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टिकट एलान में देरी कर रहे सांसदों के बगावती तेवर
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मुरादाबाद। संघ की ओर से टिकट कटने का संकेत मिलने के बाद मंडल के कुछ भाजपा सांसद बगावत की राह पर कदम बढ़ा रहे हैं। एक सांसद ने खुले तौर पर कहना शुरू कर दिया है कि यदि पार्टी ने टिकट काटा तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। ऐसे ही कुछ दूसरे सांसदों के भी खेमे से उठ रहे हैं। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने सूची जारी करने से पहले इस असंतोष को थामने की चुनौती होगी। सांसदों ने यह संदेश पार्टी में अपने - अपने शुभचिंतकों के जरिए नेतृत्व तक पहुंचा दिए हैं।
मुरादाबाद मंडल में सभी छह लोकसभा सीटों पर भाजपा काबिज है। 2014 की मोदी आंधी में मुरादाबाद से भाजपा के कुंवर सर्वेश सिंह, रामपुर से डा. नैपाल, अमरोहा से कंवर सिंह तंवर, संभल से एडवोकेट सत्यपाल सिंह सैनी, बिजनौर से कुंवर भारतेंदु और नगीना से यशवंत सांसद बने थे। तीन दिन पहले संघ के अहम ओहदेदारों की ओर से सांसदों को संदेश दे दिया गया है कि मंडल के ज्यादातर सांसदों का टिकट काटकर 2019 के समर में नए चेहरों को उतारा जाएगा। इसके बाद से ही सांसदों में खलबली मची है। अपना टिकट बचाने के लिए कुछ सांसदों ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है तो कुछ ने दबाव की राजनीति शुरू कर दी है। एक सांसद को अपना संसदीय क्षेत्र बदलने के लिए कहा गया था। लेकिन उन्होंने दूसरे संसदीय क्षेत्र में जाने से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने पैरोकारों की मार्फत नेतृत्व तक सख्त संदेश भिजवा दिया है कि यदि उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय लड़ेंगे। ऐसे ही सुर कुछ दूसरे सांसदों के खेमों से भी उठ रहे हैं। सांसदों के खेमों से उठ रहे बगावती सुराें से नेतृत्व अंजान नहीं है। पार्टी ने इसे थामने के लिए रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। कुछ सांसदों को समझाने तो कुछ को कार्रवाई का डर दिखाकर शांत करने की योजना है। प्रत्याशियों की सूची के लिए सभी की नजरें दिल्ली पर टिकी हैं। सभी सांसद सूची जारी होने से पहले अपनी पूरी ताकत लगा लेना चाहते हैं।
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मुरादाबाद मंडल में सभी छह लोकसभा सीटों पर भाजपा काबिज है। 2014 की मोदी आंधी में मुरादाबाद से भाजपा के कुंवर सर्वेश सिंह, रामपुर से डा. नैपाल, अमरोहा से कंवर सिंह तंवर, संभल से एडवोकेट सत्यपाल सिंह सैनी, बिजनौर से कुंवर भारतेंदु और नगीना से यशवंत सांसद बने थे। तीन दिन पहले संघ के अहम ओहदेदारों की ओर से सांसदों को संदेश दे दिया गया है कि मंडल के ज्यादातर सांसदों का टिकट काटकर 2019 के समर में नए चेहरों को उतारा जाएगा। इसके बाद से ही सांसदों में खलबली मची है। अपना टिकट बचाने के लिए कुछ सांसदों ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है तो कुछ ने दबाव की राजनीति शुरू कर दी है। एक सांसद को अपना संसदीय क्षेत्र बदलने के लिए कहा गया था। लेकिन उन्होंने दूसरे संसदीय क्षेत्र में जाने से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने पैरोकारों की मार्फत नेतृत्व तक सख्त संदेश भिजवा दिया है कि यदि उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय लड़ेंगे। ऐसे ही सुर कुछ दूसरे सांसदों के खेमों से भी उठ रहे हैं। सांसदों के खेमों से उठ रहे बगावती सुराें से नेतृत्व अंजान नहीं है। पार्टी ने इसे थामने के लिए रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। कुछ सांसदों को समझाने तो कुछ को कार्रवाई का डर दिखाकर शांत करने की योजना है। प्रत्याशियों की सूची के लिए सभी की नजरें दिल्ली पर टिकी हैं। सभी सांसद सूची जारी होने से पहले अपनी पूरी ताकत लगा लेना चाहते हैं।
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