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UP: पीतल की सिल्ली के दामों में उछाल, बंदी के कगार पर 50 फीसदी कारखाने, यूपी के निर्यातकों के काम पर बड़ा असर

Thu, 29 Jan 2026 02:03 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Thu, 29 Jan 2026 02:03 AM IST
सार

ट्रंप की टैरिफ नीति के चलते पीतल और एल्युमिनियम की सिल्लियों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इससे मुरादाबाद के निर्यात कारोबार को संकट में डाल दिया है। बढ़ी लागत के कारण उत्पाद महंगे हो गए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हस्तशिल्प की बिक्री प्रभावित होने लगी है। 

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UP: Prices of brass ingots surge, 50 percent of factories on the verge of closure
सोना vs डॉलर। - फोटो : ANI

विस्तार

ट्रंप की टैरिफ समेत अन्य कई चुनौतियों ने निर्यातकों के काम पर असर डाला है। इससे प्रभावित कारखानेदार अब सिल्ली की महंगाई से टूट रहे हैं। पिछले चार महीने में पीतल की सिल्ली के दामों में 160 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हो गई। इसी तरह एल्युमिनियम की सिल्ली 240 से 260 रुपये किलो तक पहुंच गई है, जबकि पिछले माह यह 205 रुपये प्रति किलो थी।

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कीमतों में इस उछाल से शहर के करीब 50 फीसदी कारखाने बंद होने जैसी स्थिति में आ गए हैं। पीतलनगरी में हस्तशिल्प के काम से जुड़े छोटे-बड़े आठ हजार से ज्यादा कारखानेदार हैं। इन कारखानों से निर्यातकों को कच्चे माल की सप्लाई से लेकर ऑर्डर पर तैयार हुए शिल्प उत्पादों की बिक्री होती है।
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उत्पादों को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में पीतल, एल्युमिनियम, लोहा आदि प्रमुख है। इस कच्चे माल पर निर्यातकों के साथ-साथ कारखानेदार भी निर्भर रहते हैं। इस बीच मेटल की सिल्लियों की महंगाई ने कारखानेदारों को तोड़ दिया है।
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चार महीने पहले पीतल की सिल्ली की कीमत 590 रुपये प्रति किलो थी। यह कीमत जनवरी में बढ़कर 750 से 800 प्रति किलो तक हो गई है। ऐसे ही एल्युमीनियम के दाम 240 से 260 रुपये प्रति किलो तक हो गए हैं। इससे तैयार होने वाले उत्पाद की कीमतें बढ़ना तय है।

मुरादाबादी उत्पादों के बड़े खरीदार अमेरिका में भारतीय प्रोडेक्ट की महंगाई पहले से बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ऐसे में और महंगे उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिक पाना संभव नहीं होगा। इन स्थितियों के कारण अधिकांश कारखानेदार और कारीगर इन दिनों खाली हाथ हो गए हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि हालात न बदले तो 50 फीसदी कारखानों में ताले पड़ जाएंगे।

यूं बढ़ी पीतल की सिल्ली पर महंगाई
महीना        कीमत (रुपये)
सितंबर        590
अक्तूबर       615
नवंबर          635
दिसंबर        650
जनवरी        750
नोट : सिल्ली की कीमत प्रति किलो में है। एक सिल्ली औसत 08 से 10 किलो की।

कारखानेदारों की नजर लंदन मेटल एक्सचेंज पर
पीतलनगरी के कारखानेदारों की नजर लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर है। यहीं से कच्चे माल (धातुओं) की कीमत तय होती है। रोजाना रेट जारी होता है। कारोबारी रुपये के मुकाबले डॉलर की लगातार मजबूती को भी इस महंगाई का कारण मान रहे हैं।

कच्चे माल की कीमतों में उछाल से कारखानेदार खराब दाैर से गुजर रहे हैं। लगातार निर्यात मेले हो रहे हैं लेकिन निर्यातकों को ऑर्डर नहीं मिल रहे। हैं। इसका सीधा असर कारखानों पर पड़ रहा है। साथ ही सिल्ली की महंगाई से करीब 50 फीसदी कारखाने बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। - आजम अंसारी, अध्यक्ष, मुरादाबाद कारखानेदार एसोसिएशन

कारखानेदारों के पास कच्चे माल के ऑर्डर नाम मात्र के रह गए हैं। न तो विदेशी बाजार में डिमांड है और न ही घरेलू बाजार में कच्चे माल की मांग बची है। जो माल फर्मों को जा भी रहा है उसका भुगतान नहीं हो पा रहा। - नोमान मंसूरी, अध्यक्ष, हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट सोसायटी

हस्तशिल्प उत्पादों के लिए कच्चे माल की जरूरत होती है। चार महीने पहले पीतल की सिल्ली की कीमत 590 रुपये प्रति किलो थी। अब यह कीमत 750 रुपये तक पहुंच गई है। निर्यातक टैरिफ की मार से पहले से परेशान हैं। सिल्लियों की महंगाई से कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है। - नवेद खान, निर्यातक

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