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लक्षण लगने पर न करें देरी, नहीं तो हाथ से निकल जाएगी बात
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मुरादाबाद। ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों से नेत्र चिकित्सक भी चिंतित हैं। मुरादाबाद में उपचार की पर्याप्त सुविधाएं न होने पर चिकित्सक उन्हें समय रहते हायर सेंटर रेफर कर रहे हैं। आशंकित मरीजों को भी समय से अच्छे संस्थानों में जाने की सलाह दी जा रही है। साथ ही उनका कहना है कि लक्षण का एहसास होने की मरीज तुरंत अपनी जांच कराए, इसे हल्के में न ले।
देश में अब तक सामने आए मामलों के अध्ययन के आधार पर स्टेरॉयड की अधिकता के कारण ब्लैंक फंगस बनने के मामले अधिक हैं। इसलिए चिकित्सक की सलाह के बिना स्टेरॉयड न लें। यह ब्लैक फंगस होने का बड़ा कारण बन रहा है। मुरादाबाद में ब्लैक फंगस के मामले और आशंकित आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी ब्लैक फंगस के मामलों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। साथ ही मेडिकल स्टोरों पर इसके लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित कराने और जरूरी दवाओं की काला बाजारी रोकने के लिए भी औषधि विभाग को कहा है।
अस्पतालों में भी जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर निगरानी रखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से होम आइसोलेशन में बिना चिकित्सक की सलाह के दवाओं का सेवन करने या स्टेरॉयड का इस्तेमाल करने से मना किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि शुरुआत के चार-पांच दिन कोरोना संक्रमित को स्टेरॉयड के सेवन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसके बाद चिकित्सक आवश्यकता पड़ने पर मरीज के शरीर में मौजूद लक्षणों के आधार पर स्टेरॉयड देते हैं। अधिक स्टेरॉयड का सेवन मधुमेह के स्तर को बढ़ाता है। सामान्य व्यक्ति के शरीर में भी स्टेरॉयड के सेवन के बाद करीब मधुमेह का स्तर 10 से 15 फीसदी बढ़ जाता है। अनियंत्रित शुगर की वजह से भी ब्लैक फंगस हो सकता है।
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नाक से शुरू होती है बीमारी
सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान के निदेशक डॉ प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि ब्लैक फंगस की समस्या नाक से शुरू होती है। हम मरीज को पहले सैंपल के लिए नाक के चिकित्सक के पास भेजते हैं। इसके उपचार के लिए नाक, आंख और दिमाग के विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ती है। मुरादाबाद में टीएमयू को छोड़कर ऐसी कोई संस्था नहीं है जहां पर इन तीनों का परीक्षण हो सके। विशेषकर ऑपरेशन करने वाले मामलों के लिए।
नाक तक फंगस होने पर मुरादाबाद में उपचार हो सकता है, लेकिन जब यह समस्या आंख तक पहुंच जाती है तो इसका उपचार मुरादाबाद में संभव नहीं है। क्योंकि आंख में ब्लैक फंगस होने के बाद ऑपरेशन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। पिछले एक सप्ताह में हमने तीन मरीजों को दिल्ली रेफर किया है और छह मरीजों को ईएनटी चिकित्सकों के पास भेजा है। फंगल इंफेक्शन में प्रयोग होने वाला इंजेक्शन यहां उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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देश में अब तक सामने आए मामलों के अध्ययन के आधार पर स्टेरॉयड की अधिकता के कारण ब्लैंक फंगस बनने के मामले अधिक हैं। इसलिए चिकित्सक की सलाह के बिना स्टेरॉयड न लें। यह ब्लैक फंगस होने का बड़ा कारण बन रहा है। मुरादाबाद में ब्लैक फंगस के मामले और आशंकित आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी ब्लैक फंगस के मामलों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। साथ ही मेडिकल स्टोरों पर इसके लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित कराने और जरूरी दवाओं की काला बाजारी रोकने के लिए भी औषधि विभाग को कहा है।
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अस्पतालों में भी जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर निगरानी रखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से होम आइसोलेशन में बिना चिकित्सक की सलाह के दवाओं का सेवन करने या स्टेरॉयड का इस्तेमाल करने से मना किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि शुरुआत के चार-पांच दिन कोरोना संक्रमित को स्टेरॉयड के सेवन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसके बाद चिकित्सक आवश्यकता पड़ने पर मरीज के शरीर में मौजूद लक्षणों के आधार पर स्टेरॉयड देते हैं। अधिक स्टेरॉयड का सेवन मधुमेह के स्तर को बढ़ाता है। सामान्य व्यक्ति के शरीर में भी स्टेरॉयड के सेवन के बाद करीब मधुमेह का स्तर 10 से 15 फीसदी बढ़ जाता है। अनियंत्रित शुगर की वजह से भी ब्लैक फंगस हो सकता है।
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नाक से शुरू होती है बीमारी
सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान के निदेशक डॉ प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि ब्लैक फंगस की समस्या नाक से शुरू होती है। हम मरीज को पहले सैंपल के लिए नाक के चिकित्सक के पास भेजते हैं। इसके उपचार के लिए नाक, आंख और दिमाग के विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ती है। मुरादाबाद में टीएमयू को छोड़कर ऐसी कोई संस्था नहीं है जहां पर इन तीनों का परीक्षण हो सके। विशेषकर ऑपरेशन करने वाले मामलों के लिए।
नाक तक फंगस होने पर मुरादाबाद में उपचार हो सकता है, लेकिन जब यह समस्या आंख तक पहुंच जाती है तो इसका उपचार मुरादाबाद में संभव नहीं है। क्योंकि आंख में ब्लैक फंगस होने के बाद ऑपरेशन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। पिछले एक सप्ताह में हमने तीन मरीजों को दिल्ली रेफर किया है और छह मरीजों को ईएनटी चिकित्सकों के पास भेजा है। फंगल इंफेक्शन में प्रयोग होने वाला इंजेक्शन यहां उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए।