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Moradabad News: संभल में साई का बॉक्सिंग सेंटर बनवाने का प्रयास कर रहे धर्मेंद्र

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2024 07:00 AM IST
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Dharmendra is trying to build SAI's boxing center in Sambhal.
मुरादाबाद। मंडल के पहले ओलंपियन रहे बॉक्सर धर्मेंद्र यादव संभल में साई का बॉक्सिंग ट्रेनिंग सेंटर बनवाने के प्रयास में जुटे हैं। फिलहाल वह रोहतक में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से संचालित बॉक्सिंग सेंटर में हेड कोच हैं। पेरिस ओलंपिक में भारतीय मुक्केबाजों के कोच के रूप में गए हैं।
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1992 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में मुरादाबाद का नाम पहुंचाने वाले धर्मेंद्र ने सबसे पहले संभल में स्टेडियम की मांग उठाई थी। उस समय संभल मुरादाबाद जिले का ही हिस्सा था। संभल में स्टेडियम की मांग अब पूरी होने जा रही है। सरकार वहां स्टेडियम बनाएगी। यूपी बॉक्सिंग एडहॉक कमेटी के सदस्य संतोष कुमार क्षेत्री बताते हैं कि धर्मेंद्र खेल के लिए शुरू से जुनूनी रहे हैं।
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संभल के बबराला में रेलवे स्टेशन के सामने पानी की टंकी के पास उनका आवास है। यहां के बच्चों को अच्छी सुविधाएं दिलाने का उनका हमेशा से प्रयास रहा है। उत्तर प्रदेश ओलंपिक एसोसिएशन के संयुक्त सचिव डॉ. अजय पाठक कहते हैं कि धर्मेंद्र आज भी बच्चों की तरह गांव में आते हैं। मिट्टी पर युवाओं के साथ अभ्यास करते हैं। बच्चों को बॉक्सिंग के बारे में बताते हैं। यहां के लोग उन्हें धर्मेंद्र के नाम से कम और प्यार से गोगी कहकर ज्यादा पुकारते हैं।
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अब भी बच्चों को फ्री में सिखाते हैैं बॉक्सिंग के गुर
धर्मेंद्र के बड़े भाई अनिल यादव ने बताया कि 2006 से लगातार धर्मेंद्र यूथ इंडिया नेशनल बॉक्सिंग टीम के हेड कोच हैं। इसके बावजूद कई प्रतिभावान बच्चों को वह निशुल्क बॉक्सिंग सिखाते हैं। यह शिक्षा उन्हें उनके कोच द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता स्वतंत्र राज सिंह से मिली है। वह कहते हैं कि संसाधनों की कमी के कारण प्रतिभा मरनी नहीं चाहिए। 17 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद 1991 में धर्मेंद्र को अर्जुन पुरस्कार मिला था।

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गोगी लौटेंगे गांव तब होगी मां की तेरहवीं
धर्मेंद्र के बड़े भाई अनिल ने बताया कि मां के अंतिम दर्शन न मिल पाने का दुख धर्मेंद्र को परेशान कर रहा है। उनके कहने पर मां अनोखी देवी की इच्छा के अनुसार अंतिम संस्कार भी बबराला में ही किया गया है। परिवार का कहना है कि 14 को धर्मेंद्र पेरिस से लौटेंगे। इसके बाद 15 या 16 अगस्त को मां की तेरहवीं बबराला स्थित आवास पर होगी। फोन पर वार्ता में धर्मेंद्र ने भाई को बताया कि अपने दुख को खिलाड़ियों के अभ्यास पर हावी होने से रोकने के लिए वह उनके साथ ज्यादा समय बिता रहे हैं।
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धमेंद्र की उपलब्धियां
- 1989 से 1994 तक 19 बार अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर तीन रजत और सात कांस्य पदक जीते।
- भारत के पहले पेशेवर मुक्केबाज हैं, जिनके नाम लगातार छह जीत का रिकॉर्ड है।
- 1990 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता।
- 1992 में बर्सिलोना ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
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