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स्मार्ट सिटी : स्काडा प्रोजेक्ट के लिए विद्युत निगम को मिले 90 करोड़ रुपये
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मुरादाबाद। स्मार्ट सिटी के तहत शहर की बिजली व्यवस्था को भी मजबूत बनाने पर शासन जोर दे रहा है। इसमें स्काडा प्रोजेक्ट के लिए विद्युत निगम को 90 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। स्काडा तकनीक के माध्यम से शहर के सभी बिजलीघरों को आपस में जोड़कर 24 घंटे सप्लाई देने के लिए कार्य किया जाएगा। फिलहाल इस योजना पर कार्य करने के लिए विद्युत निगम ने टेंडर आमंत्रित किए हैं।
विद्युत निगम के जानकारों के मुताबिक स्काडा तकनीक यदि शहर में लागू होगी तो सप्लाई में बेहद सुधार आएगा। इसके अंतर्गत सभी बिजलीघरों के फीडरों को आपस में जोड़ दिया जाएगा। पूरे सिस्टम की निगरानी करने के लिए एक कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। यदि कहीं भी फाल्ट होता है तो सूचना फौरन कंट्रोल को जाएगी। साथ ही दूसरे बिजलीघर से या दूसरे फीडर से प्रभावित क्षेत्र को सप्लाई स्वत: ही शुरू हो जाएगी। इससे लोगों को लंबे पावर कट से निजात मिलेगी। हालांकि उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद समेत चंद शहरों में यह तकनीक इस्तेमाल की जा रही है। विद्युत निगम के कर्मियों को इसके क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी नहीं है। इसके लिए निजी कंपनी को कार्य सौंपा जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि स्काडा प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए और ज्यादा बजट की आवश्यकता होगी। हालांकि जो बजट मुहैया कराया गया है, उससे शहर के कुछ हिस्सों में स्काडा सिस्टम शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा शहर में विद्युत लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि की जाएगी। जहां आवश्यकता है वहां नए ट्रांसफार्मर भी स्थापित किए जाएंगे। विद्युत विभाग की एक पुरानी सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक शहर में हर तीसरा ट्रांसफार्मर ओवरलोड है। अब नए सिरे से इसकी समीक्षा की जा रही है। अधीक्षण अभियंता संजय गुप्ता का कहना है कि प्रोजेक्ट को 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके लिए कार्य बहुत जल्द शुरू हो जाएगा।
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विद्युत निगम के जानकारों के मुताबिक स्काडा तकनीक यदि शहर में लागू होगी तो सप्लाई में बेहद सुधार आएगा। इसके अंतर्गत सभी बिजलीघरों के फीडरों को आपस में जोड़ दिया जाएगा। पूरे सिस्टम की निगरानी करने के लिए एक कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। यदि कहीं भी फाल्ट होता है तो सूचना फौरन कंट्रोल को जाएगी। साथ ही दूसरे बिजलीघर से या दूसरे फीडर से प्रभावित क्षेत्र को सप्लाई स्वत: ही शुरू हो जाएगी। इससे लोगों को लंबे पावर कट से निजात मिलेगी। हालांकि उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद समेत चंद शहरों में यह तकनीक इस्तेमाल की जा रही है। विद्युत निगम के कर्मियों को इसके क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी नहीं है। इसके लिए निजी कंपनी को कार्य सौंपा जाएगा।
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अधिकारियों का कहना है कि स्काडा प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए और ज्यादा बजट की आवश्यकता होगी। हालांकि जो बजट मुहैया कराया गया है, उससे शहर के कुछ हिस्सों में स्काडा सिस्टम शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा शहर में विद्युत लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि की जाएगी। जहां आवश्यकता है वहां नए ट्रांसफार्मर भी स्थापित किए जाएंगे। विद्युत विभाग की एक पुरानी सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक शहर में हर तीसरा ट्रांसफार्मर ओवरलोड है। अब नए सिरे से इसकी समीक्षा की जा रही है। अधीक्षण अभियंता संजय गुप्ता का कहना है कि प्रोजेक्ट को 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके लिए कार्य बहुत जल्द शुरू हो जाएगा।
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