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जिला अस्पताल में फाल्ट से बत्ती गुल, मोबाइल
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मुरादाबाद। जिला अस्पताल में रविवार इमरजेंसी में भर्ती मरीज के टांके चिकित्सकों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में लगाने पड़े। सीएमएस ने कहा कि अस्पताल की आंतरिक लाइन में फॉल्ट होने की वजह से यह समस्या हुई थी।
इमरजेंसी में शाम करीब सात बजे इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष कुमार सिंह और फार्मासिस्ट पीपी चौहान ड्यूटी पर थे। वह भोजपुर के गांव बसावनपुर निवासी बाबू के टांके लगा रहे थे। स्टाफ द्वारा तीन मरीजों को भर्ती करने के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। तभी अस्पताल की बिजली लाइन में फॉल्ट हुआ और आपूर्ति ठप हो गई। बिजली जाने से आपरेशन कक्ष में अंधेरा हो गया। कर्मचारियों ने मोबाइल की टॉर्च जलाई और चिकित्सकों ने उसी रोशनी में बाबू के टांके लगाए।
सीएमएस (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि पहले जिला अस्पताल में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति होती थी। करीब 15 दिन पहले अंडरग्राउंड लाइन में फॉल्ट हुआ था। इसके बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों ने जिला अस्पताल की लाइन को सामान्य लाइन से जोड़ दिया। इस परेशानी को दूर करने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखने के अलावा फोन पर भी संपर्क किया जा चुका है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। इसलिए जब भी सामान्य लाइन में कटौती होती है, जिला अस्पताल में परेशानी बढ़ जाती है।
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इमरजेंसी में शाम करीब सात बजे इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष कुमार सिंह और फार्मासिस्ट पीपी चौहान ड्यूटी पर थे। वह भोजपुर के गांव बसावनपुर निवासी बाबू के टांके लगा रहे थे। स्टाफ द्वारा तीन मरीजों को भर्ती करने के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। तभी अस्पताल की बिजली लाइन में फॉल्ट हुआ और आपूर्ति ठप हो गई। बिजली जाने से आपरेशन कक्ष में अंधेरा हो गया। कर्मचारियों ने मोबाइल की टॉर्च जलाई और चिकित्सकों ने उसी रोशनी में बाबू के टांके लगाए।
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सीएमएस (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि पहले जिला अस्पताल में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति होती थी। करीब 15 दिन पहले अंडरग्राउंड लाइन में फॉल्ट हुआ था। इसके बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों ने जिला अस्पताल की लाइन को सामान्य लाइन से जोड़ दिया। इस परेशानी को दूर करने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखने के अलावा फोन पर भी संपर्क किया जा चुका है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। इसलिए जब भी सामान्य लाइन में कटौती होती है, जिला अस्पताल में परेशानी बढ़ जाती है।
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