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Moradabad News: सिस्टम के सामने निहत्थे मुक्केबाज, डेढ़ साल से बॉक्सिंग कैंप बंद

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jan 2026 02:17 AM IST
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Boxers are defenseless against the system, boxing camps have been closed for a year and a half.
मुरादाबाद। नेताजी सुभाष चंद्र बोस सोनकपुर स्टेडियम में मुक्केबाजों का दर्द साफ झलक रहा है। यहां शाम के चार बजते ही मुक्केबाजों का जुटना शुरू हो जाता है लेकिन अभ्यास से पहले उन्हें खुद ही रिंग की सफाई करनी पड़ती है। इसके बाद अपनी-अपनी किट निकालकर अभ्यास में जुट जाते हैं। यह नजारा सोनकपुर स्टेडियम में नियमित रूप से देखने को मिलता है, क्योंकि सिस्टम ने इन्हें पिछले डेढ़ वर्षों से निहत्था कर रखा है। इतने लंबे समय से न तो इन खिलाड़ियों को कोच नसीब हुआ है और न ही इन खिलाड़ियों को जरूरी उपकरण मिले हैं।
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स्टेडियम के यह मुक्केबाज अपने प्रतिद्वंद्वी से ज्यादा व्यवस्था की कमी से लड़ते नजर आ रहे हैं। मैदान पर अभ्यास के लिए शहबाज मलिक, निक्कू कुमार, श्याम मोहन सिंह और निखिल भटनागर समेत करीब तीन दर्जन खिलाड़ी नियमित रूप से पहुंचते हैं। इनमें कई ऐसे मुक्केबाज भी हैं जो राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं का हिस्सा भी बन चुके हैं। पिछले करीब 16 महीनों से यह सभी खिलाड़ी बिना कोच के ही अभ्यास कर रहे हैं जिससे इनके प्रदर्शन पर भी गंभीर असर पड़ा है। यह सभी सीनियर खिलाड़ियों के भरोसे खेल की तकनीक सीखने को मजबूर हैं।
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मुक्केबाज अलीशान का कहना है कि सीनियर का अनुभव बहुत काम आता है लेकिन प्रोफेशनल कोच की कमी को यह व्यवस्था पूरा नहीं कर सकती। कोच नहीं होने का नतीजा यह हुआ कि पिछले एक वर्ष में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शहर का कोई भी मुक्केबाज अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सका है। खिलाड़ियों का आरोप है कि अभ्यास के लिए जरूरी हेड गियर, ग्लव्स और अन्य सुरक्षा उपकरण भी उन्हें नहीं मिल रहे हैं और मानकों के अनुसार बॉक्सिंग रिंग भी नहीं है। इससे तैयारियों पर असर पड़ता है। खिलाड़ियों का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार स्टेडियम प्रशासन और संबंधित दफ्तरों में जाकर अपनी समस्याएं रखीं और लिखित शिकायतें भी दीं। जवाब में उन्हें बताया गया कि जब तक कैंप नहीं लगेगा तब तक कोई सामान उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।
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- निकल चुके हैं कई राष्ट्रीय खिलाड़ी
सोनकपुर स्टेडियम में अभ्यास करके कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान भी स्थापित कर चुके हैं। एसोसिएशन के सचिव के अनुसार करीब दो दर्जन खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। इनमें उदय प्रताप सिंह, योगेंद्र कुमार, सुमित शर्मा, अनिल गौड़, सचिन कुमार और आकाश कुमार जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं बल्कि कई खिलाड़ी खेल कोटे से विभिन्न विभागों में नौकरी भी कर रहे हैं।

- नहीं मिल रहे जरूरी उपकरण
स्टेडियम में बॉक्सिंग का अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। उन्हें खुद से ही उपकरण खरीदने पड़ते हैं। ग्लव्स, हेलमेट, जूते, हाथ की पट्टी, हेड गियर जैसे उपकरण न मिलने से अभ्यास पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। यह उपकरण बाजार में महंगे दाम पर उपलब्ध होते हैं इसलिए हर खिलाड़ी के लिए इन उपकरणों को जुटा पाना मुश्किल होता है। पहले स्टेडियम से ही उपकरण मिलते थे लेकिन कैम्प बंद होने के बाद यह उपकरण भी मिलने बंद हो गए हैं।


- क्या बोले खिलाड़ी
- सीनियर खिलाड़ियों के साथ ही अभ्यास कर रहे हैं। कोच की तैनाती जल्द होनी चाहिए। - मो. शमी
- रिंग छोटी है और कई लोगों के पास उपकरण तक नहीं हैं। कोच के इंतजार में यह पूरा साल बीत गया। - उदयवीर सिंह
- कोच के न होने से लगातार बॉक्सिंग का क्रेज कम हो रहा है। कई लोगों ने तो अब अभ्यास ही छोड़ दिया है। - अरहाम मलिक
- हमें जो भी आता है हम जूनियर खिलाड़ियों को बताते रहते हैं। इससे हमारा अपना अभ्यास भी बाधित होता है। - रवि कुमार
- स्टेडियम में जो कोच नियुक्त था उसे फर्जी शिकायतें करके बाहर निकलवा दिया गया। बिना कोच के कैसे बच्चे आगे बढ़ सकते हैं। इस संबंध में राज्य स्तर पर अधिकारियों को पत्र भी लिखा है और नियमित रूप से कोशिशें कर रहा हूं। - सुनील क्षेत्री, सचिव, जिला बॉक्सिंग एसोसिएशन
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