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सपा-साइकिल नहीं, अब मुलायम और अखिलेश
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Fri, 13 Jan 2017 02:35 AM IST
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मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
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सपा में रियासत के लिए सियासत जारी है। पार्टी और सरकार के बीच घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस खींचतान के बीच सपाई साइकिल से दूर होने लगे। अब सपा साइकिल नहीं मुलायम और अखिलेश बन गई है।
समझौता नहीं होने की स्थिति में पार्टी और सरकार के प्रत्याशी के लिए मुलायम और अखिलेश ही चेहरा होंगे। इन दोनों के दम पर ही उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे। पार्टी और सिंबल की जगह इनकी तस्वीर ज्यादा चमक बिखेरेगी।
पार्टी और सरकार के बीच बढ़ती खाई को कम करने के लिए हर दिन पिता पुत्र वार्ता के दौर चल रहे हैं। सपाइयों को लगता है अब बात बन जाएंगी। लेकिन ऐन वक्त पर बनती बात बिगड़ जाती है। जिसे लेेेेकर कार्यकर्ताओं मायूसी बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि सपाई अब साइकिल की बात न कर खुद को मुलायम और अखिलेश समर्थित बता रहे हैं।
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यही पार्टी और सरकार की ओर से घोषित प्रत्याशियों का है। साइकिल का सिंबल नहीं मिलने की स्थिति को अभी से भांपने लगे हैं। प्रत्याशी भी क्षेत्र में सिंबल और पार्टी की बात नहीं करते हैं, बल्कि चुनाव में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को अपना चेहरा बताते हैं।
कहते है कि पार्टी कौन सी होगी या सिंबल क्या होगा इससे कोई फर्क नहीं बढ़ता। चुनाव में मुलायम और अखिलेश ही उनके चेहरे होंगे। इन नेताओं के दम पर ही चुनाव मैदान में जाएंगे।
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समझौता नहीं होने की स्थिति में पार्टी और सरकार के प्रत्याशी के लिए मुलायम और अखिलेश ही चेहरा होंगे। इन दोनों के दम पर ही उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे। पार्टी और सिंबल की जगह इनकी तस्वीर ज्यादा चमक बिखेरेगी।
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पार्टी और सरकार के बीच बढ़ती खाई को कम करने के लिए हर दिन पिता पुत्र वार्ता के दौर चल रहे हैं। सपाइयों को लगता है अब बात बन जाएंगी। लेकिन ऐन वक्त पर बनती बात बिगड़ जाती है। जिसे लेेेेकर कार्यकर्ताओं मायूसी बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि सपाई अब साइकिल की बात न कर खुद को मुलायम और अखिलेश समर्थित बता रहे हैं।
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यही पार्टी और सरकार की ओर से घोषित प्रत्याशियों का है। साइकिल का सिंबल नहीं मिलने की स्थिति को अभी से भांपने लगे हैं। प्रत्याशी भी क्षेत्र में सिंबल और पार्टी की बात नहीं करते हैं, बल्कि चुनाव में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को अपना चेहरा बताते हैं।
कहते है कि पार्टी कौन सी होगी या सिंबल क्या होगा इससे कोई फर्क नहीं बढ़ता। चुनाव में मुलायम और अखिलेश ही उनके चेहरे होंगे। इन नेताओं के दम पर ही चुनाव मैदान में जाएंगे।