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आपूर्ति बाधित, दवाओं का संकट
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मुरादाबाद।
सरकारी अस्पतालों में दवाओं का संकट झेल रहे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई कारपोरेशन दवाओं की मांग पूरी नहीं कर पा रहा है। कारपोरेशन से जल्दी सप्लाई नहीं मिली तो अस्पतालों में दवाओं की मारामारी हो जाएगी। जिला औषधि भंडार में गिनती और समिति स्टाक की दवाएं हैं।
मुरादाबाद जिले के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए दवाओं का सालाना बजट एक करोड़ 60 लाख रुपये का है। बजट तिमाही मिलता है। तीन किस्तों की दवाएं अस्पताल प्रशासन की ओर से अनुबंधित कंपनियों से आनलाइन खरीदी जा चुकी हैं। आखिरी किस्त की दवाओं का बजट उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई कारपोरेशन को जारी हुआ है। जिला औषधि भंडार से कारपोरेशन को 260 तरह की दवाओं की मांग भेजी गई थी। कारपोरेशन ने मात्र 20 दवाओं की सप्लाई दी है। जनवरी पहले पखवाड़े तक आपूर्ति करने का आश्वासन दिया है।
सप्लाई नहीं मिलने से औषधि भंडार में दवाओं का टोटा है। पहले कैटेगरी की एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जी, पैरासिटामोल और एंटी रैबीज वैक्सीन समेत अन्य जरूरी दवाएं तक नहीं हैं। अस्पतालों में इन्हीं दवाओं को सबसे अधिक मांग है। प्राथमिक एवं सामुदायिक केंद्रों ने दवाओं की डिमांड भेज दी है। औषधि भंडार ने स्टाक की दवाओं की सप्लाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक कारपोरेशन से जनवरी पहले पखवाड़े तक दवाओं की सप्लाई नहीं मिली तो मरीजों की परेशानी बढ़ेगी। अभी मरीजों को जो गिनती की दवाएं मिल रही हैं वो भी नहीं मिल पाएंगी।
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एआरवी की सबसे अधिक परेशानी
जिले में प्रतिमाह औसतन एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) की एक हजार वॉयल की जरूर होती है। इनकी सप्लाई जिले के नौ सरकारी अस्पतालों को होती है। औषधि भंडार में 680 वॉयल का स्टाक है। दिसंबर आखिरी सप्ताह में कांठ और बिलारी के अस्पतालों में एआरवी खत्म होने से कुत्ते के काटे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। कुत्ते के काटे लोग अभी भी इंजेक्शन लगवाने मुरादाबाद जिला अस्पताल आ रहे हैं।
- भंडार में दवाओं का स्टाक सीमित और अस्पतालों की मांग अधिक है। दवाओं की सप्लाई नहीं मिली तो संकट बढ़ जाएगा। - एसपी सिंह, चीफ फार्मेसिस्ट
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सरकारी अस्पतालों में दवाओं का संकट झेल रहे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई कारपोरेशन दवाओं की मांग पूरी नहीं कर पा रहा है। कारपोरेशन से जल्दी सप्लाई नहीं मिली तो अस्पतालों में दवाओं की मारामारी हो जाएगी। जिला औषधि भंडार में गिनती और समिति स्टाक की दवाएं हैं।
मुरादाबाद जिले के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए दवाओं का सालाना बजट एक करोड़ 60 लाख रुपये का है। बजट तिमाही मिलता है। तीन किस्तों की दवाएं अस्पताल प्रशासन की ओर से अनुबंधित कंपनियों से आनलाइन खरीदी जा चुकी हैं। आखिरी किस्त की दवाओं का बजट उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई कारपोरेशन को जारी हुआ है। जिला औषधि भंडार से कारपोरेशन को 260 तरह की दवाओं की मांग भेजी गई थी। कारपोरेशन ने मात्र 20 दवाओं की सप्लाई दी है। जनवरी पहले पखवाड़े तक आपूर्ति करने का आश्वासन दिया है।
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सप्लाई नहीं मिलने से औषधि भंडार में दवाओं का टोटा है। पहले कैटेगरी की एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जी, पैरासिटामोल और एंटी रैबीज वैक्सीन समेत अन्य जरूरी दवाएं तक नहीं हैं। अस्पतालों में इन्हीं दवाओं को सबसे अधिक मांग है। प्राथमिक एवं सामुदायिक केंद्रों ने दवाओं की डिमांड भेज दी है। औषधि भंडार ने स्टाक की दवाओं की सप्लाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक कारपोरेशन से जनवरी पहले पखवाड़े तक दवाओं की सप्लाई नहीं मिली तो मरीजों की परेशानी बढ़ेगी। अभी मरीजों को जो गिनती की दवाएं मिल रही हैं वो भी नहीं मिल पाएंगी।
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एआरवी की सबसे अधिक परेशानी
जिले में प्रतिमाह औसतन एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) की एक हजार वॉयल की जरूर होती है। इनकी सप्लाई जिले के नौ सरकारी अस्पतालों को होती है। औषधि भंडार में 680 वॉयल का स्टाक है। दिसंबर आखिरी सप्ताह में कांठ और बिलारी के अस्पतालों में एआरवी खत्म होने से कुत्ते के काटे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। कुत्ते के काटे लोग अभी भी इंजेक्शन लगवाने मुरादाबाद जिला अस्पताल आ रहे हैं।
- भंडार में दवाओं का स्टाक सीमित और अस्पतालों की मांग अधिक है। दवाओं की सप्लाई नहीं मिली तो संकट बढ़ जाएगा। - एसपी सिंह, चीफ फार्मेसिस्ट