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आईएमए की एनुअल सीएमई में डाक्टर हुए अपडेट
Moradabad
Updated Mon, 24 Feb 2014 05:30 AM IST
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मुरादाबाद। खराब आर्थिक स्थिति और बच्चे के प्रति मां का प्यार दुनिया के लोगों को भारत के प्रति आकर्षित कर रहा है। इसी का नतीजा है कि पचास देशों के लोग सरोगेसी के लिए भारत को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुनिया में भारत सरोगेसी कैपिटल के रूप में उभरा है। ये दावा है सरोगेसी सेंटर ऑफ इंडिया (एससीआई ) की डायरेक्टर डा. शिवानी सचदेव गौर का। वे आईएमए की एनुअल सीएमई में बोल रही थीं। सीएमई में 11 विशेषज्ञों ने विभिन्न बीमारियों की आधुनिकतम तकनीक पर चर्चा की। साथ ही आईएमए मुरादाबाद की एनुअल सोवेनियर व वेबसाइट का भी उद्घाटन किया गया।
दिल्ली रोड स्थित होटल हॉली डे रीजेंसी में आयोजित सीएमई में ‘बर्निंग इश्यू इन सरोगेसी’ पर बोलते हुए डा. गौर ने कहा कि दूसरे देशों में सरोगेसी के लिए महिलाएं ढूंढने से नहीं मिलती हैं लेकिन हमारे देश में काफी संख्या में महिलाएं इसके लिए उत्सुक रहती हैं। उन्होंने बताया कि वे साढ़े सात सौ से ज्यादा सरोगेसी प्लान करा चुकी हैं। पहले इसमें महिलाओं का शोषण होता था, लेकिन अब सबकुछ प्लानिंग से होता है। इसके लिए महिलाओं के तमाम टेस्ट कराए जाते हैं।
इससे पहले आईएमए के स्टेट प्रेसीडेंट डा. रवि मेहरा, प्रेसीडेंट इलेक्ट डा. शरद अग्रवाल, सेक्रेटरी डा. संजय जैन, ब्रांच प्रेसीडेंट डा. अर्चना अग्रवाल, सेक्रेटरी डा. बबिता गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस बार एनुअल सीएमई की थीम ‘डिस्कवरिंग न्यू होरिजॉन्स इन पेशेंट केेयर’ रहा। इसमें फोर्टिस नोएडा के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डा. विपिन मिश्रा, आर्थोपेडिक्स सर्जन डा. अतुल मिश्रा, मैक्स सुपरस्पेशिलिटी साकेत के कार्डियोलाजिस्ट डा. रजनीश मलहोत्रा, डा. विवेका कुमार, मेदांता गुड़गांव के मनोचिकित्सक डा. विपुल रस्तोगी, इंद्रप्रस्थ अपोलोे के किडनी रोग विशेषज्ञ डा. डीके अग्रवाल, मेट्रो नोएडा के चेस्ट फिजीशियन डा. दीपक तलवार, एसआईसी डायरेक्टर डा. शिवानी गौर, मुुंबई के डा. सौरभ आर्या, बरेली के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. रवि खन्ना, बीएल कपूर हास्पिटल के न्यूरो सर्जन डा. विकास गुप्ता ने डाक्टरों को अपडेट किया। आयोजन समिति अध्यक्ष डा. विजय अग्रवाल, सचिव डा. अर्चना अग्रवाल ने सभी का धन्यवाद किया।
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इस मौके पर एएमएस के नेशनल चेयरमैन डा. एसके राज, सीजीपी स्टेट डायरेक्टर राजेश सिंह, डा. विनय गुप्ता, डा. नीरज गुप्ता, डा. जेपी टंडन, डा. अनुराग अग्रवाल, डा. संजय शाह, डा. मनोज सक्सेना, डा. बीके दत्ता, डा. जेके अग्रवाल, डा. आरबी सिंह, डा. दिव्या गोयल समेत बड़ी संख्या में डाक्टर मौजूद रहे।
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प्री-मेच्योर बच्चों के लिए 24 घंटे महत्वपूर्ण
बरेली के सीनियर चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. रवि खन्ना ने बताया कि प्री-मेच्योर बच्चों को चौबीस घंटे में जरूरी दवाएं दी जानी चाहिए। इसके बाद बच्चों के लिए ये दवाएं बेकार हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की नब्ज से उनके अंदर की हलचल को घर में भी पहचाना जा सकता है। सांस, कराहने व शरीर के किसी भी हिस्से में स्पॉट को गंभीरता से लें।
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वायरलैस पेसमेकर बनाएगा जिंदगी को आसान
मैक्स हास्पिटल, दिल्ली के डा. रजनीश मलहोत्रा ने बताया कि अब दिल में वायरलैस पेसमेकर से जिंदगी की राह आसान होगी। उन्होंने बताया कि अभी यूएसए में इसका प्रयोग शुरू हो गया है। अगले छह महीनों में ये तकनीक भारत में भी शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल के रोगियों के लिए निमोनिया खतरनाक है। हार्ट फेल्योर की स्टेज में ईसीएमओ तकनीक ज्यादा कारगर है। इससे कार्डिएक सर्जरी आसान हो जाएगी।
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कंपाउंडर भी करेगा हार्ट का इलाज
मैक्स हेल्थकेयर के कार्डियोलाजिस्ट डा. विवेका कुमार ने बताया हार्ट अटैक की स्थिति में सबसे पहले खून पतला करने की दवाएं दी जानी चाहिए। । उन्होंने कहा कि अब ऐसा साफ्वेयर विकसित किया जा रहा है। जिससे ईसीजी रिपोर्ट ऑनलाइन होने पर मरीज को दी जाने वाली दवा के बारे में बताया जा सकेगा। इससे छोटे अस्पतालों में भी विशेषज्ञ सुविधा मिल सकेगी।
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पेन किलर व प्रोटीन किडनी के दुश्मन
इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल के नेफ्रोलोजिस्ट डा. डीके अग्रवाल का कहना है कि बदलती लाइफ स्टाइल से किडनी रोग ज्यादा बढ़ा है। डायबिटीज सबसे बड़ा किडनी को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पेन किलर का उपयोग किडनी को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि यदि किडनी रोग बढ़ जाए तो प्रोटीन व नमक का सेवन कम करना चाहिए।
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दिमागी कसरत करें तो कम होगी भूलने की बीमारी
मेदांता हास्पिटल, गुड़गांव के मनोचिकित्सक डा. विपुल अग्रवाल ने बताया भूलने की बीमारी (डिमेनशिया) का प्रतिशत लगातार बढ़ता जा रहा है। खासकर बुजुर्गों में ये बीमारी इसलिए बढ़ती है क्योंकि वे दिमाग का उपयोग कम करने लगते हैं। योग, सुडोक, जोड़-घटाने वाली एक्टिविटी के उपयोग से ये बीमारी कम होती है।
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आयोडीन की कमी रोकती है बच्चे का बौद्धिक विकास
फोर्टिस हास्पिटल नोएडा के डा. विपिन मिश्रा ने बताया कि यदि गर्भ के वक्त महिला को थायरायड की शिकायत हो या फिर आयोडीन की कमी हो तो इसका असर बच्चे के बौद्धिक विकास पर पड़ता है। गर्भवती के शरीर में सूजन थायरायड का प्राथमिक लक्षण है। टीएसएच के आधुनिक ट्रीटमेंट से इसको कंट्रोल किया जा सकता है।
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वैक्सीन बचाएगी मेनेनजाइटिस से
मुंबई से आए डा. सौरभ आर्या ने बताया कि समूह में रहने वालों में दिमागी बुखार की संभावनाएं ज्यादा रहती है। हॉस्टल, श्रमिकों की बस्ती में ये रोग तेजी से फैलता है। दिल्ली व आसपास के इलाकों और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ये रोग ज्यादा होता है। अब इसकी रोकथाम के लिए वैक्सीन इजाद हो गई है। दो से पचपन वर्ष तक के बीच कभी भी ये वैक्सीन लगवाई जा सकती है।
दिल्ली रोड स्थित होटल हॉली डे रीजेंसी में आयोजित सीएमई में ‘बर्निंग इश्यू इन सरोगेसी’ पर बोलते हुए डा. गौर ने कहा कि दूसरे देशों में सरोगेसी के लिए महिलाएं ढूंढने से नहीं मिलती हैं लेकिन हमारे देश में काफी संख्या में महिलाएं इसके लिए उत्सुक रहती हैं। उन्होंने बताया कि वे साढ़े सात सौ से ज्यादा सरोगेसी प्लान करा चुकी हैं। पहले इसमें महिलाओं का शोषण होता था, लेकिन अब सबकुछ प्लानिंग से होता है। इसके लिए महिलाओं के तमाम टेस्ट कराए जाते हैं।
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इससे पहले आईएमए के स्टेट प्रेसीडेंट डा. रवि मेहरा, प्रेसीडेंट इलेक्ट डा. शरद अग्रवाल, सेक्रेटरी डा. संजय जैन, ब्रांच प्रेसीडेंट डा. अर्चना अग्रवाल, सेक्रेटरी डा. बबिता गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस बार एनुअल सीएमई की थीम ‘डिस्कवरिंग न्यू होरिजॉन्स इन पेशेंट केेयर’ रहा। इसमें फोर्टिस नोएडा के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डा. विपिन मिश्रा, आर्थोपेडिक्स सर्जन डा. अतुल मिश्रा, मैक्स सुपरस्पेशिलिटी साकेत के कार्डियोलाजिस्ट डा. रजनीश मलहोत्रा, डा. विवेका कुमार, मेदांता गुड़गांव के मनोचिकित्सक डा. विपुल रस्तोगी, इंद्रप्रस्थ अपोलोे के किडनी रोग विशेषज्ञ डा. डीके अग्रवाल, मेट्रो नोएडा के चेस्ट फिजीशियन डा. दीपक तलवार, एसआईसी डायरेक्टर डा. शिवानी गौर, मुुंबई के डा. सौरभ आर्या, बरेली के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. रवि खन्ना, बीएल कपूर हास्पिटल के न्यूरो सर्जन डा. विकास गुप्ता ने डाक्टरों को अपडेट किया। आयोजन समिति अध्यक्ष डा. विजय अग्रवाल, सचिव डा. अर्चना अग्रवाल ने सभी का धन्यवाद किया।
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इस मौके पर एएमएस के नेशनल चेयरमैन डा. एसके राज, सीजीपी स्टेट डायरेक्टर राजेश सिंह, डा. विनय गुप्ता, डा. नीरज गुप्ता, डा. जेपी टंडन, डा. अनुराग अग्रवाल, डा. संजय शाह, डा. मनोज सक्सेना, डा. बीके दत्ता, डा. जेके अग्रवाल, डा. आरबी सिंह, डा. दिव्या गोयल समेत बड़ी संख्या में डाक्टर मौजूद रहे।
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प्री-मेच्योर बच्चों के लिए 24 घंटे महत्वपूर्ण
बरेली के सीनियर चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. रवि खन्ना ने बताया कि प्री-मेच्योर बच्चों को चौबीस घंटे में जरूरी दवाएं दी जानी चाहिए। इसके बाद बच्चों के लिए ये दवाएं बेकार हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की नब्ज से उनके अंदर की हलचल को घर में भी पहचाना जा सकता है। सांस, कराहने व शरीर के किसी भी हिस्से में स्पॉट को गंभीरता से लें।
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वायरलैस पेसमेकर बनाएगा जिंदगी को आसान
मैक्स हास्पिटल, दिल्ली के डा. रजनीश मलहोत्रा ने बताया कि अब दिल में वायरलैस पेसमेकर से जिंदगी की राह आसान होगी। उन्होंने बताया कि अभी यूएसए में इसका प्रयोग शुरू हो गया है। अगले छह महीनों में ये तकनीक भारत में भी शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल के रोगियों के लिए निमोनिया खतरनाक है। हार्ट फेल्योर की स्टेज में ईसीएमओ तकनीक ज्यादा कारगर है। इससे कार्डिएक सर्जरी आसान हो जाएगी।
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कंपाउंडर भी करेगा हार्ट का इलाज
मैक्स हेल्थकेयर के कार्डियोलाजिस्ट डा. विवेका कुमार ने बताया हार्ट अटैक की स्थिति में सबसे पहले खून पतला करने की दवाएं दी जानी चाहिए। । उन्होंने कहा कि अब ऐसा साफ्वेयर विकसित किया जा रहा है। जिससे ईसीजी रिपोर्ट ऑनलाइन होने पर मरीज को दी जाने वाली दवा के बारे में बताया जा सकेगा। इससे छोटे अस्पतालों में भी विशेषज्ञ सुविधा मिल सकेगी।
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पेन किलर व प्रोटीन किडनी के दुश्मन
इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल के नेफ्रोलोजिस्ट डा. डीके अग्रवाल का कहना है कि बदलती लाइफ स्टाइल से किडनी रोग ज्यादा बढ़ा है। डायबिटीज सबसे बड़ा किडनी को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पेन किलर का उपयोग किडनी को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि यदि किडनी रोग बढ़ जाए तो प्रोटीन व नमक का सेवन कम करना चाहिए।
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दिमागी कसरत करें तो कम होगी भूलने की बीमारी
मेदांता हास्पिटल, गुड़गांव के मनोचिकित्सक डा. विपुल अग्रवाल ने बताया भूलने की बीमारी (डिमेनशिया) का प्रतिशत लगातार बढ़ता जा रहा है। खासकर बुजुर्गों में ये बीमारी इसलिए बढ़ती है क्योंकि वे दिमाग का उपयोग कम करने लगते हैं। योग, सुडोक, जोड़-घटाने वाली एक्टिविटी के उपयोग से ये बीमारी कम होती है।
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आयोडीन की कमी रोकती है बच्चे का बौद्धिक विकास
फोर्टिस हास्पिटल नोएडा के डा. विपिन मिश्रा ने बताया कि यदि गर्भ के वक्त महिला को थायरायड की शिकायत हो या फिर आयोडीन की कमी हो तो इसका असर बच्चे के बौद्धिक विकास पर पड़ता है। गर्भवती के शरीर में सूजन थायरायड का प्राथमिक लक्षण है। टीएसएच के आधुनिक ट्रीटमेंट से इसको कंट्रोल किया जा सकता है।
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वैक्सीन बचाएगी मेनेनजाइटिस से
मुंबई से आए डा. सौरभ आर्या ने बताया कि समूह में रहने वालों में दिमागी बुखार की संभावनाएं ज्यादा रहती है। हॉस्टल, श्रमिकों की बस्ती में ये रोग तेजी से फैलता है। दिल्ली व आसपास के इलाकों और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ये रोग ज्यादा होता है। अब इसकी रोकथाम के लिए वैक्सीन इजाद हो गई है। दो से पचपन वर्ष तक के बीच कभी भी ये वैक्सीन लगवाई जा सकती है।