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दावा - इसी सप्ताह तैयार हो जोगा गोविंदनगर ओवरब्रिज
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मुरादाबाद। तीन वर्षों से लंबित गोविंदनगर ओवरब्रिज का निर्माण अंतिम चरण में है। स्लैब डालने के बाद अब कंक्रीट का काम चल रहा है। इसी सप्ताह ओवरब्रिज का निर्माण पूरा करने और एक मई से पहले इसे लोगों के लिए खोलने का दावा ठेकेदार और रेलवे की ओर से किया जा रहा है।
इस क्षेत्र में लोगों को प्रभात मार्केट या मुख्य सड़क पर जाने के लिए रेलवे लाइन क्रॉस करनी पड़ती है। छोटे बच्चे भी अक्सर लाइन के पास खेलते रहते हैं। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके चलते काफी समय से लोग यहां ओवरब्रिज की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि ओवरब्रिज निर्माण के लिए पूर्व सांसद सर्वेश कुमार सिंह के कार्यकाल में शिलान्यास हुआ था। इसके बाद नगर निगम और रेलवे के बीच सहमति बनी कि नगर निगम इसके लिए धन उपलब्ध कराएगा और रेलवे निर्माण करेगा। नगर निगम निगम ने तीन किश्तों में यह धन रेलवे को पिछले साल फरवरी में उपलब्ध कराया।
इसके बाद लॉकडाउन लागू हो गया और निर्माण नहीं हो सका। जून में लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद निर्माण शुरू हुआ तो बिजली के ट्रांसफार्मर और खंभे बाधा बन गए। इन्हें हटाने के लिए रेलवे और विद्युत विभाग के बीच लंबी वार्ता चली। आखिरकार डीएम के हस्तक्षेप के बाद विद्युत विभाग को खंभे और ट्रांसफार्मर हटाने के लिए 22 लाख रुपये रेलवे द्वारा दिए गए। यह बाधा दूर होने के बाद सीआरएस निरीक्षण हुआ और गर्डर लांचिग की अनुमति मिली। अब अंत में कंक्रीट का कार्य चल रहा है। ठेकेदार का कहना है कि इसी सप्ताह यह कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद रेलवे स्थानीय निवासियों के लिए पुल को शुरू कर सकता है।
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इस क्षेत्र में लोगों को प्रभात मार्केट या मुख्य सड़क पर जाने के लिए रेलवे लाइन क्रॉस करनी पड़ती है। छोटे बच्चे भी अक्सर लाइन के पास खेलते रहते हैं। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके चलते काफी समय से लोग यहां ओवरब्रिज की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि ओवरब्रिज निर्माण के लिए पूर्व सांसद सर्वेश कुमार सिंह के कार्यकाल में शिलान्यास हुआ था। इसके बाद नगर निगम और रेलवे के बीच सहमति बनी कि नगर निगम इसके लिए धन उपलब्ध कराएगा और रेलवे निर्माण करेगा। नगर निगम निगम ने तीन किश्तों में यह धन रेलवे को पिछले साल फरवरी में उपलब्ध कराया।
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इसके बाद लॉकडाउन लागू हो गया और निर्माण नहीं हो सका। जून में लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद निर्माण शुरू हुआ तो बिजली के ट्रांसफार्मर और खंभे बाधा बन गए। इन्हें हटाने के लिए रेलवे और विद्युत विभाग के बीच लंबी वार्ता चली। आखिरकार डीएम के हस्तक्षेप के बाद विद्युत विभाग को खंभे और ट्रांसफार्मर हटाने के लिए 22 लाख रुपये रेलवे द्वारा दिए गए। यह बाधा दूर होने के बाद सीआरएस निरीक्षण हुआ और गर्डर लांचिग की अनुमति मिली। अब अंत में कंक्रीट का कार्य चल रहा है। ठेकेदार का कहना है कि इसी सप्ताह यह कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद रेलवे स्थानीय निवासियों के लिए पुल को शुरू कर सकता है।
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