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बुजुर्गों की हिम्मत के आगे हार गया कोरोना
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मुरादाबाद। हौसले और जुनून की कोई उम्र नहीं होती है। जिला अस्पताल में कई ऐसे सीनियर सिटीजन चिकित्सक डा. वीके खरे, डा. वंदना श्रीवास्तव, डा. प्रमोद त्यागी और डा. एसएन तिवारी हैं जो कोरोना काल में हाई रिस्क जोन में ड्यूटी कर मानवता की सबसे बड़ी सेवा में जुटे हैं। हालांकि, उम्र दराज लोगों को कोरोना संक्रमण का सबसे अधिक खतरा है। इसके बावजूद सीनियर सिटीजन चिकित्सकों ने कोरोना संक्रमण से न केवल खुद को सुरक्षित रखा है बल्कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की जान भी बचा रहे हैं।
जिला अस्पताल संक्रमण के लिहाज से हाई रिस्क जोन में है। अस्पताल के चार डाक्टर, तीन स्टाफ नर्स, दो वार्ड ब्वाय और एक सफाई कर्मी अब तक संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। एक वार्ड ब्वाय की मौत तक हो चुकी है। ओपीडी और इमरजेंसी में हर रोज कोरोना आशंकित मरीज आते हैं। स्क्रीनिंग के बाद सैंपल टेस्टिंग में पॉजिटिव निकलते हैं। इस खतरे के बीच चारों सीनियर सिटीजन डाक्टर इंसानियत का फर्ज निभा रहे हैं। सीनियर सिटीजन चिकित्सकों का कहना है कि कोविड 19 प्रोटोकाल का पालन, संतुलित खानपान, सुबह-शाम योग और इम्युनिटी बूस्ट कर कोरोना से खुद को बचाया जा सकता है।
70 साल की उम्र भले ही हो गई, लेकिन बूढ़ा नहीं हूं: डा. त्यागी
मुरादाबाद। स्वास्थ्य विभाग के उम्र दराज चिकित्सक डा. प्रमोद कुमार त्यागी 70 साल की उम्र में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डा. प्रमोद कुमार 2010 में सेवानिवृत्त होकर एनएचएम के अंतर्गत संविदा पर ब्लड बैंक में चिकित्सा अधिकारी रक्तकोष के पद पर तैनात हैं। डा. प्रमोद कुमार के साथ बैठने वाले जिला अस्पताल के दो डाक्टर संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। डा. त्यागी टीडीआई सिटी में पत्नी के साथ रहते हैं। कोरोनाकाल में नियमित ड्यूटी कर रहे हैं। ड्यूटी के दौरान और घर जाने पर संक्रमण से बचाव का पूरा ध्यान रखते हैं। सुबह शाम योग, विटामिन सी, डी के नियमित सेवन के साथ संतुलित आहार लेते हैं। वो बताते हैं, उम्र भले ही 70 साल हो गई हो, लेकिन शरीर अभी बूढ़ा नहीं है। पूरी तरह स्वस्थ हैं और कोई बीमारी नहीं है।
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हाई रिस्क जोन में ड्यूटी कर इंसानियत की सेवा में जुटा खरे दंपती
मुरादाबाद। जिला अस्पताल में डा. वीके खरे और उनकी पत्नी डा. वंदना श्रीवास्तव सेवानिवृत्त होने के बाद सेवाएं दे रहे हैं। डा. खरे फिजिशियन हैं और 2016 में रिटायर्ड होने के बाद पुन: नियुक्ति पर हैं। डा. खरे हर दूसरे दिन ओपीडी में मरीज देखते हैं। वंदना श्रीवास्तव 2015 में रिटायर्ड होने के बाद जिला अस्पताल में ही संविदा पर कुपोषण पुनर्वास केंद्र की बतौर प्रभारी दायित्व संभाल रही हैं। केंद्र में अति कुपोषित बच्चे भर्ती किए जाते हैं। कमजोर इम्युनिटी होने से बच्चों में कोरोना संक्रमण का सबसे अधिक खतरा रहता है। डा. वंदना श्रीवास्तव महिला अस्पताल की सीएमएस और डा. खरे जिला अस्पताल में सीएमएस रह चुके हैं। दंपती अस्पताल परिसर में ही रहते हैं। मनोचिकित्सक डा. एसएन तिवारी भी सेवानिवृत्त होने के बाद सेवाएं दे रहे हैं। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। परिस्थितियां कैसे भी हों, सकारात्मक सोच के साथ हर मुश्किल से लड़ा और जीता जा सकता है। कोरोनाकाल में बुजुर्गों ने इसे सच साबित कर दिखाया है। अपनी हिम्मत से कोरोना को हराया और अब दूसरों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक भी कर रहे हैं। सीनियर सिटीजन डे पर कुछ ऐसे ही बुजुर्गों से बातचीत की। बुजुर्गों ने बताया कि कोरोना जानलेवा जरूर है, लेकिन सकारात्मकता के साथ जल्दी रिकवरी कर सकते हैं। इसलिए इससे डरने के बजाय अपनी सुरक्षा करने की जरूरत है।
केस: 1
छह जुलाई को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। टीएमयू में भर्ती किया गया। हर किसी की जुबान पर कोरोना का जिक्र था। बुजुर्गों के लिए बीमारी को खतरनाक बताया जा रहा था। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद परिवार में बच्चे भी घबराए थे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और डाक्टर की सलाह पर टाइम टेबल से दवाएं लीं। खानपान का ध्यान रखा। मजबूत इच्छा शक्ति से तीसरे दिन से ही राहत मिलने लगी। बुखार कम हुआ और आराम मिलने लगा। 12 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई। घर आने के बाद बेटे विशाल ने इम्यूनिटी के हिसाब से खाना खिलवाया। योग किया और अब पूरी तरह स्वस्थ हूं। परिवार और पड़ोसियों को भी कोरोना से बचाव के लिए जागरूक करती हूं। - राजरानी, 70 साल, कोठीवाल नगर
केस:2
76 वर्षीय पिता दाताराम नगर निगम से रिटायर्ड हैं। 10 साल से पैरालाइसिस हैं। ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं। उम्र के साथ शरीर भी कमजोर हैं, लेकिन हौसला और हिम्मत काफी अधिक है। 29 जून को कोरोना संक्रमित पाए गए। भाभी की डिलीवरी होनी थी। अस्पताल में चेक अप कराने के दौरान भाभी संक्रमित निकलीं। इसके बाद पिता भी संक्रमित हो गए। पिता ने आठ दिन में रिकवरी कर ली। - अमित आर्य, कंजरी सराय
केस:3
चंदन नगर की 70 साल की निर्मला देवी की 22 जुलाई को पॉजिटिव रिपोर्ट आई। बहू माया के मुताबिक सास निर्मला देवी में हल्के लक्षण थे और होम आइसोलेट रहीं। निर्मला देवी ने अपनी हिम्मत से चार दिन में ही रिकवरी कर ली। प्रोटोकाल मानक से 10 दिन आइसोलेट रहने के बाद निर्मला पूरी तरह स्वस्थ हैं। - माया, बहू
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जिला अस्पताल संक्रमण के लिहाज से हाई रिस्क जोन में है। अस्पताल के चार डाक्टर, तीन स्टाफ नर्स, दो वार्ड ब्वाय और एक सफाई कर्मी अब तक संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। एक वार्ड ब्वाय की मौत तक हो चुकी है। ओपीडी और इमरजेंसी में हर रोज कोरोना आशंकित मरीज आते हैं। स्क्रीनिंग के बाद सैंपल टेस्टिंग में पॉजिटिव निकलते हैं। इस खतरे के बीच चारों सीनियर सिटीजन डाक्टर इंसानियत का फर्ज निभा रहे हैं। सीनियर सिटीजन चिकित्सकों का कहना है कि कोविड 19 प्रोटोकाल का पालन, संतुलित खानपान, सुबह-शाम योग और इम्युनिटी बूस्ट कर कोरोना से खुद को बचाया जा सकता है।
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70 साल की उम्र भले ही हो गई, लेकिन बूढ़ा नहीं हूं: डा. त्यागी
मुरादाबाद। स्वास्थ्य विभाग के उम्र दराज चिकित्सक डा. प्रमोद कुमार त्यागी 70 साल की उम्र में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डा. प्रमोद कुमार 2010 में सेवानिवृत्त होकर एनएचएम के अंतर्गत संविदा पर ब्लड बैंक में चिकित्सा अधिकारी रक्तकोष के पद पर तैनात हैं। डा. प्रमोद कुमार के साथ बैठने वाले जिला अस्पताल के दो डाक्टर संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। डा. त्यागी टीडीआई सिटी में पत्नी के साथ रहते हैं। कोरोनाकाल में नियमित ड्यूटी कर रहे हैं। ड्यूटी के दौरान और घर जाने पर संक्रमण से बचाव का पूरा ध्यान रखते हैं। सुबह शाम योग, विटामिन सी, डी के नियमित सेवन के साथ संतुलित आहार लेते हैं। वो बताते हैं, उम्र भले ही 70 साल हो गई हो, लेकिन शरीर अभी बूढ़ा नहीं है। पूरी तरह स्वस्थ हैं और कोई बीमारी नहीं है।
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हाई रिस्क जोन में ड्यूटी कर इंसानियत की सेवा में जुटा खरे दंपती
मुरादाबाद। जिला अस्पताल में डा. वीके खरे और उनकी पत्नी डा. वंदना श्रीवास्तव सेवानिवृत्त होने के बाद सेवाएं दे रहे हैं। डा. खरे फिजिशियन हैं और 2016 में रिटायर्ड होने के बाद पुन: नियुक्ति पर हैं। डा. खरे हर दूसरे दिन ओपीडी में मरीज देखते हैं। वंदना श्रीवास्तव 2015 में रिटायर्ड होने के बाद जिला अस्पताल में ही संविदा पर कुपोषण पुनर्वास केंद्र की बतौर प्रभारी दायित्व संभाल रही हैं। केंद्र में अति कुपोषित बच्चे भर्ती किए जाते हैं। कमजोर इम्युनिटी होने से बच्चों में कोरोना संक्रमण का सबसे अधिक खतरा रहता है। डा. वंदना श्रीवास्तव महिला अस्पताल की सीएमएस और डा. खरे जिला अस्पताल में सीएमएस रह चुके हैं। दंपती अस्पताल परिसर में ही रहते हैं। मनोचिकित्सक डा. एसएन तिवारी भी सेवानिवृत्त होने के बाद सेवाएं दे रहे हैं। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। परिस्थितियां कैसे भी हों, सकारात्मक सोच के साथ हर मुश्किल से लड़ा और जीता जा सकता है। कोरोनाकाल में बुजुर्गों ने इसे सच साबित कर दिखाया है। अपनी हिम्मत से कोरोना को हराया और अब दूसरों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक भी कर रहे हैं। सीनियर सिटीजन डे पर कुछ ऐसे ही बुजुर्गों से बातचीत की। बुजुर्गों ने बताया कि कोरोना जानलेवा जरूर है, लेकिन सकारात्मकता के साथ जल्दी रिकवरी कर सकते हैं। इसलिए इससे डरने के बजाय अपनी सुरक्षा करने की जरूरत है।
केस: 1
छह जुलाई को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। टीएमयू में भर्ती किया गया। हर किसी की जुबान पर कोरोना का जिक्र था। बुजुर्गों के लिए बीमारी को खतरनाक बताया जा रहा था। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद परिवार में बच्चे भी घबराए थे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और डाक्टर की सलाह पर टाइम टेबल से दवाएं लीं। खानपान का ध्यान रखा। मजबूत इच्छा शक्ति से तीसरे दिन से ही राहत मिलने लगी। बुखार कम हुआ और आराम मिलने लगा। 12 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई। घर आने के बाद बेटे विशाल ने इम्यूनिटी के हिसाब से खाना खिलवाया। योग किया और अब पूरी तरह स्वस्थ हूं। परिवार और पड़ोसियों को भी कोरोना से बचाव के लिए जागरूक करती हूं। - राजरानी, 70 साल, कोठीवाल नगर
केस:2
76 वर्षीय पिता दाताराम नगर निगम से रिटायर्ड हैं। 10 साल से पैरालाइसिस हैं। ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं। उम्र के साथ शरीर भी कमजोर हैं, लेकिन हौसला और हिम्मत काफी अधिक है। 29 जून को कोरोना संक्रमित पाए गए। भाभी की डिलीवरी होनी थी। अस्पताल में चेक अप कराने के दौरान भाभी संक्रमित निकलीं। इसके बाद पिता भी संक्रमित हो गए। पिता ने आठ दिन में रिकवरी कर ली। - अमित आर्य, कंजरी सराय
केस:3
चंदन नगर की 70 साल की निर्मला देवी की 22 जुलाई को पॉजिटिव रिपोर्ट आई। बहू माया के मुताबिक सास निर्मला देवी में हल्के लक्षण थे और होम आइसोलेट रहीं। निर्मला देवी ने अपनी हिम्मत से चार दिन में ही रिकवरी कर ली। प्रोटोकाल मानक से 10 दिन आइसोलेट रहने के बाद निर्मला पूरी तरह स्वस्थ हैं। - माया, बहू