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गंदगी और कीचड़ में निभाई गंगा स्नान की औपचारिकता
Updated Sat, 24 Nov 2018 02:31 AM IST
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मुरादाबाद।
गंगा स्नान पर भी रामगंगा और गांगन नदियों में भी लोगों को पानी गंदा जल ही मिला। इससे गंदगी और कीचड़ की भरमार रही। प्रशासन ने नदियों के स्नान घाट भी साफ नहीं कराए थे, जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। गंदगी में गंगा स्नान औपचारिकता निभाने और पूजन तक ही सीमित रहा। लोग गंदगी के चलते स्नान की हिम्मत नहीं जुटा सके।
गांगन और रामगंगा नदियों में भी स्नान की पौराणिक मान्यता रही है। मात्र दो दशक पहले तक लोग इन नदियों के साफ पानी में डुबकी लगाते थे। पानी की कमी और अतिक्रमण के चलते ये दोनों नदियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। गांगन नदी लगभग खत्म हो गई है, जबकि रामगंगा अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत है। आस्था के चलते शुक्रवार को गंगा स्नान के मौके पर दोनों नदियों के किनारे सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी। गांगन में नाम मात्र का नालों का पानी ही पहुंच रहा था। लोगों ने नदी के किनारे पूजन किया और बच्चों का मुंडन कराकर कथा कराई। गंदगी के चलते लोग बच्चों को स्नान कराने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। बच्चों को पानी का स्पर्श कराकर स्नान की औपचारिकता निभाई।
रामगंगा किनारे स्नान करने को लोगों की भीड़ जुटी। प्रशासन ने महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए व्यवस्था भी कराई थी, लेकिन स्नान घाटों की सफाई नहीं कराई गई। घाटों पर फैली गंदगी के साथ ही दो फीट भी पानी नहीं था। इसमें स्नान करना संभव ही नहीं था। गंदे पानी में पहुंचकर लोग सूर्य को अर्घ्य देकर और गंगा पूजन कर प्रसाद चढ़ाकर ही औपचारिकता निभाई। कुछ बच्चों ने जरूर उथले पानी में उछल-कूद की। बच्चों का मुंडन कराया गया। हवन-कथा व गंगा पूजन किया गया। गंगा में फूल-प्रसाद चढ़ाया गया। ज्यादातर लोगों ने नदी किनारे बैठकर पूजन किया और जल स्पर्श पर हाथ जोड़ लिए। सिंचाई विभाग ने 500 क्यूसेक पानी छोड़ने का दावा किया था, लेकिन स्नान पर्व पर वह नाकाफी रहा। इस मौके पर नदी किनारे कलाकारों ने लोगों को आध्यात्मिक रस से सराबोर किया। इस मौके पर लोग साफ पानी की तलाश में लकड़ी के पुल से रामगंगा के दूसरे किनारे पर भी आते-जाते रहे।
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गंगा स्नान पर भी रामगंगा और गांगन नदियों में भी लोगों को पानी गंदा जल ही मिला। इससे गंदगी और कीचड़ की भरमार रही। प्रशासन ने नदियों के स्नान घाट भी साफ नहीं कराए थे, जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। गंदगी में गंगा स्नान औपचारिकता निभाने और पूजन तक ही सीमित रहा। लोग गंदगी के चलते स्नान की हिम्मत नहीं जुटा सके।
गांगन और रामगंगा नदियों में भी स्नान की पौराणिक मान्यता रही है। मात्र दो दशक पहले तक लोग इन नदियों के साफ पानी में डुबकी लगाते थे। पानी की कमी और अतिक्रमण के चलते ये दोनों नदियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। गांगन नदी लगभग खत्म हो गई है, जबकि रामगंगा अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत है। आस्था के चलते शुक्रवार को गंगा स्नान के मौके पर दोनों नदियों के किनारे सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी। गांगन में नाम मात्र का नालों का पानी ही पहुंच रहा था। लोगों ने नदी के किनारे पूजन किया और बच्चों का मुंडन कराकर कथा कराई। गंदगी के चलते लोग बच्चों को स्नान कराने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। बच्चों को पानी का स्पर्श कराकर स्नान की औपचारिकता निभाई।
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रामगंगा किनारे स्नान करने को लोगों की भीड़ जुटी। प्रशासन ने महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए व्यवस्था भी कराई थी, लेकिन स्नान घाटों की सफाई नहीं कराई गई। घाटों पर फैली गंदगी के साथ ही दो फीट भी पानी नहीं था। इसमें स्नान करना संभव ही नहीं था। गंदे पानी में पहुंचकर लोग सूर्य को अर्घ्य देकर और गंगा पूजन कर प्रसाद चढ़ाकर ही औपचारिकता निभाई। कुछ बच्चों ने जरूर उथले पानी में उछल-कूद की। बच्चों का मुंडन कराया गया। हवन-कथा व गंगा पूजन किया गया। गंगा में फूल-प्रसाद चढ़ाया गया। ज्यादातर लोगों ने नदी किनारे बैठकर पूजन किया और जल स्पर्श पर हाथ जोड़ लिए। सिंचाई विभाग ने 500 क्यूसेक पानी छोड़ने का दावा किया था, लेकिन स्नान पर्व पर वह नाकाफी रहा। इस मौके पर नदी किनारे कलाकारों ने लोगों को आध्यात्मिक रस से सराबोर किया। इस मौके पर लोग साफ पानी की तलाश में लकड़ी के पुल से रामगंगा के दूसरे किनारे पर भी आते-जाते रहे।
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