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हाकिमों ने फाइलों में दफना दिया कांठ भूमि घोटाला
Updated Thu, 25 Oct 2018 02:28 AM IST
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मुरादाबाद।
सीलिंग और जेल भूमि घोटाले की ही तरह कांठ में पूर्व एसडीएम द्वारा 600 बीघा भूमि ठिकाने लगाने के मामले में भी जिला प्रशासन मुकदमा दर्ज कराने से परहेज कर रहा है। जांच में अफसरों की भूमिका उजागर होने के बाद शासन ने तत्कालीन एसडीएम संत कुमार को निलंबित कर दिया था। लेकिन कार्रवाई उनके निलंबन से आगे नहीं बढ़ी। कांठ में ग्राम समाज की 600 बीघा से ज्यादा भूमि को जिनके नामों पर दर्ज किया गया उनमें सत्ताधारी दल से लेकर कई दूसरे दलों के नेताओं के करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं।
यह भूमि घोटाला भी पूर्व डीएम जुहैर बिन सगीर के कार्यकाल में वर्ष 2016 में हुआ। कांठ तहसील के गांव रसूलपुर गुर्जर में ग्राम समाज की करीब 600 बीघा भूमि को कांठ के तत्कालीन एसडीएम संत कुमार ने नियमविरुद्ध ढंग से 32 निजी खाता धारकों के पक्ष में छोड़ दिया था। इस भूमि की रजिस्ट्री सपा और भाजपा के कुछ कद्दावर नेताओं के रिश्तेदारों के नामों पर कर दी गई थी। इनमें जिले के एक सपा विधायक का रिश्तेदार और भाजपा की एक चेयरमैन का पति भी शामिल है। ग्राम प्रधान विमलेश कुमारी की शिकायत पर तत्कालीन कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू ने मामले की जांच कराई थी। जांच में सरकारी भूमि को नियमविरुद्ध ढंग से निजी खाताधारकों के पक्ष में छोड़ने की बात साबित हुई थी। कांठ के तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को दोषी मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। शासन ने तत्कालीन एसडीएम संत कुमार को निलंबित कर दिया था। तत्कालीन कमिश्नर के आदेश पर सभी 32 बैनामों को निरस्त कर दिया गया था। लेकिन कार्रवाई इससे आगे नहीं बढ़ी। कमिश्नर के एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश को अफसरों ने हवा में उड़ा दिया। इतने बड़े घोटाले में आरोपियों के खिलाफ आज तक मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया है।
रसूलपुर गुर्जर की ग्राम समाज की 600 बीघा भूमि को वर्ष 2016 में कांठ के तत्कालीन एसडीएम संत कुमार ने तहसीलदार व अन्य से मिलीभगत कर 32 लोगों के नाम पर दर्ज कर दिया था। जिनके नामों पर भूमि दर्ज की गई उनमें सपा और भाजपा के कई बड़े नेता हैं। मेरी पत्नी ने तत्कालीन कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू से शिकायत की थी। जांच के बाद कमिश्नर ने सभी बैनामे निरस्त कर दिए थे। एसडीएम को निलंबित कर दिया गया था। कमिश्नर के जाने के बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। मामले को उलझाने के लिए फाइल राजस्व परिषद में तलब करा दी गई। मुझे व मेरी पत्नी को लगातार धमकियां मिल रही हैं। - सुनील कुमार, (ग्राम प्रधान विमलेश के पति)।
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सीलिंग और जेल भूमि घोटाले की ही तरह कांठ में पूर्व एसडीएम द्वारा 600 बीघा भूमि ठिकाने लगाने के मामले में भी जिला प्रशासन मुकदमा दर्ज कराने से परहेज कर रहा है। जांच में अफसरों की भूमिका उजागर होने के बाद शासन ने तत्कालीन एसडीएम संत कुमार को निलंबित कर दिया था। लेकिन कार्रवाई उनके निलंबन से आगे नहीं बढ़ी। कांठ में ग्राम समाज की 600 बीघा से ज्यादा भूमि को जिनके नामों पर दर्ज किया गया उनमें सत्ताधारी दल से लेकर कई दूसरे दलों के नेताओं के करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं।
यह भूमि घोटाला भी पूर्व डीएम जुहैर बिन सगीर के कार्यकाल में वर्ष 2016 में हुआ। कांठ तहसील के गांव रसूलपुर गुर्जर में ग्राम समाज की करीब 600 बीघा भूमि को कांठ के तत्कालीन एसडीएम संत कुमार ने नियमविरुद्ध ढंग से 32 निजी खाता धारकों के पक्ष में छोड़ दिया था। इस भूमि की रजिस्ट्री सपा और भाजपा के कुछ कद्दावर नेताओं के रिश्तेदारों के नामों पर कर दी गई थी। इनमें जिले के एक सपा विधायक का रिश्तेदार और भाजपा की एक चेयरमैन का पति भी शामिल है। ग्राम प्रधान विमलेश कुमारी की शिकायत पर तत्कालीन कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू ने मामले की जांच कराई थी। जांच में सरकारी भूमि को नियमविरुद्ध ढंग से निजी खाताधारकों के पक्ष में छोड़ने की बात साबित हुई थी। कांठ के तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को दोषी मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। शासन ने तत्कालीन एसडीएम संत कुमार को निलंबित कर दिया था। तत्कालीन कमिश्नर के आदेश पर सभी 32 बैनामों को निरस्त कर दिया गया था। लेकिन कार्रवाई इससे आगे नहीं बढ़ी। कमिश्नर के एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश को अफसरों ने हवा में उड़ा दिया। इतने बड़े घोटाले में आरोपियों के खिलाफ आज तक मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया है।
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रसूलपुर गुर्जर की ग्राम समाज की 600 बीघा भूमि को वर्ष 2016 में कांठ के तत्कालीन एसडीएम संत कुमार ने तहसीलदार व अन्य से मिलीभगत कर 32 लोगों के नाम पर दर्ज कर दिया था। जिनके नामों पर भूमि दर्ज की गई उनमें सपा और भाजपा के कई बड़े नेता हैं। मेरी पत्नी ने तत्कालीन कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू से शिकायत की थी। जांच के बाद कमिश्नर ने सभी बैनामे निरस्त कर दिए थे। एसडीएम को निलंबित कर दिया गया था। कमिश्नर के जाने के बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। मामले को उलझाने के लिए फाइल राजस्व परिषद में तलब करा दी गई। मुझे व मेरी पत्नी को लगातार धमकियां मिल रही हैं। - सुनील कुमार, (ग्राम प्रधान विमलेश के पति)।
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