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Moradabad News: भगवान श्रीराम के विवाह का प्रसंग सुन झूम उठे श्रद्धालु
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नरौली। सरथल के मां झारखंडी देवी मंदिर पर चल रही कथा में कथावाचक मुकेश आनंद ने श्रीराम विवाह का प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ कथा का आनंद उठाया। श्रीराम के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। कथा से पूर्व रामायण जी की आरती की गई।
कथावाचक मुकेश आनंद ने कहा कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था। एक दिन मां सीता ने घर की सफाई करते हुए उसे उठाकर दूसरी जगह रख दिया। उसे देख राजा जनक को आश्चर्य हुआ, क्योंकि धनुष किसी से उठता नहीं था। राजा ने प्रतिज्ञा की कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। उन्होंने स्वयंवर की तिथि निर्धारित कर सभी राजा-महाराजाओं को विवाह के लिए निमंत्रण भेजा। वहां आए सभी लोगों ने एक-एक कर धनुष को उठाने की कोशिश की लेकिन किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली।
गुरु की आज्ञा से श्री राम धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। इसके बाद धूमधाम से सीता व राम का विवाह हुआ। माता सीता ने जैसे प्रभुराम को वर माला डाली वैसे ही देवतागण उन पर फूलों की वर्षा करने लगे। संगीत की धुन पर भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को झूमने को विवश कर दिया। इस दौरान श्रीराम की झांकी प्रस्तुत की गई।
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कथावाचक मुकेश आनंद ने कहा कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था। एक दिन मां सीता ने घर की सफाई करते हुए उसे उठाकर दूसरी जगह रख दिया। उसे देख राजा जनक को आश्चर्य हुआ, क्योंकि धनुष किसी से उठता नहीं था। राजा ने प्रतिज्ञा की कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। उन्होंने स्वयंवर की तिथि निर्धारित कर सभी राजा-महाराजाओं को विवाह के लिए निमंत्रण भेजा। वहां आए सभी लोगों ने एक-एक कर धनुष को उठाने की कोशिश की लेकिन किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली।
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गुरु की आज्ञा से श्री राम धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। इसके बाद धूमधाम से सीता व राम का विवाह हुआ। माता सीता ने जैसे प्रभुराम को वर माला डाली वैसे ही देवतागण उन पर फूलों की वर्षा करने लगे। संगीत की धुन पर भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को झूमने को विवश कर दिया। इस दौरान श्रीराम की झांकी प्रस्तुत की गई।
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