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नशीली दवाओं के मामले में महिला को दस वर्ष की सजा
Updated Fri, 27 Jul 2018 02:40 AM IST
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मुरादाबाद।
नशीली दवाओं की विक्रेता महिला को अदालत ने दस साल के कारावास की सजा के साथ एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी महिला अपने घर से दवाओं का व्यापार करती थी। जिसे औषधि निरीक्षक ने रंगे हाथ पकड़ा था।
थाना गलशहीद में फरवरी 2018 में औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने मुकदमा दर्ज कराया कि उन्हें किसी ने सूचना दी कि असालतपुरा में एक महिला नशीले पदार्थों व दवाओं को बेचती है। जिसके घर में काफी मात्रा में इंजेक्शन व अन्य दवाइयां हैं। औषधि निरीक्षक ने थाना पुलिस की सहायता से सूचना पर छानबीन की। असालतपुरा में नफीसा पत्नी नन्हे दवाओं को अपने घर में बेचते हुए मिली। जिसके पास से काफी मात्रा में गोलियां व इंजेक्शन बरामद हुए। मुकदमा दर्ज होने के बाद नफीसा एफआईआर के खिलाफ उच्च न्यायालय स्टे के लिए चली गई। जहां स्टे न देकर मुकदमे को छ: माह में निस्तारण करने के आदेश पारित कर दिए गए। उक्त मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या 9 भैरव लाल की अदालत में सुना गया। जिसमें सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता एमपी सिंह ने पक्ष रखा। अदालत ने पुख्ता सबूतों के आधार पर नफीसा को दस साल के कारावास के साथ एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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नशीली दवाओं की विक्रेता महिला को अदालत ने दस साल के कारावास की सजा के साथ एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी महिला अपने घर से दवाओं का व्यापार करती थी। जिसे औषधि निरीक्षक ने रंगे हाथ पकड़ा था।
थाना गलशहीद में फरवरी 2018 में औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने मुकदमा दर्ज कराया कि उन्हें किसी ने सूचना दी कि असालतपुरा में एक महिला नशीले पदार्थों व दवाओं को बेचती है। जिसके घर में काफी मात्रा में इंजेक्शन व अन्य दवाइयां हैं। औषधि निरीक्षक ने थाना पुलिस की सहायता से सूचना पर छानबीन की। असालतपुरा में नफीसा पत्नी नन्हे दवाओं को अपने घर में बेचते हुए मिली। जिसके पास से काफी मात्रा में गोलियां व इंजेक्शन बरामद हुए। मुकदमा दर्ज होने के बाद नफीसा एफआईआर के खिलाफ उच्च न्यायालय स्टे के लिए चली गई। जहां स्टे न देकर मुकदमे को छ: माह में निस्तारण करने के आदेश पारित कर दिए गए। उक्त मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या 9 भैरव लाल की अदालत में सुना गया। जिसमें सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता एमपी सिंह ने पक्ष रखा। अदालत ने पुख्ता सबूतों के आधार पर नफीसा को दस साल के कारावास के साथ एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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