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रेलवे के दो अफसराें को एक लाख घूस लेते पकड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:55 AM IST
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
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मंगलवार की रात गाजियाबाद की सीबीआई टीम ने डीआरएम कार्यालय परिसर में स्थित सीनियर डीएफएम के केबिन में छापा मार कर दो अफसरों को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। दोनों अफसरों ने रेलवे ट्रैक किनारे लगे पेड़ाें के कटान की स्वीकृति देने के बदले ठेकेदार से एक लाख रुपये की रिश्वत ली थी। टीम दोनों आरोपी अफसरों को साथ लेकर अन्य मामलों की पड़ताल कर रही है।
मझोला के लाइन पार निवासी उमेश चंद्रा ने रेलवे ट्रैक किनारे खड़े पेड़ों के कटान का ठेका 14 लाख चालीस हजार में लिया था। कांट्रेक्ट होने के बाद पेड़ों को वित्त विभाग से स्वीकृति लेकर ठेकेदार के हैंडओवर किया जाना था। जिसके बदले में उमेश चंद्रा से दस फीसदी डिमांड रखी। ठेकेदार ने पैसे देने से मना किया तो पेड़ हैंडओवर करने से मना दिया। एक महीने से अधिक समय तक मामला लटका रहा। उधर रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग पेड़ काटने के लिए दबाव बना रहा था।
ट्रेनों के सकुशल संचालन के लिए पेड़ों का कटना जरूरी था। पहले तो दोनों के बीच पैसे कम करने के लिए बात चली। जब बात नहीं बनी तो उमेश चंद्रा ने परेशान होकर सीबीआई को रिश्वत मांगे जाने की सूचना दे दी। इसके बाद सीबीआई ने पूरा जाल बिछाया। मंगलवार को शाम करीब साढ़े छह बजे जब सीनियर डीएफएम के चेंबर में पैसे का लेन देन चल रहा था। उसी समय सीबीआई की टीम सीनियर डीएफएम डा. पंकज कुमार को रंगे हाथ पकड़ लिया।
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रिश्वत के इस प्रकरण में सेक्शन आफिसर एसके वाल्दिया भी शामिल है और उस समय चेंबर में मौजूद था। टीम का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर एसके पांडे ने बताया कि दोनों सीनियर डीएफएम पंकज कुमार और एसके वाल्दिया को एक लाख रुपये की रिश्वत देते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके बाद सीबीआई की टीम ने कमरे में बंद कर पांच घंटे तक पूछताछ कर कागजात तैयार किए। देर रात दोनों आरोपियों को गाजियाबाद लेकर रवाना हो गई।
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मझोला के लाइन पार निवासी उमेश चंद्रा ने रेलवे ट्रैक किनारे खड़े पेड़ों के कटान का ठेका 14 लाख चालीस हजार में लिया था। कांट्रेक्ट होने के बाद पेड़ों को वित्त विभाग से स्वीकृति लेकर ठेकेदार के हैंडओवर किया जाना था। जिसके बदले में उमेश चंद्रा से दस फीसदी डिमांड रखी। ठेकेदार ने पैसे देने से मना किया तो पेड़ हैंडओवर करने से मना दिया। एक महीने से अधिक समय तक मामला लटका रहा। उधर रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग पेड़ काटने के लिए दबाव बना रहा था।
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ट्रेनों के सकुशल संचालन के लिए पेड़ों का कटना जरूरी था। पहले तो दोनों के बीच पैसे कम करने के लिए बात चली। जब बात नहीं बनी तो उमेश चंद्रा ने परेशान होकर सीबीआई को रिश्वत मांगे जाने की सूचना दे दी। इसके बाद सीबीआई ने पूरा जाल बिछाया। मंगलवार को शाम करीब साढ़े छह बजे जब सीनियर डीएफएम के चेंबर में पैसे का लेन देन चल रहा था। उसी समय सीबीआई की टीम सीनियर डीएफएम डा. पंकज कुमार को रंगे हाथ पकड़ लिया।
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रिश्वत के इस प्रकरण में सेक्शन आफिसर एसके वाल्दिया भी शामिल है और उस समय चेंबर में मौजूद था। टीम का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर एसके पांडे ने बताया कि दोनों सीनियर डीएफएम पंकज कुमार और एसके वाल्दिया को एक लाख रुपये की रिश्वत देते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके बाद सीबीआई की टीम ने कमरे में बंद कर पांच घंटे तक पूछताछ कर कागजात तैयार किए। देर रात दोनों आरोपियों को गाजियाबाद लेकर रवाना हो गई।