{"_id":"5c348649bdec2256e517f579","slug":"azam-khan-demanded-reservation-for-muslims-after-upper-reservation-bill","type":"story","status":"publish","title_hn":"सवर्ण आरक्षण बिल के बाद आजम खान ने रखी मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सवर्ण आरक्षण बिल के बाद आजम खान ने रखी मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने की मांग
Tue, 08 Jan 2019 04:45 PM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 08 Jan 2019 04:45 PM IST
विज्ञापन
आजम खां
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरक्षण के मसले पर आजम खां ने कहा है कि कुछ दिन पहले आरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश और राजस्थान में उग्र प्रदर्शन हुए थे। सरकारी इमारतों और अमले को तोड़ा और नुकसान पहुंचाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा संज्ञान भी लिया था। यह दबाव का आरक्षण है।
विज्ञापन
ये दरअसल 5 राज्यों के चुनावी नतीजो के बाद का विचार है। हमें यह जानना है कि जो अगड़ों को, सवर्णों को, जो माली तौर पर बदहाल हैं या आर्थिक पिछड़े है, उनमें सबसे ज्यादा पिछड़ा है वह दलित से भी बदतर है। कमीशंस की भी रिपोर्ट है जिनमें कहा गया है कि दलितों से भी बदतर हालात में मुसलमान है। हमें यह जानना है कि यह संविधान में जो बदलाव हो रहा है उसमें देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी जिसकी हालात बदहाल है और जिनके साथ भारतीय जनता पार्टी और दूसरी फासिस्ट्स ताकतों का रव्वया बहुत बुरा है।
विज्ञापन
इस रिजर्वेशन में उन मुसलमानों का जो आर्थिक रूप से पिछड़े हैं उनके लिए कितने प्रतिशत होगा। हमारे खयाल से दोनों को 5-5 पर्सेंट दिया जाना चाहिए। जो संविधान ला रहे हैं उसमें 8 लाख सालाना रुपये और 5 एकड़ जमीन तक जबकि मुसलमानों के पास 5 गज जमीन भी नहीं है, उनका हक तो बहुत ज्यादा बनता है।
विज्ञापन
अगर इस संवैधानिक बदलाव में देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी के बारे में विचार नहीं हो रहा है तो इस रिजर्वेशन का मतलब क्या है। यह तो चुनाव के वक्त एक बार फिर कम्युनल कार्ड खेला जा रहा है। अगर आपको रिजर्वेशन देना था तो 4 साल पहले देते। 1 साल पहले ही दे देते।रिजर्वेशन का लाभ आपके रहते तो मिलेगा नहीं। आपको यह मालूम है। और अगर हो भी जाए तो विधि विशेषज्ञों का कहना है सुप्रीम कोर्ट में ऐतराज हो सकता है लेकिन हमें हमारा हिस्सा मिलना चाहिए।