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अंधेरे में अस्पताल, बरामदे में पर्चे और टार्च की रोशन पर ओपीडी
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मुरादाबाद।
सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं का इससे बुरा हाल क्या होगा टाउन हॉल स्थित नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की तीन महीने से बिजली कटी है। दोनों ही अस्पताल अंधेरे में चल रहे हैं। वार्ड भूत बंगले से कम नहीं है। बरामदे में ओपीडी के पर्चे तो टार्च की रोशनी में डाक्टर मरीज देखने को मजबूर हैं। एडी हेल्थ का कहना है कि सीएचसी और पीएचसी से उनका कोई लेना देना नहीं है।
आयुर्वेदिक अस्पताल और नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक ही परिसर में हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल में रोजाना करीब तीन सौ मरीजों की ओपीडी है। स्वास्थ्य केंद्र में 60 से 70 मरीज पहुंचते हैं। अधिकतर ओपीडी बच्चों और महिलाओं की है। आयुर्वेदिक अस्पताल में 15 बेड और प्राथमिक में चार बेड स्वीकृत हैं। दोनों अस्पतालों में आज तक बिजली कनेक्शन नहीं हैं। अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय से कटिया डालकर जुगाड़ से दोनों ही अस्पतालों में बिजली जल रही थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की डा. रेशमा के मुताबिक अपर निदेशक कार्यालय ने तीन महीने पहले दोनों ही अस्पतालों की बत्ती गुल कर दी गई। तब से अस्पताल अंधेरे में चल रहे हैं।
आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन बाबा आदम के जमाने का बना है। कमरों में घुप अंधेरा है। डाक्टर, स्टाफ और मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अस्पताल में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. सुमन रानी और डाक्टर प्रभात रंजन की तैनाती है। डाक्टर टार्च की रोशनी में मरीजों को देखते हैं। स्टाफ कर्मी अस्पताल के बाहर बरामदे में ओपीडी के पर्चे तैयार करते हैं। दवाखाने में जैसे तैसे दवाओं की पुड़िया तैयार होती है। यही हाल नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। अस्पताल में बच्चों का टीकाकरण से लेकर परिवार नियोजन में महिलाओं को कॉपर टी लगाई जाती है। सामान्य मरीजों की भीड़ उमड़ती है। अस्पताल में एकमात्र नियमित डा. रेशमा और एक फार्मेसिस्ट की तैनाती है। बिजली नहीं होने से अस्पताल में पानी की सबसे अधिक परेशानी है। लैब, अस्पताल की सफाई और चिकित्सा उपकरणों की धुलाई के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर आंखें मूंदे हैं।
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- बिजली नहीं होने से मरीजों और स्टाफ को परेशानी हो रही है। टार्च की रोशनी में ओपीडी चलाई जा रही है। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। - डा. प्रभात रंजन, आयुर्वेदिक अस्पताल
- अपर निदेशक कार्यालय से कनेक्शन कटने के बाद प्राथमिक उपचार के लिए मरीज भर्ती नहीं हो पा रहे हैं। चिकित्सा औजारों की गर्म पानी से धुलाई नहीं हो पा रही है। कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। - डा. रेशमा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- मैं सीएमओ और सीएमओ को कंट्रोल करता हूं। सीएचसी और पीएचसी से मेरा क्या लेना देना। कोई बड़ी घटना हो जाए तो ठीक है जा दूंगा। बिजली नहीं है तो सीएमओ जाने। उन्हें भुगतान करना है। - डा. सत्य सिंह, अपर निदेशक स्वास्थ्य
- बिजली के बिल तो लगातार निकल रहे हैं। फिर भी मैं एक बार डा. प्रेमी से पूछकर बताऊंगी। - डा. विनीता अग्निहोत्री, सीएमओ
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सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं का इससे बुरा हाल क्या होगा टाउन हॉल स्थित नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की तीन महीने से बिजली कटी है। दोनों ही अस्पताल अंधेरे में चल रहे हैं। वार्ड भूत बंगले से कम नहीं है। बरामदे में ओपीडी के पर्चे तो टार्च की रोशनी में डाक्टर मरीज देखने को मजबूर हैं। एडी हेल्थ का कहना है कि सीएचसी और पीएचसी से उनका कोई लेना देना नहीं है।
आयुर्वेदिक अस्पताल और नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक ही परिसर में हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल में रोजाना करीब तीन सौ मरीजों की ओपीडी है। स्वास्थ्य केंद्र में 60 से 70 मरीज पहुंचते हैं। अधिकतर ओपीडी बच्चों और महिलाओं की है। आयुर्वेदिक अस्पताल में 15 बेड और प्राथमिक में चार बेड स्वीकृत हैं। दोनों अस्पतालों में आज तक बिजली कनेक्शन नहीं हैं। अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय से कटिया डालकर जुगाड़ से दोनों ही अस्पतालों में बिजली जल रही थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की डा. रेशमा के मुताबिक अपर निदेशक कार्यालय ने तीन महीने पहले दोनों ही अस्पतालों की बत्ती गुल कर दी गई। तब से अस्पताल अंधेरे में चल रहे हैं।
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आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन बाबा आदम के जमाने का बना है। कमरों में घुप अंधेरा है। डाक्टर, स्टाफ और मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अस्पताल में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. सुमन रानी और डाक्टर प्रभात रंजन की तैनाती है। डाक्टर टार्च की रोशनी में मरीजों को देखते हैं। स्टाफ कर्मी अस्पताल के बाहर बरामदे में ओपीडी के पर्चे तैयार करते हैं। दवाखाने में जैसे तैसे दवाओं की पुड़िया तैयार होती है। यही हाल नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। अस्पताल में बच्चों का टीकाकरण से लेकर परिवार नियोजन में महिलाओं को कॉपर टी लगाई जाती है। सामान्य मरीजों की भीड़ उमड़ती है। अस्पताल में एकमात्र नियमित डा. रेशमा और एक फार्मेसिस्ट की तैनाती है। बिजली नहीं होने से अस्पताल में पानी की सबसे अधिक परेशानी है। लैब, अस्पताल की सफाई और चिकित्सा उपकरणों की धुलाई के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर आंखें मूंदे हैं।
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- बिजली नहीं होने से मरीजों और स्टाफ को परेशानी हो रही है। टार्च की रोशनी में ओपीडी चलाई जा रही है। बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। - डा. प्रभात रंजन, आयुर्वेदिक अस्पताल
- अपर निदेशक कार्यालय से कनेक्शन कटने के बाद प्राथमिक उपचार के लिए मरीज भर्ती नहीं हो पा रहे हैं। चिकित्सा औजारों की गर्म पानी से धुलाई नहीं हो पा रही है। कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। - डा. रेशमा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- मैं सीएमओ और सीएमओ को कंट्रोल करता हूं। सीएचसी और पीएचसी से मेरा क्या लेना देना। कोई बड़ी घटना हो जाए तो ठीक है जा दूंगा। बिजली नहीं है तो सीएमओ जाने। उन्हें भुगतान करना है। - डा. सत्य सिंह, अपर निदेशक स्वास्थ्य
- बिजली के बिल तो लगातार निकल रहे हैं। फिर भी मैं एक बार डा. प्रेमी से पूछकर बताऊंगी। - डा. विनीता अग्निहोत्री, सीएमओ