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Moradabad News: 92 स्कूल और 1200 शिक्षक... सम्मान के लिए आवेदन शून्य
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मुरादाबाद। जिले के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों ने राज्य और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए रुचि नहीं दिखाई है। स्थिति यह है कि पूरे जिले में एक भी शिक्षक ने इस पुरस्कार के लिए आवेदन नहीं किया है। डीआईओएस का कहना है कि सभी विद्यालयों में आवेदन के निर्देश दिए गए थे।
जिले में राजकीय और अशासकीय विद्यालयों की संख्या 92 है। इनमें लगभग 1200 शिक्षक कार्यरत हैं। शासन की ओर से राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन मांगे गए थे। आवेदन करने की अंतिम तारीख 15 अक्तूबर थी। जनपद स्तरीय समिति द्वारा प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं स्थलीय सत्यापन कर पात्र अध्यापकों का चयन कर मंडलीय समिति को प्रस्ताव 30 अक्तूबर तक भेजा जाना था।
मंडलीय समिति द्वारा पात्र अध्यापकों का चयन कर निदेशालय स्तरीय चयन समिति को ऑनलाइन भेजने की अंतिम तारीख 14 नवंबर है। चयनित शिक्षकों को 14 दिसंबर के बाद सम्मानित किया जाएगा।
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मंडल से सिर्फ तीन आवेदन
मुरादाबाद ही नहीं, बल्कि संभल जनपद से भी किसी शिक्षक ने आवेदन नहीं किया है। संयुक्त निदेशक द्वादश मंडल मनोज कुमार द्विवेदी का कहना है कि पूरे मंडल से सिर्फ तीन शिक्षकों के ही आवेदन आए हैं। इनमें अमरोहा, रामपुर और बिजनौर जनपद से एक-एक शिक्षक का आवेदन है। इन आवेदनों का सत्यापन करने के बाद 14 नवंबर तक निदेशालय भेजा जाएगा।
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पिछले साल हुए थे तीन आवेदन
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्ष मुरादाबाद जनपद से तीन शिक्षकों ने पुरस्कार के लिए आवेदन किया था। जनपद स्तरीय समिति के सत्यापन में दो आवेदन निरस्त हो गए थे, जबकि एक आवेदन का चयन कर मंडल स्तरीय समिति के लिए भेजा गया था। हालांकि, प्रदेश स्तर पर पुरस्कार के लिए शिक्षक का चयन नहीं हो सका था।
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15 सितंबर से आवेदन शुरू हो गए थे, लेकिन इसकी जानकारी करीब 30 सितंबर के आसपास मिली थी। प्रचार-प्रसार का अभाव होने की वजह से शिक्षक अपना आवेदन पत्र तैयार नहीं कर पाए। पहले भी शिक्षकों के कार्यों को साक्ष्यों सहित ही मांगा जाता था। इस बार अक्तूबर की शुरुआत अर्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई थीं। हमने आवेदन के समय को बढ़ाने की मांग की है। - विमलेंद्र शर्मा, प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य, माध्यमिक शिक्षक संघ चेतनारायण गुट
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आवेदन के समय शिक्षक द्वारा किए गए कार्यों को साक्ष्यों सहित चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। नए नियम के अनुसार मौखिक बताना मान्य नहीं है। हमने आवेदन के लिए स्कूलों में पत्र भेजने के अलावा विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया था। सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक कर आवेदन न होने के कारण की समीक्षा की जाएगी।
डॉ. अरुण कुमार दुबे, जिला विद्यालय निरीक्षक
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जिले में राजकीय और अशासकीय विद्यालयों की संख्या 92 है। इनमें लगभग 1200 शिक्षक कार्यरत हैं। शासन की ओर से राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन मांगे गए थे। आवेदन करने की अंतिम तारीख 15 अक्तूबर थी। जनपद स्तरीय समिति द्वारा प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं स्थलीय सत्यापन कर पात्र अध्यापकों का चयन कर मंडलीय समिति को प्रस्ताव 30 अक्तूबर तक भेजा जाना था।
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मंडलीय समिति द्वारा पात्र अध्यापकों का चयन कर निदेशालय स्तरीय चयन समिति को ऑनलाइन भेजने की अंतिम तारीख 14 नवंबर है। चयनित शिक्षकों को 14 दिसंबर के बाद सम्मानित किया जाएगा।
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मंडल से सिर्फ तीन आवेदन
मुरादाबाद ही नहीं, बल्कि संभल जनपद से भी किसी शिक्षक ने आवेदन नहीं किया है। संयुक्त निदेशक द्वादश मंडल मनोज कुमार द्विवेदी का कहना है कि पूरे मंडल से सिर्फ तीन शिक्षकों के ही आवेदन आए हैं। इनमें अमरोहा, रामपुर और बिजनौर जनपद से एक-एक शिक्षक का आवेदन है। इन आवेदनों का सत्यापन करने के बाद 14 नवंबर तक निदेशालय भेजा जाएगा।
पिछले साल हुए थे तीन आवेदन
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्ष मुरादाबाद जनपद से तीन शिक्षकों ने पुरस्कार के लिए आवेदन किया था। जनपद स्तरीय समिति के सत्यापन में दो आवेदन निरस्त हो गए थे, जबकि एक आवेदन का चयन कर मंडल स्तरीय समिति के लिए भेजा गया था। हालांकि, प्रदेश स्तर पर पुरस्कार के लिए शिक्षक का चयन नहीं हो सका था।
15 सितंबर से आवेदन शुरू हो गए थे, लेकिन इसकी जानकारी करीब 30 सितंबर के आसपास मिली थी। प्रचार-प्रसार का अभाव होने की वजह से शिक्षक अपना आवेदन पत्र तैयार नहीं कर पाए। पहले भी शिक्षकों के कार्यों को साक्ष्यों सहित ही मांगा जाता था। इस बार अक्तूबर की शुरुआत अर्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई थीं। हमने आवेदन के समय को बढ़ाने की मांग की है। - विमलेंद्र शर्मा, प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य, माध्यमिक शिक्षक संघ चेतनारायण गुट
आवेदन के समय शिक्षक द्वारा किए गए कार्यों को साक्ष्यों सहित चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। नए नियम के अनुसार मौखिक बताना मान्य नहीं है। हमने आवेदन के लिए स्कूलों में पत्र भेजने के अलावा विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया था। सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक कर आवेदन न होने के कारण की समीक्षा की जाएगी।
डॉ. अरुण कुमार दुबे, जिला विद्यालय निरीक्षक