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डेंगू के डंक पर दशहत का कारोबार
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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण की दुश्वारियां झेलने के बाद लोग अब डेंगू के डंक से दहशत में हैं। डेंगू के इस दहशत को कारोबार बना दिया गया है। कहीं जांच के नाम पर तो कहीं प्लेटलेट्स के नाम पर मरीजों की जेब ढीली की जा रही है। सामान्य बुखार को भी डेंगू बताकर मरीजों से वसूली हो रही है।
इन दिनों में जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। लोगों में डेंगू के डंक का खौफ बैठने लगा है। ये दहशत कारोबार बनने लगी है। निजी अस्पतालों में प्लेटलेट्स की कमी को डेंगू बताकर मरीजों में भय पैदा किया जा रहा है। बिना एलाइजा टेस्ट मरीज को डेंगू पीड़ित मान लिया जा रहा है। इसकी आड़ में तमाम टेस्ट कराई जा रही है। इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल किए जा रहे हैं।
कहीं टेस्ट के नाम पर तो कहीं प्लेटलेट्स के नाम पर मरीजों की जेब ढीली की जा रही है। रैपिड टेस्ट तक के 1000 से 1100 रुपये लिए जा रहे हैं। जंबो पैक प्लेटलेट्स के लिए 11 से 12 हजार तक रुपये वसूले जा रहे हैं। यही नहीं दो से तीन अस्पतालों में रखा जाता है। अच्छी खासी रकम वसूलने के बाद उन्हें घर भेज दिया जा रहा है, जबकि सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने से ही डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती है।
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इलाज के नाम पर मनमानी वसूली
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में जंबो पैक प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं है। यहां जंबो पैक तैयार करने वाली मशीन नहीं है। यहां एक यूनिट प्लेटलेट्स मिलता है। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजाें को फ्री में दिया जाता है, जबकि निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए 300 रुपये फीस है। वहीं, जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट और रैपिड टेस्ट फ्री में किया जाता है।
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इन दिनों में जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। लोगों में डेंगू के डंक का खौफ बैठने लगा है। ये दहशत कारोबार बनने लगी है। निजी अस्पतालों में प्लेटलेट्स की कमी को डेंगू बताकर मरीजों में भय पैदा किया जा रहा है। बिना एलाइजा टेस्ट मरीज को डेंगू पीड़ित मान लिया जा रहा है। इसकी आड़ में तमाम टेस्ट कराई जा रही है। इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल किए जा रहे हैं।
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कहीं टेस्ट के नाम पर तो कहीं प्लेटलेट्स के नाम पर मरीजों की जेब ढीली की जा रही है। रैपिड टेस्ट तक के 1000 से 1100 रुपये लिए जा रहे हैं। जंबो पैक प्लेटलेट्स के लिए 11 से 12 हजार तक रुपये वसूले जा रहे हैं। यही नहीं दो से तीन अस्पतालों में रखा जाता है। अच्छी खासी रकम वसूलने के बाद उन्हें घर भेज दिया जा रहा है, जबकि सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने से ही डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती है।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में जंबो पैक प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं है। यहां जंबो पैक तैयार करने वाली मशीन नहीं है। यहां एक यूनिट प्लेटलेट्स मिलता है। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजाें को फ्री में दिया जाता है, जबकि निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए 300 रुपये फीस है। वहीं, जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट और रैपिड टेस्ट फ्री में किया जाता है।