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प्रसव को पहुंची कोरोना आशंकित और उसके गर्भस्थ शिशु ने दम तोड़ा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2020 02:06 AM IST
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corona suspected pragnent lady and her baby died
मुरादाबाद। प्रसव के लिए जिला अस्पताल पहुंची एक महिला ने रविवार रात जिला महिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। महिला नौ माह की गर्भवती थी। उसके बच्चे की भी कोख में ही मौत हो गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने महिला को कोरोना पॉजिटिव मानते हुए उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया। परिजनों ने कोरोना किट पहनकर महिला के शव का अंतिम संस्कार किया। एहितयातन महिला के पति और उसके साथ अस्पताल आई उसकी भाभी का भी कोरोना टेस्ट कराया गया है। रिजल्ट आने तक सभी परिजनों को होम क्वारंटीन में रहने के आदेश दिए गए हैं।
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जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. कल्पना सिंह का कहना है कि महिला को उसके परिजन रविवार रात करीब सवा दो बजे लेकर अस्पताल पहुंचे थे। महिला नौ माह की गर्भवती थी। उसे सांस लेने में ज्यादा तकलीफ थी। उसे ऑक्सीजन देकर स्टेबल करने की कोशिश की गई लेकिन करीब पांच मिनट में ही उसने दम तोड़ दिया। उसके शिशु ने भी गर्भ में ही दम तोड़ दिया। डब्ल्यूएचओ की नई गाइड लांइस के मुताबिक अब कोरोना टेस्ट से पहले यदि संदिग्ध की मृत्यु हो जाती है तो उसका टेस्ट नहीं कराया जाता है। बल्कि उसे कोरोना पॉजिटिव मानते हुए ही उसका शव अंतिम संस्कार के लिए पुलिस के सुपुर्द किया जाता है। लिहाजा महिला की मौत के बाद उसका शव पुलिस के हवाले कर दिया गया ताकि वह अपनी मौजूदगी में उसके परिजनों से शव का अंतिम संस्कार करा सके। महिला को कोरोना पॉजिटिव ही माना गया है इसलिए उसके साथ आए उसके पति और भाभी को भी आशंकित मानते हुए दोनों का कोरोना टेस्ट कराया गया है। शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है।
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मेरा तो सब कुछ उजड़ गया
महिला के पति ने फफकते हुए अपनी दर्द व्यक्त किया। कहा, मेरा गांव पास में ही है। मजदूरी करके परिवार का पेट पालने के लिए मैं शहर आ गया था। सोचा था बच्चों को दो वक्त की रोटी कमाकर दूंगा और पढ़ा लिखा लूंगा। गोविंद नगर लंका बाग में किराए पर रहने लगा था। लेकिन लॉकडाउन हुआ तो सब उजड़ गया। मेरी पत्नी नौ माह की गर्भवती थी। लॉकडाउन की वजह से मैं उसे ठीक से खिला भी नहीं सका। घर में आनाज खत्म हो गया तो कई बार तो फाके से रहना पड़ा। गांव जाने की कोशिश की तो पुलिस ने पीटकर रास्ते से ही भगा दिया। वो अच्छी भली थी जब मैं उसे अस्पताल लेकर गया था। लेकिन उसने थोड़ी देर में ही दम तोड़ दिया। बच्चे की भी कोख में ही मौत हो गई। हम ठीक से उसे अंतिम विदाई भी नहीं दे सके। हमें परेशान कर दिया गया। हमारे अंदर कोरोना का कोई लक्षण नहीं है। किट पहनकर मैंने और मेरे भाई ने ही अंतिम संस्कार किया। बच्चे आखिरी वक्त में मां का मुंह तक नहीं देख सके। मेरा पूरा घर उजड़ गया। - महिला का पति।
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