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Moradabad News: अभिभावकों की आवाज नहीं बन पा रहे एसोसिएशन के पदाधिकारी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2024 02:28 AM IST
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Association officials are not able to become the voice of parents
मुरादाबाद। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए अभिभावक एसोसिएशन जोरों से आवाज उठाती है लेकिन जब बात आरटीई के जरिये निजी स्कूलों में प्रवेश की होती है तो अभिभावकों को अकेले ही संघर्ष करना पड़ता है। स्कूल से लेकर अधिकारियों तक अभिभावक दर-दर भटकते हैं लेकिन अभिभावक एसोसिएशन के एजेंडे में यह समस्याएं नहीं होती हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से चालू शैक्षिक सत्र में निजी स्कूलों को दाखिला न लेने की शिकायत पर 78 नोटिस जारी किए गए थे। इनमें ज्यादातर अभिभावक ऐसे थे, जिनके बच्चों को पहली या दूसरी सूची में ही स्कूल आवंटित हो गया था। इसके बावजूद स्कूलों द्वारा कोई न कोई बहाना बनाकर बच्चे का दाखिला नहीं किया गया। अभिभावक कई महीने स्कूल-विभाग में भटके। इन सबकी वजह से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई। इन मामलों में मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल की ओर से अभिभावकों की मदद नहीं की गई।
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तीन महीने तक लगाए चक्कर
रामगंगा विहार निवासी एक अभिभावक ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी के प्री-नर्सरी में दाखिले के लिए आवेदन किया था। दूसरी सूची में स्कूल भी आवंटित हो गया था लेकिन स्कूल ने दाखिला देने में हीलाहवाली शुरू कर दी। वह बार-बार स्कूल में दाखिला की जानकारी के लिए जाती थीं लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता था। इसके बाद अधिकारियों से शिकायत की। अधिकारी बार-बार स्कूल को निर्देश देते रहे। जब तीन महीने तक अभिभावक ने चक्कर लगाना बंद नहीं किया, तब जाकर विद्यालय ने बालिका को प्रवेश दिया। अभिभावक का कहना है कि इस भागदौड़ में अभिभावक एसोसिएशन का सहयोग नहीं मिला।
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चयन होने के बाद भी दाखिला नहीं दे रहा था स्कूल
गांधी नगर निवासी एक अभिभावक के अनुसार उनकी बेटी का पहली लॉटरी में ही चयन के बाद स्कूल आवंटन हो गया था। जब स्कूल में दाखिला करवाने गए तो उन्होंने विभाग से सूची न मिलने का बहाना बना दिया। विभाग में पता करने पर जानकारी मिली कि स्कूल को सूची भेजी गई थी। इसके बाद स्कूल ने सत्यापन की बात कहकर 15 दिन तक दाखिला नहीं दिया। कई बार जब विभाग में शिकायत की तब जाकर दाखिला मिल सका। इस दौरान यदि अभिभावक एसोसिएशन का सहयोग मिल जाता तो जल्दी सुनवाई हो जाती।







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आरटीई से संबंधित समस्याओं को अभिभावक सार्वजनिक तौर से बताने में कतराते हैं। पिछले वर्ष एक ही स्कूल के चार मामलों की जानकारी हुई थी। इस संबंध में स्कूल से संपर्क भी किया था। हमारे पास सभी स्कूलों के सात व्हॉट्सएप ग्रुप हैं, जबकि तीन व्हॉट्सएप ग्रुप अलग-अलग स्कूलों के नाम से हैं। अभिभावक ग्रुप में जानकारी दे सकते हैं। हमें कहीं अन्य से जानकारी मिलती है तो भी आवाज उठाते हैं। - अनुज गुप्ता, अध्यक्ष, मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल
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