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पहले दवा फिर दर्द देने वाले साइबर ठग गिरफ्तार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jan 2022 01:09 AM IST
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Cyber ??thugs who gave medicine first then pain arrested
मुरादाबाद। पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ठगी से पहले लोगों को ऑनलाइन दवाइयां बेचकर उन्हें अपना ग्राहक बनाता था। इसके बाद दवाइयाें से फायदा न होने पर उन्हें रिफंड करने के नाम पर उनके खाते से साइबर ठगी करता था। छजलैट, ठाकुरद्वारा थाने की पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीमों ने शनिवार ने एक युवती समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी कॉल सेंटर के जरिये इस धंधे को चला रहे थे। गिरोह संचालित करने वाला आरोपी सरगना नोएडा निवासी है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है।
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पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विद्यासागर मिश्र ने बताया कि 19 जनवरी को छजलैट थानाक्षेत्र के शाहपुर मुबारकपुर गांव निवासी इंजीनियर रियाजुद्दीन ने छजलैट थाने में केस दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि जीवन आयुर्वेदा नाम की कंपनी ने उसके साथ ऑनलाइन एक लाख 16 हजार रुपये की ठगी है।
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एसएसपी ने छजलैट और ठाकुरद्वारा और साइबर सेल की टीम इस साइबर ठगी के खुलासे के लिए लगाई थी। टीम ने शनिवार को उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर के गदरपुर थानाक्षेत्र के महतोश मोड़ संजय नगर निवासी विशाल और मिथुनबाला, नैनीताल जनपद के रामनगर थानाक्षेत्र की पांडे कॉलोनी निवासी प्रियंका और शाहजहांपुर जनपद के सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला बखसारिया निकट चारखंभा चौराहा निवासी मुदित अग्निहोत्री को उत्तराखंड के गदरपुर से फर्जी कॉल सेंटर चलाते हुए गिरफ्तार किया।
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पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इस कॉल सेंटर को नोएडा सेक्टर 66 गली नंबर दो निवासी वरुण चला रहा था। आरोपियों ने बताया कि वरुण उन्हें डाटा उपलब्ध कराता था। जिसमें मोबाइल नंबर व नाम लिखे होते थे। इन नंबरों पर कॉल करके उन्हें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी बताकर कॉल करते थे।
अपनी दवाइयां के बारे में बताते थे। ग्राहक बनाकर उनके पते पर दवाइयां भेज दी जातीं थीं। दवाइयां बेचने के बाद फीड बैक लेने के लिए फिर से कॉल की जाती है। यदि ग्राहक बताता है कि उसे कोई फायदा नहीं हुआ तो पैसा वापस करने का लालच देकर साइबर ठगी की जाती है।
दो से तीस हजार तक बेची जाती हैं दवाइयां
मुरादाबाद। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह खुद का स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी बताकर लोगों को कॉल करते हैं। दस से बारह तरीके की दवाइयां उपलब्ध कराने का झांसा दिया जाता है। लॉकडाउन और कोरोना काल में सबसे ज्यादा लोगों को शिकार बनाया गया है। दवाइयां दो हजार से लेकर 30 हजर रुपये तक बेची जाती हैं।
पुलिस ने यह सामान किया बरामद
मुरादाबाद। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 29 मोबाइल, दवाइयां पैक करने वाला रोलर, दवाइयाें के 949 डिब्बे, चार बंडल पॉलीथिन, दवाइयां के 40 पार्सल, 12 पैकेट रेपर, प्रिंटर और काल रिकॉर्ड से संबंधित डाटा भी बरामद किया है।

दस हजार की नौकरी के लालच में चले गए जेल
मुरादाबाद। इस कॉल सेंटर को नोएडा निवासी वरुण चला रहा था। उसने ही सभी को नौकरी पर रखा था। इस गिरोह में तीस लोग काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तरखंड, दिल्ली समेत कई और अन्य राज्यों में भी इस गिरोह का नेटवर्क है। मिथुनवाला बीबीए, प्रियंका एमए है, जबकि मुदित अग्निहोत्री इंटरमीडिएट है। इन्हें दस-दस हजार रुपये की सैलरी पर नौकरी पर रखा था। चौथे आरोपी विशाल राय ने बताया कि कंपनी संचालक वरुण उसके भाई का साला है। उसने विशाल राय के बैंक खाते का इस्तेमाल किया था।
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