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बाईपास की कम चौड़ाई और डिवाइडर की अनदेखी बढ़ा रही हादसे-00
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रामपुर। शनिवार की रात बाईपास पर जिस स्थान पर बस और ट्रक की टक्कर हुई है, वो दुर्घटना बहुल क्षेत्र में शामिल है। जिले में नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे समेत 11 स्थान दुर्घटना बहुल क्षेत्र (ब्लैक स्पॉट) के रूप में चिह्नित हैं। रामपुर बाईपास के कई बिंदु इन 11 स्थानों में शामिल हैं। बाईपास की कम चौड़ाई और डिवाइडर का न होना बढ़ते हादसों की बड़ी वजह है।
रामपुर में सीआरपीएफ चुंगी, कोसी पुल, पसियापुरा बाईपास, समेत कई ऐसे ब्लैक स्थान हैं, जो भीषण सड़क हादसों को जन्म दे चुके हैं। हाईवे स्थित बाईपास के जिस स्थान पर शनिवार रात हादसा हुआ उसे भी दुर्घटना आशंकित क्षेत्र में गिना जाता है। दरअसल हाईवे का बाईपास होने के बावजूद इस पर डिवाइडर नहीं है। वाहनों की संख्या बढ़ने के बाद भी रोड की चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई है।
सिविल इंजीनियरिंग और सड़कों के काम का अनुभव रखने वाले बताते हैं कि जब बाईपास का निर्माण हुआ था तो प्रतिदिन बीस हजार पैसेंजर कैरी यूनिट से कम गुजरते थे। नियम के हिसाब से जब किसी भी हाईवे से प्रतिदिन बीस हजार पैसेंजर कैरी यूनिट से अधिक गुजरने लगें तो उस मार्ग को फोरलेन में तब्दील किया जाना चाहिए। इस वक्त बाईपास से हर रोज मानक से करीब दस हजार अधिक वाहन गुजर रहे हैं।
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सड़क की कम चौड़ाई और डिवाइडर न होने से ओवरटेकिंग के समय अक्सर आमने-सामने के वाहन एक ही लेन में आ जाते हैं। शनिवार रात के हादसे के गवाह बने लोगों ने बताया कि एक वाहन को ओवरटेक करते समय बस का सीधा सामना विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक से हुआ। चालक बस को काबू नहीं रख सका और ट्रक में भिड़ने से भीषण हादसा हो गया।
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रामपुर में सीआरपीएफ चुंगी, कोसी पुल, पसियापुरा बाईपास, समेत कई ऐसे ब्लैक स्थान हैं, जो भीषण सड़क हादसों को जन्म दे चुके हैं। हाईवे स्थित बाईपास के जिस स्थान पर शनिवार रात हादसा हुआ उसे भी दुर्घटना आशंकित क्षेत्र में गिना जाता है। दरअसल हाईवे का बाईपास होने के बावजूद इस पर डिवाइडर नहीं है। वाहनों की संख्या बढ़ने के बाद भी रोड की चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई है।
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सिविल इंजीनियरिंग और सड़कों के काम का अनुभव रखने वाले बताते हैं कि जब बाईपास का निर्माण हुआ था तो प्रतिदिन बीस हजार पैसेंजर कैरी यूनिट से कम गुजरते थे। नियम के हिसाब से जब किसी भी हाईवे से प्रतिदिन बीस हजार पैसेंजर कैरी यूनिट से अधिक गुजरने लगें तो उस मार्ग को फोरलेन में तब्दील किया जाना चाहिए। इस वक्त बाईपास से हर रोज मानक से करीब दस हजार अधिक वाहन गुजर रहे हैं।
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सड़क की कम चौड़ाई और डिवाइडर न होने से ओवरटेकिंग के समय अक्सर आमने-सामने के वाहन एक ही लेन में आ जाते हैं। शनिवार रात के हादसे के गवाह बने लोगों ने बताया कि एक वाहन को ओवरटेक करते समय बस का सीधा सामना विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक से हुआ। चालक बस को काबू नहीं रख सका और ट्रक में भिड़ने से भीषण हादसा हो गया।