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रेलवे अफसरों की लापरवाही से छिना तीन मासूमों से मां का आंचल
Updated Sat, 25 Aug 2018 02:20 AM IST
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मुरादाबाद।
रेल अफसरों की लापरवाही ने तीन मासूमों से मां का आंचल छीन लिया। डीआरएम कंपाउंड में मौत बनकर टूटे जिस पेड़ ने शुक्रवार को दीपा की जान ली उसे महीनों पहले काटने के लिए चिन्हित कर लिया गया था। ऐसे दर्जनों और पेड़ हैं जिन्हें काटने का फरमान महीनों पहले जारी हो चुका है। इसके बावजूद जिंदगी पर खतरा बने यह सूखे पेड़ काटे नहीं गए।
दोपहर के करीब दो बजे थे। डेढ़ घंटे तक पेड़ के नीचे दबकर तड़पने के बाद दीपा की सांसें टूट चुकी थीं। मदद की उम्मीद में उसने सांसों को थामने की भरसक कोशिश की। पेड़ पुराना और भारी था। पब्लिक उसे उठा नहीं सकती थी। जिन हाकिमों पर मदद का जिम्मा था वो शायद दूसरे कामों में मशगूल थे। चंद कदम की दूरी पर पुलिस चौकी और फायर ब्र्रिगेड था। पेड़ हटाने के लिए जेसीबी को मौके पर पहुंचने में डेढ़ घंटा लग गया। तब तक रेलवे के हाकिमों की कोठियां और दफ्तरों के बीच दीपा पेड़ के नीचे तड़प तड़प कर दम तोड़ चुकी थी। घर से सूट लेने निकली बेटी की मौत की खबर मिली तो परिजन बिलख पड़े। दीपा की बहनें कभी चीखतीं तो कभी बेहोश होकर गिर पड़तीं। वो कभी अफसरों से भिड़तीं तो कभी बहन के शव से लिपटकर फफकतीं। इन सबके बीच वो तीन मासूम सिसक रहे थे। मौत के मायनों से अंजान दीपा के ये तीन बच्चे मां के आंखें खोलने के इंतजार में थे। रेलवे परिसर में पड़े दीपा के शव के पास तीन मासूूम कभी सुबकते तो कभी खुद ही अपने नन्हें हाथों से आंसू पोंछने लगते। रेल कर्मी वीरेंद्र ने अपनी बेटी दीपा रानी (32) की शादी बिजनौर के मंडावर उर्फ काजी निवासी रोहताश उर्फ रोहित सैनी के साथ 10 साल पहले की थी। दीपा अपने बच्चों किंजल (8), प्रिंस (4) और चार माह की बेटी देविका के साथ पिता के घर ही रहती थी। दीपा का पति रोडवेज में संविदा पर चालक है। परिजनों ने बताया कि दीपा दोपहर करीब 12 बजे घर से निकली थी। निकलते वक्त बच्चों को समझाकर आई थी, जल्द लौटेगी और उनके लिए खाने की चीज लाएगी। वह भाई भूपेंद्र के साथ बाजार से अपना सूट लेने निकली थी। उसे आभास तक नहीं था कि रास्ते में मौत उसका इंतजार कर रही है। दोपहर साढ़े बारह बजे मनोकामना मंदिर के पास एडीआरएम की कोछी में खड़ा पेड़ उसके ऊपर मौत बनकर टूट पड़ा। गिराऊ हालत में खड़े पेड़ रेल अफसरों ने पहले ही कटवा दिए होते तो शायद दीपा की जान नहीं जाती। समय रहते पेड़ को हटाकर उसे निकाल लिया गया होता तो मुमकिन है उसकी जान बच सकती थी।
बच गई मासूम की जांच
मुरादाबाद। दीपा की सबसे छोटी बेटी देवीका चार माह की है। भाई भूपेंद्र के साथ स्कूटी पर जा रही दीपा पहले अपनी बेटी को भी साथ ले जा रही थी। अचानक उसका विचार बदल गया और उसने बेटी घर में ही छोड़ दी। इसके बाद भाई बहन बाजार चले गए।
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31 अगस्त को पिता होंगे सेवा निवृत्त, घर में चल रही थी तैयारियां
मुरादाबाद। रेलवे विभाग में तैनात वीरेंद्र सिंह सैनी 31 अगस्त को सेवा निवृत्त होंगे। घर में उनके सेवा निवृत्त के बाद कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारियां की जा रही थी। सभी बहन रेनू, पूजा, दीपा, हेमा और जया कार्यक्रम की तैयारियां में जुटी थी। लेकिन कुदरत को कुछ ओर ही मंजूर था। दीपा अपने भाई के साथ पिता के लिए शूट लेने जा रही थी। रास्ते में उसके ऊपर पेड़ मौत बनकर गिर गया।
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रेल अफसरों की लापरवाही ने तीन मासूमों से मां का आंचल छीन लिया। डीआरएम कंपाउंड में मौत बनकर टूटे जिस पेड़ ने शुक्रवार को दीपा की जान ली उसे महीनों पहले काटने के लिए चिन्हित कर लिया गया था। ऐसे दर्जनों और पेड़ हैं जिन्हें काटने का फरमान महीनों पहले जारी हो चुका है। इसके बावजूद जिंदगी पर खतरा बने यह सूखे पेड़ काटे नहीं गए।
दोपहर के करीब दो बजे थे। डेढ़ घंटे तक पेड़ के नीचे दबकर तड़पने के बाद दीपा की सांसें टूट चुकी थीं। मदद की उम्मीद में उसने सांसों को थामने की भरसक कोशिश की। पेड़ पुराना और भारी था। पब्लिक उसे उठा नहीं सकती थी। जिन हाकिमों पर मदद का जिम्मा था वो शायद दूसरे कामों में मशगूल थे। चंद कदम की दूरी पर पुलिस चौकी और फायर ब्र्रिगेड था। पेड़ हटाने के लिए जेसीबी को मौके पर पहुंचने में डेढ़ घंटा लग गया। तब तक रेलवे के हाकिमों की कोठियां और दफ्तरों के बीच दीपा पेड़ के नीचे तड़प तड़प कर दम तोड़ चुकी थी। घर से सूट लेने निकली बेटी की मौत की खबर मिली तो परिजन बिलख पड़े। दीपा की बहनें कभी चीखतीं तो कभी बेहोश होकर गिर पड़तीं। वो कभी अफसरों से भिड़तीं तो कभी बहन के शव से लिपटकर फफकतीं। इन सबके बीच वो तीन मासूम सिसक रहे थे। मौत के मायनों से अंजान दीपा के ये तीन बच्चे मां के आंखें खोलने के इंतजार में थे। रेलवे परिसर में पड़े दीपा के शव के पास तीन मासूूम कभी सुबकते तो कभी खुद ही अपने नन्हें हाथों से आंसू पोंछने लगते। रेल कर्मी वीरेंद्र ने अपनी बेटी दीपा रानी (32) की शादी बिजनौर के मंडावर उर्फ काजी निवासी रोहताश उर्फ रोहित सैनी के साथ 10 साल पहले की थी। दीपा अपने बच्चों किंजल (8), प्रिंस (4) और चार माह की बेटी देविका के साथ पिता के घर ही रहती थी। दीपा का पति रोडवेज में संविदा पर चालक है। परिजनों ने बताया कि दीपा दोपहर करीब 12 बजे घर से निकली थी। निकलते वक्त बच्चों को समझाकर आई थी, जल्द लौटेगी और उनके लिए खाने की चीज लाएगी। वह भाई भूपेंद्र के साथ बाजार से अपना सूट लेने निकली थी। उसे आभास तक नहीं था कि रास्ते में मौत उसका इंतजार कर रही है। दोपहर साढ़े बारह बजे मनोकामना मंदिर के पास एडीआरएम की कोछी में खड़ा पेड़ उसके ऊपर मौत बनकर टूट पड़ा। गिराऊ हालत में खड़े पेड़ रेल अफसरों ने पहले ही कटवा दिए होते तो शायद दीपा की जान नहीं जाती। समय रहते पेड़ को हटाकर उसे निकाल लिया गया होता तो मुमकिन है उसकी जान बच सकती थी।
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बच गई मासूम की जांच
मुरादाबाद। दीपा की सबसे छोटी बेटी देवीका चार माह की है। भाई भूपेंद्र के साथ स्कूटी पर जा रही दीपा पहले अपनी बेटी को भी साथ ले जा रही थी। अचानक उसका विचार बदल गया और उसने बेटी घर में ही छोड़ दी। इसके बाद भाई बहन बाजार चले गए।
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31 अगस्त को पिता होंगे सेवा निवृत्त, घर में चल रही थी तैयारियां
मुरादाबाद। रेलवे विभाग में तैनात वीरेंद्र सिंह सैनी 31 अगस्त को सेवा निवृत्त होंगे। घर में उनके सेवा निवृत्त के बाद कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारियां की जा रही थी। सभी बहन रेनू, पूजा, दीपा, हेमा और जया कार्यक्रम की तैयारियां में जुटी थी। लेकिन कुदरत को कुछ ओर ही मंजूर था। दीपा अपने भाई के साथ पिता के लिए शूट लेने जा रही थी। रास्ते में उसके ऊपर पेड़ मौत बनकर गिर गया।