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आत्महत्या के लिए उकसाने में पति को दस साल की कैद
Updated Sat, 04 Aug 2018 02:09 AM IST
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मुरादाबाद।
संभल के हयात नगर में सात साल पहले पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम संध्या चौधरी की अदालत ने मुलजिम पति को दोषी करार देते हुए दस साल की कैद की सजा सुनाई। जबकि पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
बदायूं जनपद के जरीफ नगर निवासी रसूलपुर निवासी हर साल ने अपनी बेटी विचित्रा देवी की शादी हयातनगर थानाक्षेत्र के सिकंदरपुर निवासी रामरहीस के साथ की थी। 18 अगस्त 2012 में विचित्रा ने फंदे पर लटक कर जान दी थी। इस मामले में दर दयाल ने राम रहीस, उसकी मां, भाई और भाभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने रामहीस और गंगा देवी के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम/ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संध्या चौधरी की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता ने मुलजिम को सजा दिलाने के लिए दलीलें दी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुलजिम रामरहीस को दोषी करार देते हुए दस साल की सजा और पांच हजार रुपये के दंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दोषी को एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने इस मामले में सास गंगा देवी को बरी कर दी है।
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संभल के हयात नगर में सात साल पहले पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम संध्या चौधरी की अदालत ने मुलजिम पति को दोषी करार देते हुए दस साल की कैद की सजा सुनाई। जबकि पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
बदायूं जनपद के जरीफ नगर निवासी रसूलपुर निवासी हर साल ने अपनी बेटी विचित्रा देवी की शादी हयातनगर थानाक्षेत्र के सिकंदरपुर निवासी रामरहीस के साथ की थी। 18 अगस्त 2012 में विचित्रा ने फंदे पर लटक कर जान दी थी। इस मामले में दर दयाल ने राम रहीस, उसकी मां, भाई और भाभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने रामहीस और गंगा देवी के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम/ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संध्या चौधरी की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता ने मुलजिम को सजा दिलाने के लिए दलीलें दी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुलजिम रामरहीस को दोषी करार देते हुए दस साल की सजा और पांच हजार रुपये के दंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दोषी को एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने इस मामले में सास गंगा देवी को बरी कर दी है।
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