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बीच सड़क पर पस्त हो रहे ‘तेंदुए’
Moradabad
Updated Mon, 25 Nov 2013 05:45 AM IST
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मुरादाबाद। बदमाशों और चोर, लुटेरों को रोकने के लिए तैयार किए गए पुलिस के तेंदुए (लैपर्ड) अब फुर्तीले नहीं रहे। आए दिन बीच रास्तों पर खस्ताहाल बाइकें जवाब दे जाती हैं और सिपाही बाइक पर किक मारते नजर आते हैं। शहर में ‘टाइगर’ की सेना का पिछले काफी समय से यही हाल है। चौराहों पर मौजूद मैकेनिक ही उनका जुगाड़ से काम चला रहे हैं तो नई बाइकों के इंतजार में धीरे-धीरे पूरा साल गुजरा जा रहा है।
पिछले दिनों आए एडीजी कानून व्यवस्था ने भी अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सिपाहियों को मजबूत बनाने की बात कही थी। उन्होंने बीट कांस्टेबिल की जिम्मेदारी तय करने और गश्त का सिस्टम दुरुस्त करने को कहा था। लेकिन अफसर अब तक उनके निर्देशों पर अमल नहीं करा पाए। हालातों पर नजर डालें तो जिले में इन दिनों 70 में से 22 लैपर्ड के सिपाही पैदल घूम रहे हैं। खस्ताहाल बाइकों के मेटिनेंस के लिए एमटी सेक्शन बना है। लेकिन सिपाही चौराहों के मैकेनिक से बाइक ठीक कराते देखे जाते हैं। वजह एमटी सेक्शन में बाइक डालने के बाद 15-20 दिन तक वापस नहीं आती।
बता दें कि शासन की ओर से जिले की 16 बाइकों की नीलामी करा दी गई थी। तब से नई बाइकें नहीं आ पाईं। अफसर भी पैदल चल रहे सिपाहियों से कुछ कह नहीं पा रहे।
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जिले में क्षेत्रफल और आबादी के अनुसार बाइकें नहीं हैं। जिन बाइकों की नीलामी हुई। उनके सापेक्ष अधिक बाइकें मंगाने का प्रस्ताव भेजा गया था। कुछ सिपाही अपनी निजी बाइकों से गश्त कर रहे हैं। -- आशुतोष कुमार, एसएसपी
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एमटी सेक्शन में महीनों पड़ी रहते वाहन
पुलिस लाइन के एमटी सेक्शन में खराब वाहनों को ठीक कराने का नियम है। लेकिन एक बार एमटी सेक्शन में वाहन पहुंचता है तो फिर वह काफी दिनों के बाद ही वापस किया जाता है। वजह एमटी सेक्शन में भी कर्मचारियों की कमी होने से काम का दबाव रहता है। बाइक की सर्विस करने में ही दो से तीन दिन रहते हैं। इसकी वजह से थानेदार और सिपाही अपनी बाइकें बाहर ही ठीक करा लेते हैं। लेकिन लोकल पार्ट्स और इंजन आयल होने से वाहनों में भी खराबी आने लगती है।
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पिछले दिनों आए एडीजी कानून व्यवस्था ने भी अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सिपाहियों को मजबूत बनाने की बात कही थी। उन्होंने बीट कांस्टेबिल की जिम्मेदारी तय करने और गश्त का सिस्टम दुरुस्त करने को कहा था। लेकिन अफसर अब तक उनके निर्देशों पर अमल नहीं करा पाए। हालातों पर नजर डालें तो जिले में इन दिनों 70 में से 22 लैपर्ड के सिपाही पैदल घूम रहे हैं। खस्ताहाल बाइकों के मेटिनेंस के लिए एमटी सेक्शन बना है। लेकिन सिपाही चौराहों के मैकेनिक से बाइक ठीक कराते देखे जाते हैं। वजह एमटी सेक्शन में बाइक डालने के बाद 15-20 दिन तक वापस नहीं आती।
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बता दें कि शासन की ओर से जिले की 16 बाइकों की नीलामी करा दी गई थी। तब से नई बाइकें नहीं आ पाईं। अफसर भी पैदल चल रहे सिपाहियों से कुछ कह नहीं पा रहे।
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जिले में क्षेत्रफल और आबादी के अनुसार बाइकें नहीं हैं। जिन बाइकों की नीलामी हुई। उनके सापेक्ष अधिक बाइकें मंगाने का प्रस्ताव भेजा गया था। कुछ सिपाही अपनी निजी बाइकों से गश्त कर रहे हैं। -- आशुतोष कुमार, एसएसपी
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एमटी सेक्शन में महीनों पड़ी रहते वाहन
पुलिस लाइन के एमटी सेक्शन में खराब वाहनों को ठीक कराने का नियम है। लेकिन एक बार एमटी सेक्शन में वाहन पहुंचता है तो फिर वह काफी दिनों के बाद ही वापस किया जाता है। वजह एमटी सेक्शन में भी कर्मचारियों की कमी होने से काम का दबाव रहता है। बाइक की सर्विस करने में ही दो से तीन दिन रहते हैं। इसकी वजह से थानेदार और सिपाही अपनी बाइकें बाहर ही ठीक करा लेते हैं। लेकिन लोकल पार्ट्स और इंजन आयल होने से वाहनों में भी खराबी आने लगती है।
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