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Moradabad News: पढ़ाई के सपने को साकार करने के लिए फतेहपुर विश्नोई की बेटियां पहुंचीं कलक्ट्रेट

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 02:43 AM IST
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Daughters from Fatehpur Vishnoi reached the Collectorate to realize their dreams of pursuing education.
मुरादाबाद। फतेहपुर विश्नोई ग्राम पंचायत की बेटियां सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचीं। गांव में सरकारी इंटर कॉलेज न होने से पढ़ाई छूटने के कारण भविष्य की चिंता इनके चेहरों पर साफ झलक रही थी। उन्होंने डीएम से अपनी समस्याएं बताते हुए गांव में सरकारी इंटर काॅलेज की मांग की। डीएम ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को जीआईसी का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
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अमर उजाला ने सबसे पहले 21 सितंबर को फतेहपुर न्याय पंचायत में सरकारी विद्यालय न होने की समस्या को उजागर किया था। इसके बाद अपनी आवाज को बुलंद करते हुए यहां की बेटियों ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का दरवाजा खटखटाया। सभी ने आश्वासन तो दिया लेकिन मामले के 20 दिन बीतने के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने वहां पहुंचने की जहमत नहीं उठाई।
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हाथों में किताबें सजने दो.. सर हमें भी पढ़ने दो..., हम बेटियों का भविष्य बचाइए डीएम साहब गांव आइए, डीएम सर जीआईसी बनवाइए जीआईसी बनवाइए, 70 बेटियों की छूटी पढ़ाई शिक्षा विभाग को रहम नहीं आई जैसे स्लोगन लिखे तख्तियां लेकर छोटी-छोटी बेटियां अपने भाई और अभिभावकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचीं।
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यह बेटियां किसी सियासत दलों से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि आम घरों से ताल्लुक रखती हैं जो पढ़ाई छूटने के कारण अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। करीब 42 बेटियां अपने मम्मी-पापा और भाइयों के साथ सोमवार सुबह 9:30 बजे कलक्ट्रेट पहुंच गईं। उस वक्त कार्यालय सही से खुले भी नहीं थे। सभी बेटियां वहीं धरने पर बैठ गईं। लगभग आधे घंटे बाद अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम माधव उपाध्याय मौके पर पहुंचे।
उन्होंने बेटियों से ज्ञापन लेकर जिलाधिकारी के संज्ञान में मामला लाने का आश्वासन दिया। इसके बाद भी बेटियां धरने पर बैठी रहीं। जब जिलाधिकारी अनुनय झा कलक्ट्रेट पहुंचे तो पांच बेटियां यशवी, आरुषि, ईशिका, यशि, अंशिका, और एक अभिभावक सुरेंद्र सैनी को वार्ता करने के लिए कार्यालय में बुलाया।

बेटियों ने डीएम को समस्याएं बताईं
जिलाधिकारी को यशवी और आरुषि ने बताया कि हमारे गांव से निकटतम जीआईसी 14 किलोमीटर दूर है। इसके कारण 70 से अधिक बेटियों की पढ़ाई छूट गई है। सरकारी स्कूल न होने के कारण राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल पाता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गांव का दौरा किए बगैर अप्रैल महीने में 10 किमी वाली झूठी आख्या (रिपोर्ट) लगाई थी। अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सर्वे के निर्देश दिए हैं लेकिन कोई भी अधिकारी निरीक्षण के लिए गांव नहीं आया है। डीएम ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को एक टीम गठित कर गांव में रिक्त जमीन की उपलब्धता और निकटतम सरकारी विद्यालयों की वास्तविक दूरी का भौतिक सर्वे कर जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

यह बेटियां रहीं शामिल

कंचन, पलक, अनमोली, वंशिका, तानिया, राधिका, संजना, प्रियम, यशी, पूजा, अक्षा, सामिया, चारुल, मानवी, माही, दिव्यांशी, अंजलि, तनु, अनु, यशवी, सलोनी, महिमा, पायल, आरती, सानिया, आलिया, छवि, अलकमा, नैना, गीता, छाया, मनीषा, रीतिका आदि बेटियां अपने मम्मी-पापा और भाइयों के साथ थीं।


वर्जन...
जिला विद्यालय निरीक्षक को राजकीय इंटर कॉलेज का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रस्ताव मिलने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा।-अनुनय झा, जिलाधिकारी
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