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24 साल पहले मां से बिछड़ा घर पहुंचा
Tue, 19 Feb 2019 12:20 AM IST
vijendra pratap
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
Published by: vijendra pratap
Updated Tue, 19 Feb 2019 12:20 AM IST
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जमील उर्फ राहुल।
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24 साल पहले मां के साथ कलीयर गया मां से बिछड़ा बच्चा घर लौट आया। 24 साल बाद मिले भाई को देख छोटे भाई की खुशी का कोई ठिकाना नही रहा। अन्य रिश्तेदार और परिजन भी खुश है। युवक को देखने वालों की घर पर भीड़ जमा है।
स्वारनगर के मोहल्ला काशीपुर निवासी हबीब शाह की पत्नी कलसूम मानसिक रूप से कमजोर थी। लगभग 24 वर्ष पहले वह अपने छह वर्षीय बेटे जमील और चार वर्षीय बेटे शकील को साथ लेकर घर से निकल गई और घूमते घूमते कलीयर शरीफ पहुंच गई थी । जहां एक दिन उसका बड़ा बेटा जमील अहमद उससे बिछड़ गया था। कई महीनों तक परिजन महिला कलसूम और बच्चों की तलाश करते रहे।फिर महिला और उसका छोटे बेटे शकील को तलाश कर घर ले आए थे। बड़ा बेटा उन्हें नही मिल सका।
बताते है कि गुम हुए बच्चे जमील को रोते देख उत्तराखंड के थाना काशीपुर के गांव बाबर खेड़ा निवासी निसंतान फूलवती पत्नी छोटे सिंह उसे अपने साथ घर ले आई और उसे अपना पुत्र मानकर उसका लालन पालन करने लगी और उसका नाम राहुल रख दिया था। फूलवती लोगों से बच्चे के मुस्लिम होने की पहचान भी छुपाती रही। 12 तक 18 साल की उम्र तक जमील उर्फ राहुल फूलवती के घर में रहा। इस दौरान फूलवती ने अपनी छह एकड़ जमीन भी उसके नाम करा दी।
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बाद में मुस्लिम समुदाय के लोगों को शक हो गया और उन्होंने इस मामले से इसरार नगर के प्रधान ताहिर चौधरी को अवगत कराया। बाद में सभी लोगों व जमील की सहमति से गांव के ही शफीक के निसंतान होने पर उसे गोद दे दिया। शफीक ने जवान होने पर उसकी शादी मुरादाबाद निवासी आबिद की बेटी रेशमा से करा दी। गुम हुआ जमील उर्फ राहुल का छोटा भाई राजमिस्त्री है। एक दिन वह टांडा निवासी शमशाद के घर काम कर रहा था कि शमशाद ने बताया कि तुम्हारी शक्ल का एक युवक बाबरखेड़ा में रहता है,तो उसने अपने भाई के गुम होने की बात बताई। शकील कुछ लोगों को साथ लेकर बाबरखेड़ा पहुंच गया और युवक से मुलाकात की ।
इस पर जमील उर्फ राहुल ने अपनी मां की नाक पर गहरा कट का निशान होने की बात भी उन्हें बताई जो सच थी लेकिन उसने उनके साथ आने से मना कर दिया।इस पर लोग मान मनोव्वल कर तीन दिन पूर्व उसे साथ ले नगर आ गए। घर पर पहुंच उसने घर में लगे पुराने बेरी के पेड़ व जिस पर अपनी बहन खातून के साथ खेलता था ।उसे पहचान लिया और अपने सभी परिजनों और रिश्तेदारों से मिला। तभी से वह अपने भाई के साथ घर मे रह रहा है जिसे देखने वालों का तांता घर पर लगा है जबकि जमील की मां कलसूम और पिता हबीब शाह की मौत हो चुकी है।
स्वारनगर के मोहल्ला काशीपुर निवासी हबीब शाह की पत्नी कलसूम मानसिक रूप से कमजोर थी। लगभग 24 वर्ष पहले वह अपने छह वर्षीय बेटे जमील और चार वर्षीय बेटे शकील को साथ लेकर घर से निकल गई और घूमते घूमते कलीयर शरीफ पहुंच गई थी । जहां एक दिन उसका बड़ा बेटा जमील अहमद उससे बिछड़ गया था। कई महीनों तक परिजन महिला कलसूम और बच्चों की तलाश करते रहे।फिर महिला और उसका छोटे बेटे शकील को तलाश कर घर ले आए थे। बड़ा बेटा उन्हें नही मिल सका।
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बताते है कि गुम हुए बच्चे जमील को रोते देख उत्तराखंड के थाना काशीपुर के गांव बाबर खेड़ा निवासी निसंतान फूलवती पत्नी छोटे सिंह उसे अपने साथ घर ले आई और उसे अपना पुत्र मानकर उसका लालन पालन करने लगी और उसका नाम राहुल रख दिया था। फूलवती लोगों से बच्चे के मुस्लिम होने की पहचान भी छुपाती रही। 12 तक 18 साल की उम्र तक जमील उर्फ राहुल फूलवती के घर में रहा। इस दौरान फूलवती ने अपनी छह एकड़ जमीन भी उसके नाम करा दी।
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बाद में मुस्लिम समुदाय के लोगों को शक हो गया और उन्होंने इस मामले से इसरार नगर के प्रधान ताहिर चौधरी को अवगत कराया। बाद में सभी लोगों व जमील की सहमति से गांव के ही शफीक के निसंतान होने पर उसे गोद दे दिया। शफीक ने जवान होने पर उसकी शादी मुरादाबाद निवासी आबिद की बेटी रेशमा से करा दी। गुम हुआ जमील उर्फ राहुल का छोटा भाई राजमिस्त्री है। एक दिन वह टांडा निवासी शमशाद के घर काम कर रहा था कि शमशाद ने बताया कि तुम्हारी शक्ल का एक युवक बाबरखेड़ा में रहता है,तो उसने अपने भाई के गुम होने की बात बताई। शकील कुछ लोगों को साथ लेकर बाबरखेड़ा पहुंच गया और युवक से मुलाकात की ।
इस पर जमील उर्फ राहुल ने अपनी मां की नाक पर गहरा कट का निशान होने की बात भी उन्हें बताई जो सच थी लेकिन उसने उनके साथ आने से मना कर दिया।इस पर लोग मान मनोव्वल कर तीन दिन पूर्व उसे साथ ले नगर आ गए। घर पर पहुंच उसने घर में लगे पुराने बेरी के पेड़ व जिस पर अपनी बहन खातून के साथ खेलता था ।उसे पहचान लिया और अपने सभी परिजनों और रिश्तेदारों से मिला। तभी से वह अपने भाई के साथ घर मे रह रहा है जिसे देखने वालों का तांता घर पर लगा है जबकि जमील की मां कलसूम और पिता हबीब शाह की मौत हो चुकी है।