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1.5 के 15 करोड़ बनाने में फंस गए सीनियर डीएफएम
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sun, 28 Aug 2016 11:56 AM IST
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रेलवे भारत में हर साल हजारों करोड़ के ठेके देता है। ठेेके पर होने वालों कामों में कमीशन का भी चलन है। जिसके चलते कुछ सीटें ऐसी हैं जिन पर बैठने वाला देखते ही देखते करोड़पति हो जाता है। मुरादाबाद में पकड़े गए सीनियर डीएफएम भी करोड़पति की श्रेणी में पहुंच गए थे। रेलवे की जांच के अनुसार उन्होंने अपने कार्यकाल में 140 करोड़ रुपये के बिल पास किए।
अगर एक फीसदी का भी कमीशन मान लिया जाए तो एक करोड़ चालीस लाख रुपये का हिसाब बनता है। लेकिन लालच में ने उन्हें अंधा कर दिया और वे दस फीसदी की मांग करने लगे। जबकि रेलवे में अगले दो से तीन सालों में हजारों करोड़ रुपये का काम होना है। सीबीआई के छापे में पकड़े गए सीनियर डीएफएम डा. पंकज कुमार अपने लालच के कारण बलि का बकरा बन गए। करोड़ों रुपये की चाह में सही और गलत भूल गए।
सीबीआई के छापे के अधिकारियों के बीच उनके कारनामे चर्चा का विषय बने हुए। हर कोई अपने अपने हिसाब से उनकी कमाई का आंकलन करने में लगा है। लेकिन विभागीय आंकड़े जो गवाही दे रहे हैं उसके अनुसार वे करोड़पति की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। अपने दस महीने के कार्यकाल में उन्होंने 140 करोड़ रुपये के बिल पास किए हैं। इसी बिल से अगर एक फीसदी कमीशन लेकर भी उनके पास करोड़ चालीस लाख रुपये हो जाते हैं।
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लेकिन उन्हें इससे कहीं ज्यादा की चाह थी। बताया जा रहा है कि वे साफ तौर पर कहते थे कि सबसे प्रमुख कार्य तो उनका है। पैसा उनके साइन से जारी होना है तो फिर से कम क्यों लें। इसी सोच के चलते कमीशन दस प्रतिशत कर दिया। अगर इस वित्तीय वर्ष के शेष महीनों में इतने के ही बिल पास करते तो 14 करोड़ रुपये जमा कर लेते। रेलवे में कई और ऐसी सीट हैं जिन पर बैठने वाले देखते ही देखते करोड़पति बन जाते हैं।
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अगर एक फीसदी का भी कमीशन मान लिया जाए तो एक करोड़ चालीस लाख रुपये का हिसाब बनता है। लेकिन लालच में ने उन्हें अंधा कर दिया और वे दस फीसदी की मांग करने लगे। जबकि रेलवे में अगले दो से तीन सालों में हजारों करोड़ रुपये का काम होना है। सीबीआई के छापे में पकड़े गए सीनियर डीएफएम डा. पंकज कुमार अपने लालच के कारण बलि का बकरा बन गए। करोड़ों रुपये की चाह में सही और गलत भूल गए।
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सीबीआई के छापे के अधिकारियों के बीच उनके कारनामे चर्चा का विषय बने हुए। हर कोई अपने अपने हिसाब से उनकी कमाई का आंकलन करने में लगा है। लेकिन विभागीय आंकड़े जो गवाही दे रहे हैं उसके अनुसार वे करोड़पति की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। अपने दस महीने के कार्यकाल में उन्होंने 140 करोड़ रुपये के बिल पास किए हैं। इसी बिल से अगर एक फीसदी कमीशन लेकर भी उनके पास करोड़ चालीस लाख रुपये हो जाते हैं।
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लेकिन उन्हें इससे कहीं ज्यादा की चाह थी। बताया जा रहा है कि वे साफ तौर पर कहते थे कि सबसे प्रमुख कार्य तो उनका है। पैसा उनके साइन से जारी होना है तो फिर से कम क्यों लें। इसी सोच के चलते कमीशन दस प्रतिशत कर दिया। अगर इस वित्तीय वर्ष के शेष महीनों में इतने के ही बिल पास करते तो 14 करोड़ रुपये जमा कर लेते। रेलवे में कई और ऐसी सीट हैं जिन पर बैठने वाले देखते ही देखते करोड़पति बन जाते हैं।