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Moradabad News: कार्रवाई बेअसर, तीन माह में नाम बदलकर खोल लिए सील अस्पताल
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पाकबड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने सितंबर 2024 में कई झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई कर उनके अस्पताल सील किए। तीन माह में ही ऐसी सांठगाठ हुई कि झोलाछाप फिर सक्रिय हो गए। नाम बदलकर उन्हीं स्थानों पर अस्पताल खोल लिए गए। एक बार कार्रवाई के बाद विभाग भी आंखें मूंदकर बैठ गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अधिकारी इन अस्पतालों में मौत के मामलों का इंतजार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने सील किए अस्पतालों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई किए बगैर कई मामलों में एफआर लगा दी। नतीजा रहा कि झोलाछाप फिर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने लगे हैं। इन अस्पतालों में डिलीवरी कौन करता है, ऑपरेशन कौन करता है, एनेस्थीसिया कौन देता है यह किसी को नहीं पता। बिना डिग्री वाले ठग खुद यह काम कर रहे हैं। सस्ते इलाज के चक्कर में लोग भी इनके चंगुल में फंस जाते हैं। किसी भी निजी अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी में कम से कम 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। जबकि झोलाछाप मरीजों को 15 हजार में सिजेरियन का ऑफर देते हैं। इसके कारण लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल का कहना है कि झोलाछाप अस्पतालों के खिलाफ संबंधित क्षेत्रों के एमओआईसी को जिम्मेदारी दी गई है। जिला मुख्यालय से भी लगातार चेकिंग की जा रही है। जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग ने सील किए अस्पतालों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई किए बगैर कई मामलों में एफआर लगा दी। नतीजा रहा कि झोलाछाप फिर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने लगे हैं। इन अस्पतालों में डिलीवरी कौन करता है, ऑपरेशन कौन करता है, एनेस्थीसिया कौन देता है यह किसी को नहीं पता। बिना डिग्री वाले ठग खुद यह काम कर रहे हैं। सस्ते इलाज के चक्कर में लोग भी इनके चंगुल में फंस जाते हैं। किसी भी निजी अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी में कम से कम 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। जबकि झोलाछाप मरीजों को 15 हजार में सिजेरियन का ऑफर देते हैं। इसके कारण लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल का कहना है कि झोलाछाप अस्पतालों के खिलाफ संबंधित क्षेत्रों के एमओआईसी को जिम्मेदारी दी गई है। जिला मुख्यालय से भी लगातार चेकिंग की जा रही है। जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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