बाद रेलवे ने इंजीनियरिंग विभाग के एसएसई राजीव शर्मा के पहले ही निलंबित कर दिया था। ज्ञात हो कि पिछले मंगलवार को आंवला के ऑयल डिपो के पास दो वैगन डिरेल होने से 75 स्लीपर क्षतिग्रस्त हो गए थे। रेलवे ने कोरोना काल में मुरादाबाद रेल मंडल का तकरीबन 400 किमी रेलवे ट्रैक बदल दिया था। इसमें मुरादाबाद से बरेली का हिस्सा भी शामिल है। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ही उक्त ट्रैक पर रेल संचालन की अनुमति मिली थी। इसके बावजूद एक ही स्थान पर वैगन का पटरी से उतरना बड़ी लापरवाही दर्शाता है। उक्त स्थान पर नौ दिसंबर को पहला डिरेलमेंट हुआ था। उस समय पानीपत से पेट्रोल-डीजल लेकर आई मालगाड़ी डिपो में प्रवेश करने से कुछ पहले ही डिरेल हो गई थी। गनीमत रही कि वैगन पटरी से उतरने के बाद पलटा नहीं था। इसके बाद जब इस वैगन को पटरी पर चढ़ाकर रैक को आगे बढ़ाया गया, तो वह फिर डिरेलमेंट हुआ। किसी तरह ऑयल रैक को डिपो तक पहुंचाया गया। इसके बाद पिछले मंगलवार को सुबह साढ़े आठ बजे करीब बहादुरगढ़ से डीजल लेकर आ रही मालगाड़ी के दो वैगन पटरी से उतर गए। इस दौरान मालगाड़ी की गति बहुत कम थी। गति ज्यादा होती तो वैगन पलट सकते थे और गंभीर हादसा हो सकता था। इस मामले में सीनियर डीएसटीई नितिन प्रकाश, सीनियर डीएमई कैरिज एंड वैगन समर्थ सिंह और डीईएन हेडक्वार्टर दुष्यंत सिंह मामले की जांच कर रहे हैं। फाइनल जांच रिपोर्ट शुक्रवार को आएगी। इसके बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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