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Moradabad News: गलत रस्म-ओ-रिवाज और नशाखोरी से खुद को दूर रखने की ताकीद
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अमरोहा। शहर की जामा मस्जिद के मैदान में आयोजित दो दिवसीय इज्तिमा का शुक्रवार की दोपहर समापन हो गया। इसमें मुल्क में अमन-चैन और कौम की सलामती व तरक्की की दुआ की गई। इस दौरान उलेमाओं ने गलत रस्म-ओ-रिवाज और नशाखोरी से खुद को दूर रखने की ताकीद लोगों से की। आखिरी दिन 30 जमातों की रवानगी हुई साथ ही सात जोड़ों का निकाह भी हुआ।
शुक्रवार सुबह फज्र की नमाज के बाद मुफ्ती मोहम्मद अरमान ने तकरीर की। जिंदगी को दीन के मुताबिक गुजारने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि हमारे पास जो बेहतर है वह लोगों तक पहुंचे। कहा कि मौजूदा दौर में टेक्नोलॉजी से अपनी बात को बहुत जल्द दूसरे लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। लेकिन इससे पहले नबियों को इस काम में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। अच्छी बातों को दूसरे लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्हें मीलों का सफर पैदल तय करना पड़ता था। कहा कि जमातों, मुलाकातों और इज्तिमा के जरिए इसी बात पर मेहनत की जा रही है।
निकाह के बाद और दुआ से पहले मदरसा जामिया अरबिया जामा मस्जिद के सदर मुदर्रिस एवं विख्यात आलिमेदीन मुफ्ती सैय्यद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने इज्तिमा को खिताब करते हुए उन्होंने कहा कि अल्लाह के तरीकों और कुरान की तालीम के साथ हम नबी के बताए रास्तों पर चलेंगे, दुनिया में भी कामयाबी मिलेगी। इस अमल से आखिरत में भी आसानियां होंगी। उन्होंने शादियों में फिजूलखर्ची से बचते हुए निकाह को आसान बनाने पर जोर दिया। गरीबों से हमदर्दी और मजलूम का साथ देने की बात कही। कहा कि ये ही अल्लाह का पैगाम भी है। नई नस्ल को नशा से बचाने के लिए बच्चों को शुरुआत से दीनी तालीम दिलाएं। इज्तिमा के समापन पर मुफ्ती अफ्फान मंसूरपुरी ने खुसूसी दुआ कराई तो पंडाल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
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वालंटियर ने संभाली जिम्मेदारी
इज्तिमा में लोगों की सहायता के लिए वालंटियर को जिम्मेदारी दी गई थी। वालंटियर इज्तिमा में आने वाले लोगों को सभी जानकारियां देकर निर्धारित स्थल पर भेजते रहे। बिजनौर रोड पर वालंटियर खुद ही यातायात व्यवस्था संभाल रहे थे। इज्तिमा के समापन पर उन्होंने व्यवस्था संभाली। वहीं, इस दौरान पुलिस अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे। पुलिस कर्मियों पूरी तरह सतर्क रहे।
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शुक्रवार सुबह फज्र की नमाज के बाद मुफ्ती मोहम्मद अरमान ने तकरीर की। जिंदगी को दीन के मुताबिक गुजारने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि हमारे पास जो बेहतर है वह लोगों तक पहुंचे। कहा कि मौजूदा दौर में टेक्नोलॉजी से अपनी बात को बहुत जल्द दूसरे लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। लेकिन इससे पहले नबियों को इस काम में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। अच्छी बातों को दूसरे लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्हें मीलों का सफर पैदल तय करना पड़ता था। कहा कि जमातों, मुलाकातों और इज्तिमा के जरिए इसी बात पर मेहनत की जा रही है।
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निकाह के बाद और दुआ से पहले मदरसा जामिया अरबिया जामा मस्जिद के सदर मुदर्रिस एवं विख्यात आलिमेदीन मुफ्ती सैय्यद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने इज्तिमा को खिताब करते हुए उन्होंने कहा कि अल्लाह के तरीकों और कुरान की तालीम के साथ हम नबी के बताए रास्तों पर चलेंगे, दुनिया में भी कामयाबी मिलेगी। इस अमल से आखिरत में भी आसानियां होंगी। उन्होंने शादियों में फिजूलखर्ची से बचते हुए निकाह को आसान बनाने पर जोर दिया। गरीबों से हमदर्दी और मजलूम का साथ देने की बात कही। कहा कि ये ही अल्लाह का पैगाम भी है। नई नस्ल को नशा से बचाने के लिए बच्चों को शुरुआत से दीनी तालीम दिलाएं। इज्तिमा के समापन पर मुफ्ती अफ्फान मंसूरपुरी ने खुसूसी दुआ कराई तो पंडाल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
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वालंटियर ने संभाली जिम्मेदारी
इज्तिमा में लोगों की सहायता के लिए वालंटियर को जिम्मेदारी दी गई थी। वालंटियर इज्तिमा में आने वाले लोगों को सभी जानकारियां देकर निर्धारित स्थल पर भेजते रहे। बिजनौर रोड पर वालंटियर खुद ही यातायात व्यवस्था संभाल रहे थे। इज्तिमा के समापन पर उन्होंने व्यवस्था संभाली। वहीं, इस दौरान पुलिस अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे। पुलिस कर्मियों पूरी तरह सतर्क रहे।