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Moradabad News: हस्तशिल्प उत्पादों के लिए बनेंगे किफायती पैकेजिंग मानक
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मुरादाबाद। हस्तशिल्प उत्पादों की पैकेजिंग को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाने और निर्यातकों की लागत नियंत्रित रखने के लिए नए मानक विकसित किए जाएंगे। भारतीय पैकेजिंग संस्थान (आईआईपी) के साथ प्रस्तावित एमओयू को लेकर गठित समिति की ऑनलाइन बैठक में ईपीसीएच अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने उद्योग की व्यावहारिक जरूरतों के अनुसार पैकेजिंग मानक तैयार करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प उत्पादों के आकार, वजन, सामग्री और डिजाइन में काफी विविधता होती है। ऐसे में सभी उत्पादों के लिए एक समान पैकेजिंग मानक व्यावहारिक नहीं होगा।
नए मानक तकनीकी रूप से मजबूत होने के साथ एमएसएमई निर्यातकों के लिए किफायती और आसानी से अपनाए जा सकने वाले होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मानकों में वैश्विक बाजारों की बदलती पर्यावरणीय संबंधी आवश्यकताओं को भी शामिल किया जाए।
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यूरोपीय संघ के नए पैकेजिंग एंड पैकेजिंग वेस्ट रेगुलेशन (पीपीडब्ल्यूआर) जैसी शर्तों को ध्यान में रखकर पैकेजिंग विकसित करना जरूरी है, ताकि निर्यातकों को विदेशी बाजारों में दिक्कत न हो। अंतिम मानक तय करने से पहले प्रमुख हस्तशिल्प निर्यात क्लस्टरों में निर्यातकों और निर्माताओं से सुझाव लेने तथा वास्तविक परिस्थितियों में पायलट परीक्षण कराने का सुझाव भी दिया गया। इससे मानकों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
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उत्पादों की टूट-फूट रोकने और लागत घटाने में मिलेगी मदद
-बैठक में कहा गया कि वैज्ञानिक पैकेजिंग से परिवहन के दौरान हस्तशिल्प उत्पादों की टूट-फूट कम होगी। साथ ही पैकेजिंग और परिवहन लागत को नियंत्रित करने, पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने और विदेशी खरीदारों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होने की उम्मीद है।
इस दौरान वस्त्र आयुक्त एवं टेक्सटाइल्स कमेटी की उपाध्यक्ष वृंदा मनोहर देसाई, टेक्सटाइल्स कमेटी के संयुक्त निदेशक डॉ. आर. चंद्रन, ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत और एईपीसी की अपर सचिव ज्योति कौर समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए।
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उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प उत्पादों के आकार, वजन, सामग्री और डिजाइन में काफी विविधता होती है। ऐसे में सभी उत्पादों के लिए एक समान पैकेजिंग मानक व्यावहारिक नहीं होगा।
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नए मानक तकनीकी रूप से मजबूत होने के साथ एमएसएमई निर्यातकों के लिए किफायती और आसानी से अपनाए जा सकने वाले होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मानकों में वैश्विक बाजारों की बदलती पर्यावरणीय संबंधी आवश्यकताओं को भी शामिल किया जाए।
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यूरोपीय संघ के नए पैकेजिंग एंड पैकेजिंग वेस्ट रेगुलेशन (पीपीडब्ल्यूआर) जैसी शर्तों को ध्यान में रखकर पैकेजिंग विकसित करना जरूरी है, ताकि निर्यातकों को विदेशी बाजारों में दिक्कत न हो। अंतिम मानक तय करने से पहले प्रमुख हस्तशिल्प निर्यात क्लस्टरों में निर्यातकों और निर्माताओं से सुझाव लेने तथा वास्तविक परिस्थितियों में पायलट परीक्षण कराने का सुझाव भी दिया गया। इससे मानकों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
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उत्पादों की टूट-फूट रोकने और लागत घटाने में मिलेगी मदद
-बैठक में कहा गया कि वैज्ञानिक पैकेजिंग से परिवहन के दौरान हस्तशिल्प उत्पादों की टूट-फूट कम होगी। साथ ही पैकेजिंग और परिवहन लागत को नियंत्रित करने, पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने और विदेशी खरीदारों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होने की उम्मीद है।
इस दौरान वस्त्र आयुक्त एवं टेक्सटाइल्स कमेटी की उपाध्यक्ष वृंदा मनोहर देसाई, टेक्सटाइल्स कमेटी के संयुक्त निदेशक डॉ. आर. चंद्रन, ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत और एईपीसी की अपर सचिव ज्योति कौर समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए।