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Moradabad News: माता-पिता की लड़ाई में फंसी बच्चों की पढ़ाई

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2025 02:19 AM IST
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Children's education stuck in parents' fight
मुरादाबाद। अंकल, एक महीने बाद मेरी बोर्ड परीक्षा है। जब भी हम पढ़ने बैठते हैं, मम्मी-पापा आपस में झगड़ने लगते हैं। इसकी वजह से हम तैयारी पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे कई मामले मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में पहुंच रहे हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे कई विद्यार्थियों ने अभिभावकों के रवैये, घर के माहौल को पढ़ाई से दूरी का कारण बताया तो कुछ ने स्कूल या साथियों से संबंधित परेशानी को बताया। काउंसिलिंग में बच्चों को फिलहाल परीक्षा और पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है। अभिभावकों को समझाया है कि आपसी मतभेद और विवाद को भूलकर परीक्षाएं पूरी होने तक बच्चों की पढ़ाई के अनुकूल माहौल दें।
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मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र मुरादाबाद में पिछले साल अक्तूबर से दिसंबर तक कुल 3294 विद्यार्थियों और अभिभावकों ने बोर्ड परीक्षा की तैयारियों को लेकर आ रही दिक्कतों को साझा किए। इनमें अक्तूबर माह में 1422, नवंबर माह में 1671 और दिसंबर माह में 201 विद्यार्थियों व अभिभावकों की काउंसिलिंग की गई। मनोवैज्ञानिक डॉ. कुमार मंगलम सारस्वत ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी बोर्ड परीक्षा और कॅरिअर निर्माण से संबंधित हैं। इसके बाद पारिवारिक समस्याओं वाली शिकायतें हैं, जिसमें बच्चों ने माता-पिता, दोस्त, शिक्षक या परिचितों से संबंधित परेशानियां बनाई हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्याएं अलग-अलग होने के साथ एक-दूसरे से जुड़ीं हुईं भी होती हैं। कई बार बच्चा इसी वजह से नहीं पढ़ पाता है कि आसपास का वातावरण शांत नहीं होता है। इसलिए जिन परिवारों में बच्चे बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं, उनकी विशेष काउंसिलिंग कर सलाह दी जा रही है कि घर में किसी भी प्रकार के संवेदनात्मक तनाव और आपसी झगड़े से बचें, जिससे अशांति का माहौल उत्पन्न न हो और बच्चे अपना एकाग्रता के साथ पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।
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केस नंबर एक
- मानपुर नरायनपुर निवासी कक्षा दस और 12वीं के दो भाइयों का केस काउंसिलिंग के लिए आया। बच्चों ने बताया कि जब भी पढ़ने का समय होता है तो माता-पिता में झगड़ा शुरू हो जाता है, जिसकी वजह से वह पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। जब अभिभावकों को बुलाकर स्थिति का पता किया तो मूल वजह रुपयों की थी। मां कामकाजी है और पिता की नौकरी छूट गई है। ऐसे में दोनों को बच्चों के भविष्य की खातिर आपसी सामंजस्य बैठाने की सलाह दी गई। वहीं बच्चों को भी देर रात तक पढ़ने के बजाय सुबह जल्दी जगकर शांत माहौल में पढ़ने को प्रेरित किया गया।
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केस नंबर दो
- वशिष्ठ विहार निवासी कक्षा 12 के छात्र ने कहा कि मैं बोर्ड परीक्षा के साथ जेईई की भी तैयारी कर रहा हूं। मम्मी हमेशा अच्छे अंक लाने के लिए कहती रहती हैं। इसकी वजह से मैं पढ़ाई में सांमजस्य नहीं बना पा रहा हूं। मन में कई बार बहुत घबराहट और डर भी रहता है। काउंसिलिंग में छात्र को अंकों की चिंता छोड़कर सिर्फ तैयारी पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया गया और वहीं उसकी मम्मी को बच्चे के सामने अंकों से संबंधित बात न करने की सलाह दी गई। इसके अलावा बच्चे को अपनी प्राथमिकता तय करने, सही रणनीति के साथ तैयारी करने को भी कहा।


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केस नंबर तीन
- कटघर निवासी कक्षा दस की छात्रा ने काउंसिलिंग में बताया कि जब भी वह पढ़ने बैठती है तो लगता है कि यह पूरा याद है। लेकिन जब वह किताब बंद कर उसे दोहराने का प्रयास करती है तो कुछ याद नहीं आता। अब डर लग रहा है कि कहीं फेल न हो जाए। काउंसिलिंग में उसे सलाह दी गई कि कभी-कभी घबराहट और मानसिक अंर्तद्वद्व की वजह से भी भूलने की समस्या हो जाती है। परीक्षा से ठीक पहले लर्निंग मटेरियल में बार-बार बदलाव करने से बचे यह भी भूलने का एक कारण हो सकता है। किताब को सिर्फ शीशे की तरह देखकर ही रटने के बजाय किसी प्रश्न के उत्तर का अभ्यास करने के दौरान महत्वपूर्ण बिंदु नोटबुक पर लिखने की सलाह दी गई।
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