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बिलारी में कार में दम घुटने से बालक की मौत-Cordination
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बिलारी (मुरादाबाद)। थांवला गांव के मोहल्ला कुरैशियान चौक पर गुरुवार की दोपहर निजी कार में खेलते समय घुसे बालक की दम घुटने से मौत हो गई। बालक की मौत पर उसके परिजनों और रिश्तेदारों में कोहराम मच गया।
दिल्ली के वेलकम निवासी शाकिर कुरैशी वहीं पर फलों का कारोबार करता है। शाकिर की पत्नी रानी का मायका बिलारी के थांवला गांव का है। बृहस्पतिवार की सुबह शाकिर दिल्ली से पत्नी रानी, बड़े बेटे आरिश, सबसे छोटे बेटे फैजी आठ वर्ष, बेटियों जरीन और मुस्कान आदि के साथ निजी कार से ससुराल थांवला आया था। गांव में ससुराल वाले घर के निकट ही चौक में कार खड़ी कर दी गई। दोपहर लगभग चार बजे फैजी खेलते-खेलते अपनी कार के पास पहुंच गया और इस दौरान वह किसी तरह से कार की पीछे की खिड़की खोलकर उसमें जाकर बैठ गया। बताते हैं कि कार के सभी शीशे बंद होने की वजह से फैजी को सांसें लेने में दिक्कत होने लगी।
फैजी ने कार की खिड़की खोलने की काफी कोशिश की, लेकिन खिड़की नहीं खुल पाई। खिड़की खोलने की छटपटाहट में वह सीट के नीचे गिरकर बेहोश हो गया और थोड़ी ही देर में दम घुटने से उसकी मौत हो गई। पता चला है कि इस दौरान मोहल्ले के ही कुछ अन्य बालक कार के शीशों में से अंदर को झांककर देखने लगे। जब उन्होंने एक बच्चे को सीट के नीचे पड़ा देखा तब शोर मचाना शुरू कर दिया। बच्चों के शोर मचाने पर फैजी के मामू आसिफ के अलावा उसके परिजन और ननिहाल वाले कार पर पहुंच गए। आनन फानन में कार की खिड़की खोलकर जब फैजी को बाहर निकाला तब वह अचेत अवस्था में था। परिजन तत्काल उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलारी ले गए। यहां डाक्टरों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। बालक फैजी का शव जब अस्पताल से वापस थांवला गांव पहुंचा तब उसकी ननिहाल समेत पूरे मोहल्ला कुरैशियान में कोहराम मच गया। फैजी की मौत की खबर सुनकर उसकी मां और दोनों बहनें बेहोश हो गईं।
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दिल्ली के वेलकम निवासी शाकिर कुरैशी वहीं पर फलों का कारोबार करता है। शाकिर की पत्नी रानी का मायका बिलारी के थांवला गांव का है। बृहस्पतिवार की सुबह शाकिर दिल्ली से पत्नी रानी, बड़े बेटे आरिश, सबसे छोटे बेटे फैजी आठ वर्ष, बेटियों जरीन और मुस्कान आदि के साथ निजी कार से ससुराल थांवला आया था। गांव में ससुराल वाले घर के निकट ही चौक में कार खड़ी कर दी गई। दोपहर लगभग चार बजे फैजी खेलते-खेलते अपनी कार के पास पहुंच गया और इस दौरान वह किसी तरह से कार की पीछे की खिड़की खोलकर उसमें जाकर बैठ गया। बताते हैं कि कार के सभी शीशे बंद होने की वजह से फैजी को सांसें लेने में दिक्कत होने लगी।
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फैजी ने कार की खिड़की खोलने की काफी कोशिश की, लेकिन खिड़की नहीं खुल पाई। खिड़की खोलने की छटपटाहट में वह सीट के नीचे गिरकर बेहोश हो गया और थोड़ी ही देर में दम घुटने से उसकी मौत हो गई। पता चला है कि इस दौरान मोहल्ले के ही कुछ अन्य बालक कार के शीशों में से अंदर को झांककर देखने लगे। जब उन्होंने एक बच्चे को सीट के नीचे पड़ा देखा तब शोर मचाना शुरू कर दिया। बच्चों के शोर मचाने पर फैजी के मामू आसिफ के अलावा उसके परिजन और ननिहाल वाले कार पर पहुंच गए। आनन फानन में कार की खिड़की खोलकर जब फैजी को बाहर निकाला तब वह अचेत अवस्था में था। परिजन तत्काल उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलारी ले गए। यहां डाक्टरों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। बालक फैजी का शव जब अस्पताल से वापस थांवला गांव पहुंचा तब उसकी ननिहाल समेत पूरे मोहल्ला कुरैशियान में कोहराम मच गया। फैजी की मौत की खबर सुनकर उसकी मां और दोनों बहनें बेहोश हो गईं।
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