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वसीम के हाथों बनी चुनरी चढ़ती वैष्णों देवी के दरबार में00

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2022 01:33 AM IST
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chunri of waseem reached is reaching vasnav devi  temple
रामपुर। रामपुर को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल के रूप में देखा जाता है। सांप्रदायिक सौहार्द के रूप में रामपुर के कई मंदिरों में मुस्लिम कारीगरों के हाथ की प्रतिमा विराजमान हैं तो वहीं वसीम अहमद समेत तमाम मुस्लिम परिवारों के हाथों की बनी चुनरी नवरात्र से लेकर अन्य दिनों में मां वैष्णो देवी, गर्जिया देवी और पूर्णागिरि माता के दरबार में चढ़ती हैं, जो श्रद्धालुओं की पूजा और मनोकामना सिद्धि का जरिया बनती हैं।
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रामपुर में हिंदू कारीगरों के साथ अनेक मुस्लिम परिवार भी माता की चुनरी बनाते हैं। चुनरी बनाने में किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। सभी कारीगर हाथ से ही गोटेदार चुनरी बनाते हैं। वसीम अहमद का परिवार पिछले 20 साल से लगातार श्री मां वैष्णो देेवी श्राइन बोर्ड को चुनरी की आपूर्ति कर रहा है। मां वैष्णो देवी दरबार के अलावा अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में भी चुनरी की सप्लाई की जाती है। इससे करीब ढाई सौ परिवारों की रोजी-रोटी चलती है।
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मां वैष्णो देवी दरबार की देखरेख की व्यवस्था श्री मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कटरा द्वारा की जाती है। श्राइन बोर्ड ही श्रद्धालुओं को प्रसाद उपलब्ध कराता है। प्रसाद में मिलने वाली चुनरी रामपुर में बनती हैं। चुनरी को तैयार करने के लिए गुजरात के सूरत से कपड़ा और राजस्थान के अजमेर से गोटा आता है। जिससे रामपुर में कारीगर हाथ से चुनरी तैयार करते हैं। चुनरी बनाने का कार्य अधिकांश मुस्लिम कारीगर करते हैं।
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रामपुर के कारचोब और जरी-जरदोजी के काम की देशभर में डिमांड है। माता रानी की चुनरी बनाने में अजीतपुर के करीब 250 परिवारों की आजीविका चलती है। श्री मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को चुनरी की सप्लाई करने वाले वसीम अहमद का कहना है कि उनका परिवार पिछले 20 सालों से मां वैष्णो माता केेेेे दरबार में चुनरी सप्लाई कर रहा है। पिछले 10 साल से उनके पास ही टेंडर है। रामपुर के अलावा मुरादाबाद, बदायूं, बरेली, सीतापुर, लखनऊ, काशीपुर, रामनगर, मुरादाबाद, कानपुर, प्रयागराज, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत आदि शहरों में भी यहां से चुन्नी सप्लाई की जाती हैं।

रामपुर से मां वैष्णो देवी दरबार के अलावा प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मंदिरों को भी चुनरी सप्लाई की जाती है। वसीम अहमद बताते हैं कि माता की चुनरी का कारोबार पिछले 40 साल से ज्यादा से चल रहा है। पहले उनके पूर्वज करते थे। पूरे साल चुनरी बनाने का काम चलता है। नवरात्र में डिमांड ज्यादा हो जाती है। इसके लिए व्यापारी पहले से आर्डर दे देते हैं। सबसे पहले चुनरी शहर में स्थित माईं के थान मंदिर में चढ़ाने के लिए बिकती थी। कुछ समय बाद वहां पर भी चुनरी की सप्लाई की जाने लगी। उत्तराखंड के काशीपुर में चेती का मेला लगता है। यहां भी माता के मंदिर के लिए चुनरी सप्लाई की जाने लगी। रामनगर में मां गर्जिया देवी, हरिद्वार में चंडी देवी, मंसा देवी, टनकपुर में मां पूर्णागिरी के अलावा देश में अनेक देवी मंदिरों के आर्डर मिलते हैं। बिहार में दुर्गा पूजा के लिए भी हर साल पहले से ही बड़ा आर्डर मिल जाता है।
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