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बिना लाइसेंस उर्वरक बेचने वाले पर धोखाधड़ी का एक और मुकदमा
Tue, 17 Nov 2020 01:59 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 17 Nov 2020 01:59 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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मुरादाबाद/मूंढ़ापांडे। रविवार को बिना लाइसेंस उर्वरक बिक्री करते पकड़े गए धोखा धड़ी के आरोपी इंतखाब के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी का एक और मुकदमा पंजीकृत किया है। सोमवार को पुलिस ने उसका चालान कर दिया। खास बात यह है कि आरोपी जिस दुकान में खाद बेचता पकड़ा गया उस दुकान पर न तो कोई बोर्ड लगा था और ना ही कोई पॉश मशीन ही वहां मौजूद थी। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कई साल से वहां आरोपी उर्वरक बिक्री का काम कर रहा था।
पुलिस के मुताबिक आरोपी इंतखाब व उसके भाई शादाब पर मूढ़ापांडे थाने समेत जिले के पांच थानों में पहले से ही धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। इन मुकदमों पर उन पर उद्यान विभाग की निष्क्रिय समिति का फर्जी पदाधिकारी बन कर कृषि विभाग से उर्वरक लाइसेंस जारी करा पिछले कई साल से उर्वरक व्यवसाय करने का आरोप है। मूढ़ापांडे एसएचओ ने बताया कि पुलिस रविवार सितंबर माह में आरोपी को कृषि विभाग की ओर से दर्ज कराए गए धोखाधड़ी व कूटरिचत के मुकदमे में गिरफ्तार करने पहुंची थी, लेकिन वह वहां बिना लाइसेंस उवर्रक बिक्री करते मिल गया। इस लिए पुलिस की ओर से आरोपी के खिलाफ रविवार को धोखाधड़ी का एक और मुकदमा दर्ज कर सोमवार उसका न्यायालय के लिए चालान कर दिया गया। आरोपी की गिरफ्तारी दोनों ही मुकदमों में दिखाई गई है।
खास बात यह है कि पुलिस ने आरोपी की जिस दुकान में उर्वरक पकड़ी है, वहीं आरोपी का ही रिहायशी मकान बताया जाता है। उस दुकान तक पहुंचने के लिए मकान और दुकान जाने वाले रास्ते पर लगाए गए बड़े गेट से होकर गुजरना पड़ता है। इस गेट का छोटा दरवाजा खोल कर आरोपी व उसका भाई ग्रामीणों को खाद बेचने का काम करते आ रहे हैं।
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मेन रोड पर बनी दुकानों पर तिलहन समिति का नाम
आरोपी इंतखाब की जिस दुकान से पुलिस ने बिना लाइसेंस उर्वरक पकड़ी है वह आरोपी के मकान के पीछे के हिस्से में बनी है। मेन गेट से सटे तीन अन्य दुकानें हैं। इनमें से दो दुकानों के उपर कृषक सेवा तिलहन सोयाबीन उत्पादन सहकारी समिति लि. मातीपुर उर्फ मैनी (करनपुर) लिखा है। जिसका प्रोपराइटर प्रबंधक शादाब हुसैन को बताया गया है। इसमें से एक दुकान में फर्नीचर का कारोबार चलता मिला। एक दुकान बंद मिली। इस दुकान की शटर पर इफ्को लिखा है। इससे उद्यान विभाग की तर्ज पर तिलहन, सोयाबीन विभाग की समितियों के नाम पर जिले में किए जा रहे उर्वरक व्यवसाय पर भी सवालिया निशान लग गया है।
जांच को नहीं पहुंची कृषि विभाग की टीम
मूंढ़ापांडे एसएचओ ने बताया कि उन्होंने आरोपी इंतखाब का चालान करने के साथ इसकी सूचना कृषि विभाग को दे दी है, लेकिन अवकाश के कारण उनकी टीम नहीं आ सकी। मंगलवार को टीम मौके पर पहुंच आवश्यक कार्रवाई करेगी।
ये है पूरा मामला
जिले में निष्क्रिय उद्यान समितियों का फर्जी पदाधिकारी बन कर कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिली भगत से कुछ लोग पिछले कई साल से उर्वरक व्यवसाय कर रहे थे। करीब एक साल पहले जिला उद्यान अधिकारी ने अपनी एक निरीक्षण रिपोर्ट में इसका उल्लेख करते हुए कार्रवाई के लिए इसकी उच्चाधिकारियों को भेजी थी, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अमर उजाला द्वारा इसका खुलासा किए जाने के बाद डीएम ने डीएचओ से निष्क्रिय समितियों की रिपोर्ट तलब की और उसके आधार पर डीएओ को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। तब जाकर कृषि विभाग की ओर से आरोपी इंतखाब उसके भाई शादाब समेत तीन लोगों के खिलाफ पांच थानों में फर्जी ढंग से दस्तावेज तैयार कर कूटरचित तरीके से उर्वरक लाइसेंस प्राप्त करने के आरोप में सितंबर माह में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
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पुलिस के मुताबिक आरोपी इंतखाब व उसके भाई शादाब पर मूढ़ापांडे थाने समेत जिले के पांच थानों में पहले से ही धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। इन मुकदमों पर उन पर उद्यान विभाग की निष्क्रिय समिति का फर्जी पदाधिकारी बन कर कृषि विभाग से उर्वरक लाइसेंस जारी करा पिछले कई साल से उर्वरक व्यवसाय करने का आरोप है। मूढ़ापांडे एसएचओ ने बताया कि पुलिस रविवार सितंबर माह में आरोपी को कृषि विभाग की ओर से दर्ज कराए गए धोखाधड़ी व कूटरिचत के मुकदमे में गिरफ्तार करने पहुंची थी, लेकिन वह वहां बिना लाइसेंस उवर्रक बिक्री करते मिल गया। इस लिए पुलिस की ओर से आरोपी के खिलाफ रविवार को धोखाधड़ी का एक और मुकदमा दर्ज कर सोमवार उसका न्यायालय के लिए चालान कर दिया गया। आरोपी की गिरफ्तारी दोनों ही मुकदमों में दिखाई गई है।
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खास बात यह है कि पुलिस ने आरोपी की जिस दुकान में उर्वरक पकड़ी है, वहीं आरोपी का ही रिहायशी मकान बताया जाता है। उस दुकान तक पहुंचने के लिए मकान और दुकान जाने वाले रास्ते पर लगाए गए बड़े गेट से होकर गुजरना पड़ता है। इस गेट का छोटा दरवाजा खोल कर आरोपी व उसका भाई ग्रामीणों को खाद बेचने का काम करते आ रहे हैं।
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मेन रोड पर बनी दुकानों पर तिलहन समिति का नाम
आरोपी इंतखाब की जिस दुकान से पुलिस ने बिना लाइसेंस उर्वरक पकड़ी है वह आरोपी के मकान के पीछे के हिस्से में बनी है। मेन गेट से सटे तीन अन्य दुकानें हैं। इनमें से दो दुकानों के उपर कृषक सेवा तिलहन सोयाबीन उत्पादन सहकारी समिति लि. मातीपुर उर्फ मैनी (करनपुर) लिखा है। जिसका प्रोपराइटर प्रबंधक शादाब हुसैन को बताया गया है। इसमें से एक दुकान में फर्नीचर का कारोबार चलता मिला। एक दुकान बंद मिली। इस दुकान की शटर पर इफ्को लिखा है। इससे उद्यान विभाग की तर्ज पर तिलहन, सोयाबीन विभाग की समितियों के नाम पर जिले में किए जा रहे उर्वरक व्यवसाय पर भी सवालिया निशान लग गया है।
जांच को नहीं पहुंची कृषि विभाग की टीम
मूंढ़ापांडे एसएचओ ने बताया कि उन्होंने आरोपी इंतखाब का चालान करने के साथ इसकी सूचना कृषि विभाग को दे दी है, लेकिन अवकाश के कारण उनकी टीम नहीं आ सकी। मंगलवार को टीम मौके पर पहुंच आवश्यक कार्रवाई करेगी।
ये है पूरा मामला
जिले में निष्क्रिय उद्यान समितियों का फर्जी पदाधिकारी बन कर कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिली भगत से कुछ लोग पिछले कई साल से उर्वरक व्यवसाय कर रहे थे। करीब एक साल पहले जिला उद्यान अधिकारी ने अपनी एक निरीक्षण रिपोर्ट में इसका उल्लेख करते हुए कार्रवाई के लिए इसकी उच्चाधिकारियों को भेजी थी, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अमर उजाला द्वारा इसका खुलासा किए जाने के बाद डीएम ने डीएचओ से निष्क्रिय समितियों की रिपोर्ट तलब की और उसके आधार पर डीएओ को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। तब जाकर कृषि विभाग की ओर से आरोपी इंतखाब उसके भाई शादाब समेत तीन लोगों के खिलाफ पांच थानों में फर्जी ढंग से दस्तावेज तैयार कर कूटरचित तरीके से उर्वरक लाइसेंस प्राप्त करने के आरोप में सितंबर माह में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।