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Moradabad News: रामगंगा को हर पल चुभते हैं कब्जे, नाले और भट्ठियां

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 02:25 AM IST
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Encroachments, drains, and kilns are a constant torment to the Ramganga.
मुरादाबाद। रामगंगा... जिस नदी के किनारे यह शहर बसा है दूर-दूर तक पहचाना जाता है। उसी रामगंगा को कब्जे, गंदे और अशोधित नाले और किनारे पर लगीं अवैध भट्ठियां हर पल चोट पहुंचा रहे हैं। कटघर और लालबाग क्षेत्र में तो नदी के किनारे ही लोगों ने निर्माण कर लिए हैं। इससे नदी का स्वरूप संकरा हो गया है। यदि भविष्य में उफनी रामगंगा ने अपने हिस्से की जमीन वापस ली तो लोगों को बड़ा नुकसान उठाना होगा।
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कटघर इलाके में बनी भट्ठियों से निकलने वाला ई-कचरा रामगंगा को दूषित कर रहा है। नदी के किनारों को कब्जा मुक्त करने के लिए बाढ़ खंड समय-समय पर अभियान चलाता है। विभाग के मुताबिक 2023 में नदी के किनारे हुए निर्माण पर लाल निशान लगाए गए थे और कई जगह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई थी। इसके बाद कोई अभियान नहीं चला। एनजीटी की गाइडलाइन के मुताबिक नदी तट से 200 मीटर तक निर्माण नहीं होना चाहिए। अब लालबाग और कटघर में निर्माण नदी तट से कितनी दूरी पर है, यह तय करने के लिए बाढ़ खंड ने योजना बनाई है।
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वहीं गंदगी की बात करें तो 599 किमी लंबी यह नदी मुरादाबाद में 20 किमी के दायरे में सबसे ज्यादा प्रदूषित है। वन विभाग और उसकी सहयोगी संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के आंकड़े यही बता रहे हैं। फैक्टरियों से निकलने वाला अशोधित पानी, खुले नाले और ई-कचरा इसका सबसे बड़ा कारण है। हाल ही में प्रदूषण विभाग द्वारा रामगंगा के कटघर पुल से लिए गए नमूने भी यही कहते हैं। यहां पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम है। बीओडी 3.6 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जो जलीय जीवन के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
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कटघर पुल तक रामगंगा में गिरते हैं 24 नाले
नगर निगम की रिपोर्ट को आधार मानें तो शहरी क्षेत्र से महज 24 नाले रामगंगा नदी में गिरते हैं। जिस पर स्वच्छता के जरूरी प्रबंध किए गए हैं। निगम प्रशासन का दावा है कि शहरी क्षेत्र का पानी नदी को गंदा नहीं कर रहा है, जबकि गुलाबबाड़ी क्षेत्र में निगम का इकलौता सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील है, जिससे शहर के सभी नाले नहीं जोड़े जा सके हैं। करूला नाला, नवाबपुरा नाला, विवेकानंद अस्पताल के पास का नाला, मोक्षधाम नाला, चक्कर की मिलक नाला, जिगर कालोनी का नाला, कटघर नाला, प्रभात मार्केट नाला, बरवलान नाला, कूड़ाघर नाला, वारसी नगर का नाला, घोसिया नाला, झब्बू का नाला, लालबाग नाला और डहरिया नाला रामगंगा नदी में गिर रहे हैं।

वर्जन
रामगंगा के तट को कब्जा मुक्त रखने के लिए जल्द ही किनारों पर पोल लगाए जाएंगे। इस दायरे में जो भी निर्माण हैं उन्हें तोड़ा जाएगा। जल्द ही इस कार्य के लिए वित्तीय स्वीकृति मिल जाएगी। बिजनौर से शाहजहांपुर तक नदी के किनारे पोल लगेंगे।
- राजेश गंगवार, वरिष्ठ अभियंता, बाढ़ खंड

सिंचाई विभाग के सहयोग से नदी को जीवित रखने के लिए तीन मीटर गहराई तक पानी का फ्लो बनाया गया है। इसे ई-फ्लो भी कहते हैं। मुरादाबाद की अपेक्षा अन्य शहरों में नदी का प्रदूषण स्तर उतना नहीं है। क्योंकि वहां जलस्तर अधिक हो जाता है।


- आदर्श कुमार, मंडलीय वन संरक्षक


नदी के किनारे से कब्जा हटाना बाढ़ खंड का कार्य है। यह हमारे दायरे में नहीं आता। नाले नदी को गंदा न करें इसके लिए नगर निगम एसटीपी पर कार्य कर रहा है। कई नाले एसटीपी से शोधित हो रहे हैं।
- अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
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